हैलो दोस्तो! कई बार आप किसी के पास रहकर भी कितनी दूर होते हैं। और कई बार आप बहुत दूर रहकर भी बेहद करीब। दरअसल, यह नजदीकी व दूरी का सफर तय करता है आपका दिमाग। आपका दिमाग जिसे पसंद करता है, प्यार करता है और चाहता है, वह सात समंदर पार रहकर भी आपके मन में बसा रहता है।
आपके दिल की हर धड़कन में उसके नाम की गूंज आती है और आपकी सांस में उसके वजूद की खुशबू। पर जो व्यक्ति आपके दिल-दिमाग पर हुकूमत नहीं करता, वह चाहे आपके जितना भी निकट क्यों न रहता हो, आपको वह कोसों दूर लगता होगा। कई प्रेमी जोड़े सालो-साल मिलने की आस में खुशी-खुशी अपनी जुदाई पलक झपकते काट लेते हैं और किसी को एक पल का साथ गुजारना भी वर्षों का वक्त बिताने जैसा लगता है।
जब दो लोग एक-दूसरे की मजबूरी समझते हैं, साझा करते हैं तो उनमें तमाम कठिनाइयों से मुकाबला करने की अनोखी शक्ति आ जाती है और वही शक्ति हर परिस्थिति से जूझने का हौसला देती है।
जिस रिश्ते में एक-दूसरे को खुशी देने की इच्छा होती है वहां दो घड़ी का साथ भी उन्हें महीनों की दूरी सहन करने की ऊर्जा से भर देता है पर जहां प्रेम की वास्तविक धारा न बहती हो वहां संग-संग रहकर भी कोई अनूठी ताकत नहीं मिलती है । ऐसे संग रहने वाले जोड़े तब ईर्ष्या से भर उठते हैं जब वे अलग रहने वाले प्रेमियों को खुशी-खुशी अपना-अपना जीवन बिताते देखते हैं ।
ऐसे ही हालात से दो-चार हो रहे हैं आसिफ (बदला हुआ नाम)। आसिफ, शबाना (बदला हुआ नाम) से प्यार करते थे पर दोनों के घरवाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं थे। शबाना अपने परिवार से रिश्ता तोड़कर भी अपना प्यार बचाना चाहती थी पर आसिफ के प्यार में उतनी ताकत नहीं थी। वह अपने परिवार के खिलाफ नहीं जाना चाहता था।
उसने शबाना से माफी मांग ली और अपने मां-बाप की मर्जी की शादी कर ली। उधर शबाना ने अपने दुख से उबरने के लिए एक नौकरी शुरू कर दी जहां छह महीने के बाद उसे फिर से अन्य व्यक्ति से प्यार हो गया है। उसका प्रेमी दो वर्षों के लिए गल्फ देश गया है जहां से लौटने के बाद वे दोनों शादी करने वाले हैं ।
शबाना खुश है, मजे में अपनी नौकरी कर रही है। उसके चेहरे पर अपने महबूब के दूर रहने की शिकन भी नहीं दिखती। उस पर तुर्रा यह कि वह पहले से भी ज्यादा स्वस्थ, दिलकश व आत्मविश्वासी लगने लगी है। आसिफ को इस बात से जलन होती है।
उसे लगता है, मां-बाप की पसंद की दुल्हन में वह बात नहीं है जो उसकी दोस्त शबाना में थी। उसे उसकी तमाम अच्छी आदतें याद आती हैं और ये खयालात उसे चैन से जीने नहीं देते कि अब शबाना का प्यार किसी और के लिए है।
आसिफ जी, आप अपनी पत्नी में यदि शबाना को खोजेंगे तो वह कभी आपको अच्छी नहीं लगेगी। हर मनुष्य अपने आपमें अनूठा व मुकम्मल है। उसे उसी के स्वरूप में कबूल करना चाहिए। शबाना को ठुकराने का फैसला भी आपका अपना ही है।
आपको लगता है शबाना भाग्यशाली है इसलिए उसे सही साथी मिल गया जिसके साथ दूर रहकर भी वह इतनी प्रसन्न है। पर यह केवल खुशकिस्मती की बात नहीं है बल्कि शबाना खुद भी सच्ची, सही व दयालु है इसलिए उसे प्यार की सच्ची अनुभूति महसूस होती है जिसके कारण वह प्रसन्न व आनंदित है। आपकी सारी तकलीफ इस बात की है कि आपने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई।
अब इन सारे बिंदुओं पर सोचने-विचारने का समय निकल गया है। अब जो साथ है उसकी परवाह कीजिए वरना ऐसा न हो कि वह भी मायूस होकर अपना ध्यान हटा ले। आपका रिश्ता नया है। यदि आप अपनी पत्नी की सुध लेना शुरू करेंगे तो हो सकता है, उसके वे गुण सामने आने लगें जिनकी आपको तलाश है। रही बात शबाना की तो इस रहस्य को जानकर भी आपको कौन सा सुकून मिल जाएगा कि आखिर वह अपने प्यार से दूर रहकर भी कैसे खुश है।
शबाना ने तो आपकी फिक्र करने व कुढ़ने के बजाय अपनी नगरी फिर से आबाद कर ली क्योंकि वह आपके फैसले का आदर करना जानती है। वह हकीकत को सलाम करती है। पर आप आज भी अपने फैसले को गलत मानकर खुद को माफ नहीं कर रहे हैं। यह सोचकर खुद पर नाज करें कि आपने अपने मां-बाप का दिल रखा।
उस समय जो ठीक व उचित लगा वह आपने किया, फिर मलाल कैसा। अब उनका इतना और सम्मान कर दें कि जो उनकी पसंद को आपने अपनाया है उसे भी उसका अधिकार दें। खुशियां आपके भी कदम चूमेंगी। यह सोचकर गमगीन न हों कि आपके भाग्य में दुख ही लिखा है। जब शबाना शादी करके वहां से चली जाएगी तो आपका अपनी गृहस्थी में रमना और भी आसान हो जाएगा।
आपके दिल की हर धड़कन में उसके नाम की गूंज आती है और आपकी सांस में उसके वजूद की खुशबू। पर जो व्यक्ति आपके दिल-दिमाग पर हुकूमत नहीं करता, वह चाहे आपके जितना भी निकट क्यों न रहता हो, आपको वह कोसों दूर लगता होगा। कई प्रेमी जोड़े सालो-साल मिलने की आस में खुशी-खुशी अपनी जुदाई पलक झपकते काट लेते हैं और किसी को एक पल का साथ गुजारना भी वर्षों का वक्त बिताने जैसा लगता है।
जब दो लोग एक-दूसरे की मजबूरी समझते हैं, साझा करते हैं तो उनमें तमाम कठिनाइयों से मुकाबला करने की अनोखी शक्ति आ जाती है और वही शक्ति हर परिस्थिति से जूझने का हौसला देती है।
जिस रिश्ते में एक-दूसरे को खुशी देने की इच्छा होती है वहां दो घड़ी का साथ भी उन्हें महीनों की दूरी सहन करने की ऊर्जा से भर देता है पर जहां प्रेम की वास्तविक धारा न बहती हो वहां संग-संग रहकर भी कोई अनूठी ताकत नहीं मिलती है । ऐसे संग रहने वाले जोड़े तब ईर्ष्या से भर उठते हैं जब वे अलग रहने वाले प्रेमियों को खुशी-खुशी अपना-अपना जीवन बिताते देखते हैं ।
ऐसे ही हालात से दो-चार हो रहे हैं आसिफ (बदला हुआ नाम)। आसिफ, शबाना (बदला हुआ नाम) से प्यार करते थे पर दोनों के घरवाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं थे। शबाना अपने परिवार से रिश्ता तोड़कर भी अपना प्यार बचाना चाहती थी पर आसिफ के प्यार में उतनी ताकत नहीं थी। वह अपने परिवार के खिलाफ नहीं जाना चाहता था।
उसने शबाना से माफी मांग ली और अपने मां-बाप की मर्जी की शादी कर ली। उधर शबाना ने अपने दुख से उबरने के लिए एक नौकरी शुरू कर दी जहां छह महीने के बाद उसे फिर से अन्य व्यक्ति से प्यार हो गया है। उसका प्रेमी दो वर्षों के लिए गल्फ देश गया है जहां से लौटने के बाद वे दोनों शादी करने वाले हैं ।
शबाना खुश है, मजे में अपनी नौकरी कर रही है। उसके चेहरे पर अपने महबूब के दूर रहने की शिकन भी नहीं दिखती। उस पर तुर्रा यह कि वह पहले से भी ज्यादा स्वस्थ, दिलकश व आत्मविश्वासी लगने लगी है। आसिफ को इस बात से जलन होती है।
उसे लगता है, मां-बाप की पसंद की दुल्हन में वह बात नहीं है जो उसकी दोस्त शबाना में थी। उसे उसकी तमाम अच्छी आदतें याद आती हैं और ये खयालात उसे चैन से जीने नहीं देते कि अब शबाना का प्यार किसी और के लिए है।
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आपको लगता है शबाना भाग्यशाली है इसलिए उसे सही साथी मिल गया जिसके साथ दूर रहकर भी वह इतनी प्रसन्न है। पर यह केवल खुशकिस्मती की बात नहीं है बल्कि शबाना खुद भी सच्ची, सही व दयालु है इसलिए उसे प्यार की सच्ची अनुभूति महसूस होती है जिसके कारण वह प्रसन्न व आनंदित है। आपकी सारी तकलीफ इस बात की है कि आपने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई।
अब इन सारे बिंदुओं पर सोचने-विचारने का समय निकल गया है। अब जो साथ है उसकी परवाह कीजिए वरना ऐसा न हो कि वह भी मायूस होकर अपना ध्यान हटा ले। आपका रिश्ता नया है। यदि आप अपनी पत्नी की सुध लेना शुरू करेंगे तो हो सकता है, उसके वे गुण सामने आने लगें जिनकी आपको तलाश है। रही बात शबाना की तो इस रहस्य को जानकर भी आपको कौन सा सुकून मिल जाएगा कि आखिर वह अपने प्यार से दूर रहकर भी कैसे खुश है।
शबाना ने तो आपकी फिक्र करने व कुढ़ने के बजाय अपनी नगरी फिर से आबाद कर ली क्योंकि वह आपके फैसले का आदर करना जानती है। वह हकीकत को सलाम करती है। पर आप आज भी अपने फैसले को गलत मानकर खुद को माफ नहीं कर रहे हैं। यह सोचकर खुद पर नाज करें कि आपने अपने मां-बाप का दिल रखा।
उस समय जो ठीक व उचित लगा वह आपने किया, फिर मलाल कैसा। अब उनका इतना और सम्मान कर दें कि जो उनकी पसंद को आपने अपनाया है उसे भी उसका अधिकार दें। खुशियां आपके भी कदम चूमेंगी। यह सोचकर गमगीन न हों कि आपके भाग्य में दुख ही लिखा है। जब शबाना शादी करके वहां से चली जाएगी तो आपका अपनी गृहस्थी में रमना और भी आसान हो जाएगा।
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