ठंड की नरमी, वसंत ऋतु में खिले फूलों की खुशबू, मौसम की रवानी और फाल्गुन में मदमस्त कर देने वाला फरवरी माह आ गया है। प्यार के कद्रदानों के लिए यह माह व्यस्तताओं से भरा होगा क्योंकि इस महीने के अधिकांश दिन प्यार करने वालों के लिए ही हैं। इस माह प्यार के इजहार और प्रस्ताव देने के कई दिन आएंगे, जिनमें आप अपनी भावनाओं को अपने प्यार तक बड़ी ही आसानी से पहुंचा सकते हैं। पेश है प्यार करने वालों के लिए प्यार का टाइम टेबल : 7 फरवरी - यह दिन रोज डे के रूप में मनाया जाता है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आप अलग-अलग रंगों के गुलाबों का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे प्यार के लिए लाल और दोस्ती के लिए पीला गुलाब। 8 फरवरी - प्रपोज डे के दिन प्रेमी-प्रेमिकाएं अपने चाहने वालों से प्यार का इजहार करते हैं। अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं तब इस दिन कह डालिए अपनी बात, क्योंकि यह दिन आप ही के लिए बना है। 9 फरवरी - इसे चॉकलेट डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आप अपने प्यार को चॉकलेट देकर अपने संबंधों में मिठास से भर सकते हैं। 10 फरवरी - टेडी डे, जिसमें टेडी टॉयज देने के बहाने भी आप प्यार को और गहरा कर सकते हैं। 11 फरवरी - प्रॉमिस डे, सच्चे प्रेमी प्रॉमिस डे पर एक-दूसरे से प्यार निभाने का वादा करते हैं। 12 फरवरी - किस डे, इस दिन सच्चे प्रेमी-प्रेमिका किस के जरिए अपना प्यार जताते हैं। 13 फरवरी - हग डे, इस दिन अपने साथी को दें एक जादू की झप्पी और उन्हें एहसास दिलाएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं। 14 फरवरी - वेलेंटाइन डे, प्यार करने वालों के लिए सबसे बड़ा दिन जिसे संत वेलेंटाइन की याद में मनाया जाता है। इस दिन आप अपने प्यार के साथ सारा दिन बिता सकते हैं, उन्हें ब्यूटीफुल गिफ्ट्स दे सकते हैं। 15 फरवरी - इस दिन जरा संभल कर रहें, क्योंकि स्लैप डे है। 16 फरवरी - इस दिन को किक डे के रूप में मनाया जाता है, अपने प्रिय को प्यार से किक करें और लीजिए खट्टी-मीठी नोक-झोंक का मजा। 17 फरवरी - परफ्यूम डे, इस दिन फूलों और इत्र भेंट कर प्यार की खुशबू का मजा लें।18 फरवरी - फ्लर्टिंग डे, प्यार के साथ फ्लर्ट करने का मजा ले सकते हैं। 19 फरवरी - कन्फेशन डे इस दिन अपनी सारी गलतियों को अपने प्रिय के सामने कन्फेस करें और उन गलतियों को न दोहराने का वादा करें। इससे आपके संबंध और मजबूत हो जाएंगे। 20 फरवरी - मिसिंग डे, इस दिन को एन्जॉय करने के लिए आप अपने प्रिय से दूर रहें और एक-दूसरे के साथ बिताए पलों को याद करें और अपने प्रियतम को प्यार भरे मिसिंग यू के संदेश भेजें। याद कर लीजिए प्यार का यह टाइम टेबल और हो जाइए प्यार के इम्तिहान के लिए तैयार, गुड लक..
दिल के रिश्तों में बढ़ती घुटन रिश्ता तोड़ने का कारण बन जाती है। जिंदगीभर कड़वाहट और दूरियों के साथ जीने से बेहतर भी यही है कि स्वस्थ मानसिकता के साथ सबंध खत्म कर लिए जाएं, लेकिन चोट पहुंचाकर नहीं। रिश्तों को तोड़ते समय भी विनम्रता और सहृदयता जैसे भाव बनाए रखना जरूरी है। ताकि कभी जिंदगी आपको दुबारा आमने-सामने होने का मौका दे तो होंठो पर मुस्कुराहट रहे, आंखों में दर्द नहीं। प्रेमी-प्रेमिका बदलने के इस दौर में भी शालीनता और अच्छे व्यवहार का अपना महत्व बना हुआ है। इसलिए अगर आपका संबंध किसी निश्चित दिशा में नहीं जा रहा है और आप उसे जबरन घसीटने का प्रयास कर रहे हैं, तो बेहतर है कि उस पर आपसी सहमति से विराम लगा दें। दूसरे शब्दों में अगर दिल तोड़ना ही है तो एक सभ्य व्यक्ति के रूप में तोड़ें जिसमें शालीनता भी हो और संवेदनशीलता भी। अगर ब्रेकअप को ध्यानपूर्वक शालीनता के साथ अंजाम दिया जाए तो नुकसान को कम से कम किया जा सकता है। ब्रेकअप को विज्ञापन न बनाएं सुसंस्कृत होने का आज भी यही पैमाना है कि अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को अपने तक रहने दें और किसी तीसरे को बीच में न लाएं। गलती चाहे आपकी हो या आपके प्रेमी/प्रेमिका की, उसकी व्याख्या और दूसरे पर आरोप सबके सामने न लगाएं। सही समय व जगह जब आप ब्रेकअप करने का फैसला कर लें तो केवल अपनी सुविधा के बारे में न सोचें। ऐसे समय और जगह का चयन करें जिसमें दूसरे व्यक्ति की भावनाओं का भी ख्याल रखा गया हो। छुट्टियां और खुशी के अवसर ऐसे नहीं हैं जिन पर बुरी खबर सुनाई जाए। सार्वजनिक स्थल पर कभी ब्रेकअप न करें। जब भावनाएं उफान पर होती हैं तो कोई ऐसा दृश्य बन सकता है जिस पर बाद में अफसोस हो। साथी को संकेत अवश्य देंअपने अपराध बोध को कम करने के लिए आप व्याख्या देने से बचें और उससे फासला बना लें। लेकिन संबंध पर विराम लगाना वैकल्पिक नहीं होता, अगर आप काम को सही ढंग से करना चाहते हैं। इसलिए कभी भी फोन, एसएमएस या सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए ब्रेकअप न करें। सबसे अच्छा तरीका आमने-सामने बैठकर बात करना है। संबंध विच्छेद करने के ठोस कारण दें ताकि लड़की या लड़के को ठुकराए जाने का अहसास न हो और वह अलग होने के तर्कपूर्ण कारणों को अच्छी तरह समझ जाए। उसे पर्याप्त स्पेस दें अगर आपने ब्रेकअप की बातचीत कर ली है और संबंध में विराम लगा दिया है तब अपने साथी को पर्याप्त स्पेस दें। कुछ समय उन स्थानों पर न जाएं जहां उनसे मुलाकात हो सकती है। अगर आपके जीवन में कोई नया व्यक्ति आ गया है तो उस डेट को उन हैंगआउट्स, रेस्तरां या कॉफी शॉप पर न लेकर जाएं जहां आप अपने एक्स के साथ जाते थे। कोई भी अपने ब्रेकअप को याद नहीं करना चाहता खासकर जब उनसे तकलीफ होती हो। स्पेस आप दोनों के लिए ही महत्वपूर्ण हैं। ब्रेकअप करने के बाद लाइफ को नए सिरे से शुरू करने का प्रयास करें। बाते करने के लिए भी अपने एक्स को कॉल न करें। ऐसा करने से दोनों को ही कठिनाई होगी। याद रखिए जब ब्रेकअप ताजा हों तब दोस्ती का कोई अर्थ नहीं होता। ब्रेकअप को संवेदना के साथ निभाने से आपकी परिपक्वता जाहिर होती है। ब्रेकअप का यह अर्थ नहीं है कि दूसरा व्यक्ति खराब है बस आप दोनों एक-दूसरे के लिए नहीं हैं। इसमें शक नहीं है कि ब्रेकअप दोनों ही पार्टनरों के लिए कठिन है लेकिन आप जितना अधिक उसे लटकाए रखेंगे और उसके बारे में इधर-उधर चर्चा करते फिरेंगे उतना ही संबंध पर बिना कड़वाहट विराम लगाना कठिन हो जाएगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि आप संबंध पर विराम लगाने में जल्दबाजी करें और अपने रिलेशन को विकसित होने का समय ही न दें, लेकिन अगर आपने अलग होने का मन बना ही लिया है तब रिलेशन जारी न रखें।

अब से लगभग 15 बरस पहले ऑफिस प्रेम के कारण ट्रांसफर या नौकरी छोड़ने की नौबत आ जाती थी। लेकिन अब हालात काफी बदल गए हैं। मगर इसका अर्थ यह नहीं है कि सब कुछ खुल्लम-खुल्ला हो रहा है। आपके दफ्तर के जो साथी प्रेम की पींगें ले रहे हैं वे सब कुछ छिपते-छिपाते करना चाहते हैं लेकिन कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता।
आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तरों खासकर कॉल सेंटर्स में जितने लड़के काम करते हैं तकरीबन उतनी ही लड़कियां भी नौकरी करती हैं। सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक एक-दूसरे का साथ होने का स्वाभाविक नतीजा दोस्ती है। एक सर्वे के अनुसार 58 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे ऑफिस प्रेम में या तो शामिल रहे हैं या ऐसा करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अन्य दस प्रतिशत ने कहा कि वे फिलहाल ऑफिस प्रेम की गिरफ्त में हैं।
ऑफिस रोमांस को समझने के भी कुछ नुस्खे हैं। अगर आप एक ऐसे बॉस हैं जिसे इन प्रेम प्रसंगों के चलते अपने लक्ष्य को हासिल करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसे प्रेम प्रसंगों पर नजर रखने के लिए ऑफिस की इन गतिविधियों पर नजर रखें :
* जब दो लोग हर घंटे बाद कॉफी ब्रेक की जरूरत महसूस करें तो समझ लें कि दोनों के बीच कुछ हो रहा है।
* जब कर्मचारी कपड़े लैटेस्ट डिजाइन के और नए-नए पहनकर दफ्तर आने लगें और दिवाली या ईद आसपास न हो तो समझो प्रेम पर बहार आई हुई है।
* जब दो लोग साथ आते हों और साथ जाते हों तो यह महज इत्तेफाक नहीं है भले ही वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हों कि वे आपस में अजनबी हैं।
* जब बार-बार मोबाइल पर एसएमएस आने लगें या हर आधा घंटे बाद मैसेंजर एलर्ट ई-मेल का संकेत देता हो तो समझ लें दो दिल धड़क रहे हैं।
* जब आँखें आँखों को तलाश रही हों तो यह प्यार है।
सर्वे के नतीजों पर किसी को ताज्जुब नहीं हुआ है। जो लोग दफ्तर जाते हैं उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि कार्यस्थल पर सोशल चैंजेस आ रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि आज काम का भी दबाव है और करियर का भी, नतीजतन कर्मचारी ज्यादा से ज्यादा समय एक-दूसरे के साथ गुजार रहे हैं। ऐसे में प्रेम प्रसंगों की तादाद में इजाफा होना स्वाभाविक है। साथ काम करते समय एक-दूसरे को समझने का अच्छा मौका मिलता है। बेहतर आपसी समझ बन जाती है। एक-दूसरे के लिए सम्मान भी आ जाता है। ऐसे में कब प्यार अंकुरित हो जाए कुछ पता ही नहीं चलता।
बहरहाल ये ऑफिस रोमांस कॉल सेंटरों तक ही सीमित नहीं है। दरअसल हो यह रहा है कि हर दफ्तर में वर्क फोर्स कम उम्र की है। वे जिम्मेदारी की स्थिति में हैं, युवा हैं और अकेले हैं। कार्यस्थल पर उन्हें अपने जैसे ही दूसरे लोग मिलते हैं जिनकी दिलचस्पियां और पृष्ठभूमि भी उन जैसी ही होती हैं। ऐसे में यह बहुत प्राकृतिक प्रतीत होता है कि आपस में प्रेम संबंध विकसित हो जाएँ।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सहकर्मी से व्यक्तिगत संबंध बनाना अच्छा विचार है। पुराने लोग तो यह सुझाव दिया करते थे कि दफ्तर की रोशनाई अपने कलम में न भरें। लेकिन यह सब जानते हुए अपने दिल पर काबू किसे रह पाता है। दरअसल मुसीबत उस समय खड़ी होती है जब संबंधों में खटास आ जाए और रिश्ते खराब अनुभव के साथ टूटें। इससे आपका काम भी प्रभावित होता है। अगर रिश्ते मर्यादित रहें तो हल्के-फुल्के रोमांस में कोई हर्ज नहीं। मनोविज्ञान कहता है ऐसे प्लेटोनिक लव से ताजगी मिलती है।
लेकिन कुछ लड़के और लड़कियां खुलेपन की जिद में बदनामी की परवाह नहीं करते। यह सरासर गलत है क्योंकि ऑफिस आपका वर्किंग प्लेस है इसे लव स्पॉट ना बनाएं। और जरूरी नहीं कि जीवन भर आपको यहीं नौकरी में रहना पड़े ऐसे में जब आप जॉब चैंज करेंगे तो आपकी बदनामी भी साथ जाएगी।
अगर एक-दूजे के प्रति गंभीर हैं तब तो इस रोमांस का स्वागत किया जाना चाहिए। मगर जब दो बच्चों के पिता कमसिनों के साथ नैन लड़ाए तो मामला शर्मनाक और चर्चा का विषय बनता है जिसमें बर्बादी सिर्फ लड़की की होती है। ऑफिस में इस नैन मटक्के को कोई हेल्दी रिलेशन नहीं मान सकता। खैर, सबकी अपनी लाइफ है बिंदास जिएं लेकिन दूसरों की नजर में ना गिरें यह सावधानी भी आपको ही रखनी होगी।
हेलो दोस्तो! हम चाहे जितना भी फूंक-फूंककर कदम रखें पर कई बार परिस्थितियाँ हमारी आशाओं के बिल्कुल विपरीत ही बनती हैं। लाख चाह कर भी हम उन हालात में खुद को एडजस्ट नहीं कर पाते हैं। कभी सालों से चल रहा प्रेम टूट जाता है तो कभी किसी मजबूरीवश एक-दूसरे से दूर जाना पड़ता है। कभी आपस की गलतफहमियाँ इतनी गहरा जाती हैं कि उसके कुहासे को हटा पाना असंभव सा हो जाता है। ऐसे अवसरों पर सारा सुख-चैन छिन जाता है।
जी यही चाहता है कि कोई ऐसी तरकीब हो जिससे जीवन जीना सामान्य हो जाए। कोई ऐसी दवा हो जिससे जीवन में चैन व सुकून बरकरार हो जाए। पर, अफसोस ऐसी कोई भी दवा नहीं बनी है जिसको खाते ही मनुष्य पुरानी तमाम कड़वी बातें भूल जाए और वह अचानक चहकने लगे।
कोई औषधि न बनी हो पर कुछ तरीके जरूर आजमाकर देखे गए हैं जिससे धीरे-धीरे ही सही बुरी यादों से छुटकारा मिलता जाता है और मन शांत होता जाता है। यदि आप शिक्षित हैं तो यह ऐसे हालात में वरदान के समान है। अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें।
जासूसी, रोमांटिक, ट्रेजडी, हँसी-मजाक वाली किताब पढ़ने से आपका मन अपने विषय से हटकर उस किताब के विषय के बारे में सोचने लगेगा। जो भी कहानी, उपन्यास, कविता चुनें, ऐसी चुनें जिसमें आपका मन रमता जाए। अपने पसंदीदा लेखक को ही पढ़ना शुरू करें।
आपको पता भी नहीं चलेगा और उसका प्लॉट आपके दुख के प्लॉट पर हावी होता जाएगा। उसके चरित्र आपको आकर्षित करेंगे और कुछ नया सोचने के लिए बाध्य करेंगे। आप अपनी सुविधानुसार उसके चरित्रों के नैन-नक्श और हाव-भाव गढ़ने में लग जाएँगे। इसके कारण वर्तमान दुख से आपको छुटकारा मिलेगा।
लिखने से भी आपको बेहद आराम मिल सकता है। कहते हैं दुख कई बार आपको लेखक बना देता है। भले ही वह लिखी हुई चीज कहीं न छपे पर जब आप अपने मन की बात कागज पर लिखना शुरू करेंगे तो उसे लिखने की कोशिश में भाषा, विषय, भावना आदि को तारतम्य रूप से रखने की चेष्टा आपको इतना व्यस्त कर देगी कि आप दुख की पीड़ा को एक ओर रख देंगे। यदि आपने कुछ और ही विषय चुना है, अपनी कोई पुरानी घटना, उसे याद करके लिखना और भी अच्छा है।
जैसे-जैसे वह घटना याद आएगी और आप उसे संजोकर लिखते जाएंगे वैसे-वैसे दिमाग वर्तमान विषादमय घटना को खालीकर उस पुरानी घटना को भरता जाएगा। दिमाग को तत्काल पीड़ा से खाली करने का इससे बेहतर उपाय नहीं है।
फिल्में भी परेशान मन को बहुत राहत देती हैं। फिल्म में यह फायदा है कि बिना किसी कष्ट के आप तीन घंटे या कहें कि चार-पांच घंटे तक उससे बंधे रहते हैं। हॉल में फिल्म देखते समय आप कुछ और सोच नहीं सकते हैं। उस फिल्म का फिल्मांकन एवं थीम आपके दिमाग को अपने नियंत्रण में कर लेता है।
अपनी पसंदीदा फिल्मों को भी फिर से देख सकते हैं। उसका अहसास अच्छा होता है क्योंकि आप दुख की हालत में भी आनंद लेने का अनुभव महसूस कर सकते हैं। दिमाग और मन को बार-बार एक ही बात की खिचड़ी पकाने से भी निजात मिलती है।
अपनी कोई पुरानी हॉबी जिसे आप वर्षों से भूल गए हों उसे एक बार याद करने और दुहराने की कोशिश करें। पेंटिंग, मिट्टी से कुछ गढ़ना, गाना गाना, नाच सीखना, बाजार घूमना, बच्चों से बातें करना, उनके साथ कुछ गेम खेलना, पहेली हल करना जो कुछ भी आपको अच्छा लगता हो, जिसमें मजा आता हो करना शुरू कर दें। ऐसी रचनात्मकता में पीड़ा कम आनंद ज्यादा है।
यदि आपको पतंग उड़ाने का शौक रहा है तो उड़ाएं। ये सारे कार्य इतने रोचक हैं कि एक बार भी आपने जी कड़ाकर के इन्हें करना शुरू कर दिया तो उसका नशा सा सवार हो जाता है। और यकीन मानें दुख का नशा उतरने लगता है। इससे जीने की चाहत पनपती है और नकारात्मक बातें मन को तोड़ना बंद कर देती हैं।
सब बुरे हैं यह सोचने के बजाय जिन लोगों से स्नेह, दोस्ती है उसके लिए उपहार खरीदें। उपहार के लिए समय निकालकर बाजार में घूमें, तरह-तरह की नई चीजों को देखें और प्यार से अपनी जेब के अनुसार तोहफा खरीदें। उस व्यक्ति से अपनी ओर से पहल कर मिलें और तोहफा दें। अपने खाली स्थान को भरने के लिए दोस्तों, प्यारे रिश्तेदारों का साथ जरूरी होता है। थोड़ा झुकने में कोई बुराई नहीं है। विश्वास करें बहुत संबल मिलेगा।
किसी जरूरतमंद की मदद करें। इससे बहुत सुकून मिलता है। आसपास कोई समाज सेवा चल रही हो तो उसमें भाग लें। नया अनुभव और नए लोग किसी भी जख्म को भरने में बहुत कारगर होते हैं। यह सच है कि हर क्रिया की वैसी ही गति से प्रतिक्रिया भी होती है। इसीलिए जब भी आप कुछ अच्छा करेंगे, सोचेंगे, आप पर वैसा ही असर होगा।
अपने आसपास के माहौल का भी जायजा लेना चाहिए तब आपको पता चलेगा कि आप बहुतों से बेहतर स्थिति में हैं। यह सोच-समझ आपको जीवन का नए सिरे से आगाज का हौंसला देगा।
हेलो दोस्तो! कोई अपना व्यवहार क्यों और कब बदल देगा इसका अंदाजा लगाना बड़ा कठिन है। हमारी दुनिया अपनी ही धुन पर चलती है। हममें से अधिकतर लोगों को जब जिस ओर बेहतरी दिखती है बस उसी के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। उस वक्त न तो किसी नैतिकता पर विचार करने की आवश्यकता महसूस होती है और न ही किसी की पीड़ा से कोई मतलब होता है। हर पल हम एक प्रकार की तुलना में ही जीते रहते हैं। जो पलड़ा जितना अपने फायदे की ओर झुका होता है हमारा फैसला भी उसी ओर हो जाता है। समाज में ऐसे भी बहुतेरे लोग मिल जाएंगे जिन्हें जीवन के किसी एक वक्त जिन विचार, धर्म, स्त्री, पुरुष, बच्चे, भाषा, संस्कृति, रंग साहित्य आदि से नफरत थी उन्हें जीवन के दूसरे मोड़ पर उससे प्यार हो गया। तब जीने के लिए वही नफरत वाली भावना बदलनी पड़ी या कहें कि स्वार्थ के लिए हम कोई भी कदम उठा सकते हैं। किसी को नीचा दिखा सकते हैं। किसी की मासूम भावना का मजाक उड़ा सकते हैं। जिसकी भावना का तमाशा बनाया जा रहा हो उसके लिए सचमुच जीना मुहाल हो जाता है।ऐसी ही स्थिति में पड़कर रंजन (बदला हुआ नाम) सबसे मुंह छुपाते फिर रहे हैं। दोस्तों के कमेंट ने उन्हें एकांत में ढकेल दिया है। आँसू बहाने के सिवा उनके पास कोई चारा नहीं बचा है। रंजन इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र हैं और वह प्रथम वर्ष की एक छात्रा को बेहद पसंद करते थे। नए वर्ष के मौके पर उन्होंने एक लाल गुलाब और नया वर्ष बधाई कार्ड उसे गर्ल्स हॉस्टल भिजवा दिया। तकरीबन एक हफ्ते बाद वह लड़की उन्हें मिली और उस पर खूब चिल्लाई, बुरा-भला कहा और इल्जाम लगाया कि उसने उसे कलंकित किया है जबकि वह ऐसी-वैसी लड़की नहीं है। रंजन को ग्लानि हुई। यहां तक तो कहानी सीधी थी। ऐसा अमूमन होता रहता है। पर उस वक्त रंजन हैरान रह गया जब उसी लड़की के सामने दो-तीन दिनों के भीतर ही एक और लड़के ने प्रस्ताव रखा और वह झट खुशी-खुशी मान गई। लड़की के इस दोहरे व्यवहार ने रंजन को मजाक का पात्र बना दिया।अब कॉलेज के लड़के रंजन को हर वक्त चिढ़ाते रहते हैं। वह लड़की दूसरे लड़के के साथ खूब हंसी-ठिठोली करती घूमती फिरती है। रंजन को समझ में नहीं आता कि वह यह सब कैसे भुलाए। वह उस लड़की के व्यवहार से उपजे हजार सवाल अपने मन से पूछता है पर उसे जवाब नहीं मिलता। रंजन जी, हम सभी लोग दूसरों का व्यवहार सोच-सोचकर ही परेशान होते हैं। दूसरे ने खास प्रकार का व्यवहार क्यों किया, वह आप नहीं जान सकते। आप उस व्यक्ति की सोच को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं।हो सकता है वह लड़की उस लड़के को पसंद करती हो। दोनों ही एक-दूसरे को पसंद करते हों पर औपचारिक रूप से ऐलान न किया हो। ऐसे में उसे अपनी एकनिष्ठा एवं पवित्रता साबित करने के लिए उसने आपका प्रस्ताव स्वीकार न किया हो। अपने प्रेमी को अपनी वफादारी जताने का यही तरीका उसे समझ में आया हो। आखिर वह भी एक छोटी लड़की ही है। दूसरी बात यह कि वह उतनी संवेदनशील लड़की नहीं होगी, नहीं तो वह आपसे क्षमा जरूर माँगती। कई बार हम भीतर से ज्यादा मजबूत न हों तो अधिक चीखते-चिल्लाते हैं। मना करने का उसका तरीका गलत था।आपने अभी जीवन जीना शुरू किया है। पहली बार बिना किसी सलाह-मशविरे के आपने एक फैसला लिया और उस पर अमल किया। वह गलत निकला इसलिए आपको ज्यादा बुरा लग रहा है। यह जीवन है यहाँ न जाने कितनी ऐसी घटनाएं होंगी जो आपकी अपेक्षा के विपरीत होंगी। इतना हताश होने से काम नहीं चलता। आप अपने भीतर झांकें। आपने न तो किसी का मजाक उड़ाया है और न ही किसी का दिल तोड़ा है फिर आप क्यों परेशान होते हैं। आपने बड़ी ईमानदारी से अपनी भावना सामने रखी। वह कोई पाप नहीं है। एक अच्छे इंसान को दुख तो होता है पर शैतानों के लिए मन छोटा करना अक्लमंदी नहीं है। आप अपने दोस्तों से चाहे तो कह दें, उसे जो पसंद था उसके साथ हो ली। चलता है, वे भी हंसकर चुप हो जाएंगे। न भी कहें तो थोड़े ही दिनों में सब भूल जाएँगे। समय हर मर्ज की दवा है। आप मायूस न हों। खूब दिल लगाकर पढ़ें। समय के साथ ही बेहतर रास्ते भी बनते हैं।
प्यार करना आसान है पर प्रपोज करना बड़ा ही मुश्किल है। अकेले में तो काफी तैयारी कर लेते हैं आप, मिरर के सामने या फ्रेंड्स के सामने लेकिन जब वह सामने होते हैं तो जुबान साथ नहीं देती और दिल की बात दिल में ही रह जाती है। कामिनी वो वो वो...
करते रह जाते हैं।
मौका मिलता है पर आप चूक जाते हैं सोचते हैं फिर कभी सही। कहीं ऐसा न हो कि आपकी गर्लफ्रेंड या ब्वॉयफ्रेंड किसी और के साथ चले जाए और आप हाथ मलते रह जाएँ। नहीं नहीं ऐसा आपके साथ नहीं होगा। क्योंकि हम बता रहे हैं आप को कुछ रोमांचक टिप्स बिलकुल लीक से हटकर-
1. यदि आपकी गर्लफ्रेंड को रोमांच भरे खेल पसंद हैं जैसे रॉक क्लाइंबिंग और अंडर वाटर डाइविंग तो रॉक क्लाइंबिंग के बाद पहाड़ी के सबसे ऊपरी चोटी पर पहुंच कर आप अपने प्यार का इजहार कर सकते हैं। या समुद्र की गहराई में मछलियों के बीच शादी के लिए पूछ सकते हैं।
2. आप ज्यादा हिम्मती हैं और कुछ बड़ा काम करना चाहते हैं तो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फिल्म देखने का प्लान करें और फिल्म के अंतराल में अपना वीडियो प्ले करने की व्यवस्था करें जिसमें आप अपनी गर्लफ्रेंड से जीवन भर साथ देने का सवाल पूछ रहे हों।
3. यदि आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फ्लाइट में कहीं जा रहे हों तो इंटरकॉम से भी उसको प्रपोज कर सकते हैं।
4. जिस रास्ते आपकी गर्लफ्रेंड रोज जाती है, उस रास्ते के एक होर्डिंग पर किराए पर लेकर उस पर आप यह लिखवा सकते हैं-'सपना, विल यू मैरी मी?' आपका यह अंदाज आपकी प्रिय को जरूर पसंद आएगा।
5.ठंडे मौसम में अपनी गर्लफ्रेंड को एक लांग ड्राइव पर ले जाएं और उस कूल रोमांटिक माहौल में उसे शादी के लिए प्रपोज करें।
हैलो दोस्तो! कई बार आप किसी के पास रहकर भी कितनी दूर होते हैं। और कई बार आप बहुत दूर रहकर भी बेहद करीब। दरअसल, यह नजदीकी व दूरी का सफर तय करता है आपका दिमाग। आपका दिमाग जिसे पसंद करता है, प्यार करता है और चाहता है, वह सात समंदर पार रहकर भी आपके मन में बसा रहता है।
आपके दिल की हर धड़कन में उसके नाम की गूंज आती है और आपकी सांस में उसके वजूद की खुशबू। पर जो व्यक्ति आपके दिल-दिमाग पर हुकूमत नहीं करता, वह चाहे आपके जितना भी निकट क्यों न रहता हो, आपको वह कोसों दूर लगता होगा। कई प्रेमी जोड़े सालो-साल मिलने की आस में खुशी-खुशी अपनी जुदाई पलक झपकते काट लेते हैं और किसी को एक पल का साथ गुजारना भी वर्षों का वक्त बिताने जैसा लगता है।
जब दो लोग एक-दूसरे की मजबूरी समझते हैं, साझा करते हैं तो उनमें तमाम कठिनाइयों से मुकाबला करने की अनोखी शक्ति आ जाती है और वही शक्ति हर परिस्थिति से जूझने का हौसला देती है।
जिस रिश्ते में एक-दूसरे को खुशी देने की इच्छा होती है वहां दो घड़ी का साथ भी उन्हें महीनों की दूरी सहन करने की ऊर्जा से भर देता है पर जहां प्रेम की वास्तविक धारा न बहती हो वहां संग-संग रहकर भी कोई अनूठी ताकत नहीं मिलती है । ऐसे संग रहने वाले जोड़े तब ईर्ष्या से भर उठते हैं जब वे अलग रहने वाले प्रेमियों को खुशी-खुशी अपना-अपना जीवन बिताते देखते हैं ।
ऐसे ही हालात से दो-चार हो रहे हैं आसिफ (बदला हुआ नाम)। आसिफ, शबाना (बदला हुआ नाम) से प्यार करते थे पर दोनों के घरवाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं थे। शबाना अपने परिवार से रिश्ता तोड़कर भी अपना प्यार बचाना चाहती थी पर आसिफ के प्यार में उतनी ताकत नहीं थी। वह अपने परिवार के खिलाफ नहीं जाना चाहता था।
उसने शबाना से माफी मांग ली और अपने मां-बाप की मर्जी की शादी कर ली। उधर शबाना ने अपने दुख से उबरने के लिए एक नौकरी शुरू कर दी जहां छह महीने के बाद उसे फिर से अन्य व्यक्ति से प्यार हो गया है। उसका प्रेमी दो वर्षों के लिए गल्फ देश गया है जहां से लौटने के बाद वे दोनों शादी करने वाले हैं ।
शबाना खुश है, मजे में अपनी नौकरी कर रही है। उसके चेहरे पर अपने महबूब के दूर रहने की शिकन भी नहीं दिखती। उस पर तुर्रा यह कि वह पहले से भी ज्यादा स्वस्थ, दिलकश व आत्मविश्वासी लगने लगी है। आसिफ को इस बात से जलन होती है।
उसे लगता है, मां-बाप की पसंद की दुल्हन में वह बात नहीं है जो उसकी दोस्त शबाना में थी। उसे उसकी तमाम अच्छी आदतें याद आती हैं और ये खयालात उसे चैन से जीने नहीं देते कि अब शबाना का प्यार किसी और के लिए है।
आसिफ जी, आप अपनी पत्नी में यदि शबाना को खोजेंगे तो वह कभी आपको अच्छी नहीं लगेगी। हर मनुष्य अपने आपमें अनूठा व मुकम्मल है। उसे उसी के स्वरूप में कबूल करना चाहिए। शबाना को ठुकराने का फैसला भी आपका अपना ही है।
आपको लगता है शबाना भाग्यशाली है इसलिए उसे सही साथी मिल गया जिसके साथ दूर रहकर भी वह इतनी प्रसन्न है। पर यह केवल खुशकिस्मती की बात नहीं है बल्कि शबाना खुद भी सच्ची, सही व दयालु है इसलिए उसे प्यार की सच्ची अनुभूति महसूस होती है जिसके कारण वह प्रसन्न व आनंदित है। आपकी सारी तकलीफ इस बात की है कि आपने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई।
अब इन सारे बिंदुओं पर सोचने-विचारने का समय निकल गया है। अब जो साथ है उसकी परवाह कीजिए वरना ऐसा न हो कि वह भी मायूस होकर अपना ध्यान हटा ले। आपका रिश्ता नया है। यदि आप अपनी पत्नी की सुध लेना शुरू करेंगे तो हो सकता है, उसके वे गुण सामने आने लगें जिनकी आपको तलाश है। रही बात शबाना की तो इस रहस्य को जानकर भी आपको कौन सा सुकून मिल जाएगा कि आखिर वह अपने प्यार से दूर रहकर भी कैसे खुश है।
शबाना ने तो आपकी फिक्र करने व कुढ़ने के बजाय अपनी नगरी फिर से आबाद कर ली क्योंकि वह आपके फैसले का आदर करना जानती है। वह हकीकत को सलाम करती है। पर आप आज भी अपने फैसले को गलत मानकर खुद को माफ नहीं कर रहे हैं। यह सोचकर खुद पर नाज करें कि आपने अपने मां-बाप का दिल रखा।
उस समय जो ठीक व उचित लगा वह आपने किया, फिर मलाल कैसा। अब उनका इतना और सम्मान कर दें कि जो उनकी पसंद को आपने अपनाया है उसे भी उसका अधिकार दें। खुशियां आपके भी कदम चूमेंगी। यह सोचकर गमगीन न हों कि आपके भाग्य में दुख ही लिखा है। जब शबाना शादी करके वहां से चली जाएगी तो आपका अपनी गृहस्थी में रमना और भी आसान हो जाएगा।
वैवाहिक जीवन में बहुत सारी सामाजिकता और बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं। इसमें हर पल रस का सृजन करते रहना पड़ता है। यदि इस जीवन से रस विलुप्त हुआ तो जीवन बहुत कठिन होता चला जाएगा और जीवन के हर दौर में प्रेम ही रस का सृजन करता है तो जाहिर है वैवाहिक जीवन की कठिन सामाजिकता के निर्वहन में प्रेम ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा।
यहां प्रेम एक ऐसे सेतु का कार्य करता है, जिसके कारण पति-पत्नी ताउम्र स्वेच्छा से एक-दूसरे का साथ निभाते ही हैं साथ ही कर्तव्यों का निर्वहन भी खुशी-खुशी तन्मयता से करते हैं। प्यार के बिना सुखी परिवार की कामना व्यर्थ है।
दौलत चाहे कितनी कमा लें, किंतु दांपत्य जीवन में यदि प्यार का अभाव है तो खुशियों का कमल कभी खिल ही नहीं सकता है, क्योंकि दौलत से केवल सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, मगर सुख नहीं। वाह-वाही बटोरी जा सकती है पर खुशियां नहीं, जहां सुख का आधार संतोष है, वहीं खुशियों की आधारशिला प्रेम है।
प्रेम की महत्ता आज ही नहीं अतीत में भी अपने विभिन्न तथा विराट रूप में हमेशा विद्यमान रही है, स्वस्थ और सुखी परिवार की व्याख्या की जाए तो उसकी ढेरों शाखाओं में दांपत्य जीवन के प्यार का स्थान ही प्रथम होगा।
यह सर्वमान्य सत्य है कि दांपत्य प्रेम सदा-सर्वदा से स्वयं के अतिरिक्त परिवार और समाज में स्वच्छ और तनावरहित वातावरण निर्मित कर उसे सुदृढ़ता प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है दांपत्य जीवन के प्यार में होती है खुशियां हजार। बस इन खुशियों के लिए करना पड़ेगा अपनी आदतों, व्यवहार और सोच में थोड़ा-सा बदलाव
- जरूरत न हो फिर भी एक-दूसरे का काम यदि शेयर कर सकते हैं तो करें।
- इस भावना को हमेशा जीवंत रखें कि खुशी हो या गम बराबर में हिस्सेदारी निभाएंगे हम।
- ब्यूटी पार्लर से प्राप्त कृत्रिम सौंदर्य दांपत्य प्रेम के लिए आवश्यक है अथवा नहीं, यह व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है, लेकिन मितव्ययता प्रेम को प्रगाढ़ बनाने में हमेशा कारगर सिद्ध होती है।
- विश्वासघात का एक ओला काफी है प्रेम की लहलहाती फसल चौपट करने के लिए, विश्वासघात दांपत्य प्रेम का सबसे बड़ा शत्रु है, इससे बचें।
- विचार अलग-अलग हो सकते हैं, इन्हें मतभेद की तरह लें, विवाद न बनने दें।
- एक-दूसरे की अहमियत स्वीकारने में कंजूसी न बरतें, इससे अहम कम होता है और प्यार का पौधा लहलहाता है।
- ऐसा कोई भी काम न करें, जिससे साथी की भावनाएं आहत हों।
- पसंदीदा औऱ उपयोगी वस्तुएं तोहफे में दें, प्यार बढ़ेगा।
- अपनी जिद पर नियंत्रण रखें। इससे रिश्तों को तनाव से बचा पाएंगे।
- रंग-रूप को लेकर छींटाकशी न करें और न ही स्वयं से या किसी और से तुलना करें, न ही तानों की तलवार चलाएं।
- जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारें। दिखावे और आडंबरों से दूर रहें।
- सुविधा और सामर्थ्य के अनुरूप ही वीकेंड पर घूमने जाने या संगी-साथियों से मिलने का प्लान बनाएं।
- भावनात्कम जुड़ाव जिंदगीभर दांपत्य प्रेम को जीवंत रखता है, अत: एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए कभी भी अशोभनीय प्रयोग या व्यवहार का प्रदर्शन न करें।