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Thursday, September 1, 2011

क्या हुआ जो दिल टूट गया..???

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ब्रेकअप के बाद नॉर्मल लाइफ में लौटना आसान नहीं होता, लेकिन यह क्यों भूला जाए कि जीवन चलने का नाम होता है और ऐसी बातों से इसकी गाड़ी पर ब्रेक नहीं लगता। प्यार की खुमारी ऐसी ही होती है कि जब तक इंसान उसमें डूबा रहता है, उसे दुनिया का होश नहीं रहता। लेकिन यही रिश्ता अगर टूट जाए, तो इस दर्द से उबर पाना आसान नहीं होता। लेकिन जिंदगी किसी के जाने से रुकती नहीं है और इसे तो आगे ही बढ़ा होता है। ऐसे में जरूरी है कि इस चीज से बाहर आकर मुस्कुराना सीखना चाहिए।

खुद को अच्छे से ट्रीट करें
ब्रेकअप के बाद अक्सर लोग एकदम टूट जाते हैं या फिर खुद को कोसते रहते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो ऐसा न करें। अपने अतीत को भूलने की कोशिश करें। इससे आप इमोशनल तौर पर कमजोर नहीं होंगे। खुद को महत्व देना सीखें। ब्रेकअप के बाद कई लोग जिम या पार्लर जाना बंद कर देते हैं। आप ऐसा कतई न करें।
इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि आपको इसी समाज में जीना है और वह भी सिर उठाकर। तो सारा ध्यान अपने करियर पर फोकस करें। अपनी पसंद की हॉबी क्लास जॉइन करें। अपना सही रूटीन बनाएं और उसी को फॉलो करें। अपने मूड को अच्छी चीजों की ओर मोड़ें और पॉजिटिव सोच रखें। कभी यह न सोचें कि ब्रेकअप के बाद आपकी लाइफ में कुछ भी अच्छा नहीं होगा।

दोस्तों के साथ समय बिताएं
मूड ऑफ करके घर में अकेले रहने से बात नहीं बनेगी। अपने दोस्तों को हमेशा विश्वास में रखें और करीबी दोस्तों से अपनी बातें शेयर करें। उनके साथ बाहर घूमने भी जाएं। इस तरह आप अपनी भावनाएं उनसे कह पाएंगे। अपने दोस्तों के साथ कॉमेडी फिल्म देखना अच्छा आइडिया रहेगा। अगर आप किताबें पढ़ने के शौकीन हैं, तो अपने फेवरेट लेखक की बुक्स पढ़ें या फिर अच्छा म्यूजिक सुनें।

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ध्यान कहीं और लगाएं
अपनी एक्स गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के लेटर्स व फोटो संभालकर न रखें। अपनी भावनाओं को छिपाएं नहीं और ना ही बहुत ज्यादा रोएं। लोग अक्सर अपने लवर को याद करके आंसू बहाने लगते हैं और यही उनकी कमजोरी बन जाते हैं। इससे आप फिजिकल और मेंटल तौर पर कमजोर पड़ सकते हैं।

अपने पुराने प्यार को अपनी जिंदगी से दूर करने के लिए उससे जुड़ी सारी चीजें खुद से दूर कर दें। आप चाहें तो अपना ध्यान स्प्रिचुएलिटी की ओर भी लगा सकते हैं। इससे आपको स्ट्रेंथ मिलेगी। अगर आपका इंटरेस्ट सोशल वर्क में है, तो एनजीओ जॉइन कर लें या कोई और सुकून देने वाला काम करें। ऐसे लोगों से मिलकर आपको अहसास होगा कि तमाम लोग आपसे भी ज्यादा परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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संयम रखें
कुछ लोग ब्रेकअप के दर्द से उभरने के लिए जल्दबाजी में दूसरा अफेयर शुरू कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि इस तरह वे अपना तनाव दूर कर लें। हालांकि कई बार यह फैसला आपको और परेशान कर सकता है। इसलिए जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं और अच्छी तरह सोचने व समझने के बाद ही आगे बढ़ें।

आगे की सोचें
अपने फ्यूचर पर ध्यान दें। अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद अपराधबोध महसूस करने लगते हैं या फिर नकारात्मक विचारों में घिर जाते हैं। अगर आप इनमें से एक हैं, तो इस बात को ध्यान में रखकर चलें कि जो होता है, अच्छे के लिए होता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि अपने कलीग्स व दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के बारे में गॉसिप न करें।

Tuesday, August 16, 2011

आपको कैसा लाइफ पार्टनर चाहिए?


लड़की जबसे समझदार मानी जाती है तभी से उसके दिमाग में डाल दिया जाता है कि उसे शादी कर किसी पराए घर की शोभा बढ़ानी है। उसे किसी 'और' की जिंदगी संवारनी है। खैर, सवाल यह नहीं है कि माता-पिता से कैसे निपटा जाए।

सवाल है आखिर इस 'अद्भुत प्राणी' का चयन कैसे किया जाए? शायद ठीक-ठीक इस सवाल का जवाब अब तक किसी लड़की को नहीं मिला है। चलिए आपको कैसा पति चाहिए, यह जानने में हम आपकी मदद करते हैं। नीचे दिए जा रहे सवालों के अपने अनुसार सही जवाब पर टिक कीजिए और जानिए अपने दिल का हाल


1. आपका जीवनसाथी -
क. गुड लुकिंग होना चाहिए
ख. गुड लुकिंग के साथ इंटेलिजेंट होना चाहिए
ग. जैसा भी हो, मेरी भावनाओं की कद्र करे

2. आपके जीवनसाथी का व्यवहार-
क. सबके साथ सरल होना चाहिए
ख. बिलकुल नारियल जैसा चाहिए
ग. संवेदनशील होना चाहि

3. स्वास्थ्य के लिहाज से उसका-
क. लंबाई व चौड़ाई के अनुसार वजन चाहिए
ख. 6 पैक्स ऐब होने चाहिए
ग. ओवर वेट चलेगा मगर अंडर वेट नहीं चाहि

4. आप चाहती हैं शादी के बाद वह-
क. आपको कहीं घुमाने ले जाए
ख. तोहफे लाकर दे
ग. दूसरों के सामने आपसे प्यारी-प्यारी बातें करे

5. शादी के बाद नौकरी के मसले पर आप चाहती हैं-
क. परिस्थिति अनुसार निर्णय लें
ख. पति आप पर निर्णय छोड़ दे
ग. सोचती हैं पति जैसा कहेगा वैसा करेंगी

6. लाइफ इंट्रेस्टिंग बनाने के लिए आप-
क. कुछ एडवेंचरस आजमाएंगी
ख. कभी कभार घूमने जाना पसंद करेंगी
ग. पति के साथ मायके में वक्त गुजारना चाहेंगी

7. आप चाहती हैं आपके जीवनसाथी से बात करने का तौर तरीका
क. हर आयु वर्ग के साथ फिट होना चाहिए ताकि बच्चों से लेकर बूढ़े तक उसे पसंद करें
ख. तार्किक होना चाहिए
ग. मजाकिया होना चाहिए

8. यदि आप रूठ जाएं तो आप चाहेंगी कि वह-
क. अपना हक जताते हल्की फुल्की डांट लगा दे
ख. रोमांटिक बातें करके आपको मनाए
ग. किसी शायरी या कविता से आपको मना

9. जब आप उसे अपने दिल का हाल बताएं तो आप चाहेंगी कि-
क. बिन बोले ही वह सब समझ जाए
ख. आप बोलती जाएं और वह सुनता जाए
ग. कुछ अपनी कहें, कुछ आपकी सुने

10. यदि आप बीमार पड़ जाएं तो वह-
क. देखभाल करे लेकिन 24 घंटे चिपका न रहे
ख. देखभाल किसी बच्चे की तरह करे
ग. बस उसका पास होना ही काफी होगा

निष्कर्ष :
इस क्विज में हर सवाल के तीन जवाब हैं और तीनों जवाब अपने आपमें सही हैं। इन्हें अंकों में विभाजित नहीं किया गया है। इस क्विज के तहत आप तीन किस्म के अलग-अलग प्रकार के व्यक्ति से परिचित होंगी। इसमें एक व्यावहारिक गुणवत्ता लिए होगा तो दूसरे प्रकार का व्यक्ति चंचल मन का होगा। जबकि तीसरे प्रकार का व्यक्ति दिल का साफ होगा। उसकी मासूमियत आपका दिल जीतेगी

(क) यदि आपके जवाबों में 'क' अधिकतम है तो आपकी चाहत शहजादियों जैसी नहीं है। आप चाहती हैं कि आपका पति आपको सिर्फ प्यार करे, आप पर अपना हक समझे। आपका पूरा जोर होगा कि उसे आप किसी तरह की कमी महसूस होने नहीं देंगी। हर कदम पर उसका साथ देने के लिए तत्पर होंगी। यही कारण है कि आपको एक सीधा-सादा, भोला-भाला वर चाहिए जो
ज्यादा चालाक चतुर न हो यानी दिल का साफ हो

(ख) यदि आपने ज्यादा 'ख' में टिक किए हैं यानी आप बेहद व्यावहारिक हैं। जिंदगी की हकीकत से रूबरू हैं। इसलिए आप चीजों को दिल से नहीं बल्कि दिमाग से सोचती हैं। आपको कोई भी चीज आधी-अधूरी पसंद नहीं आती। आपको हर चीज पूरी चाहिए। इसलिए आपको सिर्फ स्मार्ट नहीं इंटेलिजेंस व्यक्ति की भी तलाश है। आपके इस प्रकार की पसंद का कारण है कि सफलता आपके कदम चूमती है। आपका यही व्यवहार आप दोनों के बीच सामंजस्य बैठाने में सहयोग करेगा

(ग) यदि आपने ज्यादा से ज्यादा 'ग' में टिक किया है तो मानना पड़ेगा कि आप कितनी भावुक हैं। आप अपनी भावनाएं अपना जीवनसाथी चुनने के दौरान भी छिपा नहीं सकेंगी। आपके लिए प्यार सबसे महत्वपूर्ण है। वह आपको जिस भी स्थिति में रखेगा आप रह लेंगी बशर्ते वह आपको बहुत प्यार करता हो यानी आपको भावुक जीवनसाथी चाहिए।

सात फेरों के सात खूबसूरत वचन

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वचन जो वर लेता है वधु से

पहला- अगर तुम मेरी अर्द्धांगिनी बनना चाहती हो तो किसी पर पुरुष से नहीं मिलना, बिना बताए मायके नहीं जाना और किसी निर्जन स्थान पर नहीं जाना

दूसरा- रात में घर से नहीं निकलना और पानी भरने नहीं जाना।

तीसरा - किसी भी पूजन, जप, तप में मेरे साथ रहना।

चौथा- कभी कोई दान अकेले नहीं करना, उसमें मुझे सहभागी बनाना।

पांचवां - किसी पर पुरुष के साथ नहीं रहना और कहीं भी अकेले नहीं जाना

वचन जो वधु लेती है वर से

छठवां- आप मुझे हर स्थान पर अपने साथ लेकर चलना, देश हो या विदेश

ND
सातवां- किसी भी काम को करने से पहले मुझसे सलाह जरूर लेना

और ये वचन दोनों के लिए

आठवां- शादी के तुरंत बाद अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन जरूर कराएंग

Saturday, March 5, 2011

Love and friendship: रिश्तों की पहचान खुशी व गम

Love and friendship: रिश्तों की पहचान खुशी व गम: "NDNDहेलो दोस्तो! जब कोई आपका भला कर रहा होता है उस समय आपको यही लगता है कि आप जीवनभर यह मदद या अहसान नहीं भूलेंगे। चाहे आगे चलकर विचारों के..."

Love and friendship: रिश्तों की पहचान खुशी व गम

Love and friendship: रिश्तों की पहचान खुशी व गम: "NDNDहेलो दोस्तो! जब कोई आपका भला कर रहा होता है उस समय आपको यही लगता है कि आप जीवनभर यह मदद या अहसान नहीं भूलेंगे। चाहे आगे चलकर विचारों के..."

Thursday, February 3, 2011

रिश्तों की पहचान खुशी व गम


ND
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हेलो दोस्तो! जकोई आपका भला कर रहा होता है उस समय आपको यही लगता है कि आप जीवनभर यह मदद या अहसान नहीं भूलेंगे। चाहे आगे चलकर विचारों के कोई मतभेद ही क्यों न हो जाएँ पर इस सहायता की सच्चाई स्वीकारने में तनिक भी गुरेज नहीं करेंगे।

कई बार जीवन की कोई कठिन परिस्थिति, कोई छल, कोई पीड़ा आदि के कारण जब आपको लगता हो कि आपकी जिंदगी एक बिंदु पर आकर ठहर गई हो, आपका संपर्क, आपकी कोशिश जवाब दे रही हो, आपके सपने किसी काल कोठरी में बंद कर दिए गए हों। आपके जीवन में आशा, आकांक्षा एवं महत्वाकांक्षा जैसे शब्दों का स्थान समाप्त हो गया हो तब एक मेहरबान आपको आपकी शक्ति व क्षमता का एहसास कराता है। आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आपको मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा का अवसर दिलाता है।

उस वक्त आप अपनी पुरानी ठहरी हुई एकरस जिंदगी याद करके यही संकल्प करते हैं कि उस शख्स को जीवन के हर मुकाम पर याद करेंगे, हर उपलब्धि में उसका भी हाथ मानेंगे। पर समय बीतने के साथ ही जब आपका जीवन सुधर चुका होता है, जब आपको किसी सहारे की जरूरत महसूस नहीं होती है, जब पिछले मिले हुए अवसर से आपके लिए नया मंच तैयार होने लगता है तो अचानक आपको महसूस होता है यह मौका आपके व्यक्तित्व का नतीजा है।

आपकी शख्सियत में ही वह तेज, जादुई पैनापन एवं विद्वता भरी हुई है कि आज दुनिया उसका लोहा मान रही है। आपके मन में एक अजीब सी खीझ पैदा होती है कि नाहक किसी और को इसका श्रेय दे रहे थे। और, आप इठलाने लगते हैं सोचते हैं अब उस अहसान की माला जपने की क्या जरूरत है पर किसी कारणवश आप एक बार फिर कठिन हालात में आ फँसते हैं तब आपको फिर उसी मेहरबान की याद सताती है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

ऐसी ही कठिन घड़ी से गुजर रहे हैं रमाकांत (बदला हुआ नाम) अपनी जिस दोस्त की मदद व कोशिश से वे निराश व बेजान जिंदगी से उबरकर बाहर निकले और अपनी क्षमता पहचानकर नाम कमाया उसी दोस्त को मामूली समझकर पीछे छोड़ आए। समय के साथ उनकी मामूली दोस्त अब उनसे अधिक प्रतिष्ठित व शक्तिशाली हैं पर अब रमाकांत जी उनकी मित्रता की सूची से बाहर हैं। उस दोस्त से जब भी सामना होता है उन्हें अपना ओछापन बहुत कचोटता है। रमाकांत जी, कई बार मनुष्य अपनी चालाकी को समझदारी का नाम देता है और वह उस पर भारी पड़ती है।

जिस समझदारी का वास्ता संकीर्ण सोच से हो उसका नतीजा भी छोटा ही निकलता है। जब आप जीवन में अकेले थे, आपका सारा उत्साह समाप्त हो गया था तब आपको किसी ऐसे शख्स की जरूरत थी जो आपमें जीवन के प्रति नई उमंग भरे। दुनिया में फैली अनेक रंगीनियों की ओर आपका ध्यान दिलाए। खुशियों को महसूस करने का जज्बा पैदा करे। उस समय आपकी दोस्त ने आपको जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आपका साहस बढ़ाया, आपको हौसला दिया।

यहाँ तक कि उसकी वजह से आपको अपनी महत्वाकांक्षाएँ परवान चढ़ाने का अवसर मिला पर फिर आप उसे भूल गए। फिर आपने किसी बहुत पुरानी पहचान का यह सोचकर दामन थाम लिया कि उसके आश्रय में अधिक स्थायित्व व सुरक्षा है। रमाकांत जी, जिस प्रकार आपने पाला बदला है, उसकी टीस तो आपको हमेशा ही रहेगी। यह टीस इसलिए नहीं है कि अब आपको अपनी हरकत पर शर्मिंदगी हो रही है बल्कि अफसोस हो रहा है कि आपकी दोस्त अच्छी स्थिति में है।

शायद उसकी स्थिति नहीं सुधरती तो आपको अपने किए पर कोई मलाल भी नहीं होता। अभी आपको लगता है उसका नेक स्वभाव, उसकी सहजता, मनुष्यता और मन बढ़ाने वाली बातों के साथ ही है अच्छी-खासी पहचान और पद जिसके हाथ से निकलने का दर्द आपको साल रहा है। खैर, हर व्यक्ति अपनी ही तरह का होता है। वह जो भी कदम उठाता है उसका खामियाजा उसे भुगतना ही पड़ता है। जब प्यार, दोस्ती, स्नेह, नेक नीयती आदि को व्यापार की तरह तोलना शुरू करते हैं तो उसमें घाटा-लाभ जैसा तत्व जुड़ ही जाता है।

बेहतर है कि रिश्ते को खुशी व गम के तराजू में ही तोलें। जिस रिश्ते से खुशी मिलती हो उसे सँभालें और जिससे दुःख-दर्द उससे किनारा करें। अब जो रिश्ता आपके पास है उसका साथ दें और सम्मान करें। ऐसा न हो कि आपके अफसोस की भनक इस रिश्ते को भी लील जाए। जो हो चुका उसे सुधारा तो नहीं जा सकता है, हाँ सीख लेकर बची हुई दुनिया को सुरक्षित किया जा सकतहै

दि‍ल में झाँकने का सही वक्त

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हैलो दोस्तो ! दुनिया ने धरती और आकाश में निहित अनेक गुत्थियाँ सुलझायी हैं। मनुष्य ने आकाश-पाताल में छिपे रहस्य समझने के लिए तरह-तरह की तकनीके विकसित की हैं। पर आज भी किसी का दिमाग पूरी तरह पढ़ पाना असंभव-सा काम लगता है। कोई दावे के साथ नहीं कह सकता है कि वह सौ फीसदी सामने वाले के मन की बात जानता है।

कई बार लोग अपने एक्‍प्रेशंस को इतना कंट्रोल कर लेते हैं कि भीतर का राज राज ही रह जाता है जिसकी मिसाल जासूसी विभाग में काम करने वाले लोगों में मिल सकती है। मन की गहराई का रहस्य कई बार रिश्ते के मामले में बहुत ही मानसिक उलझन में डालने वाला होता है।

तरह-तरह की गोलमोल बातों से अक्सर लोग किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाते हैं। भावनाओं की गहराई का सही अंदाजा नहीं लगा पाने के कारण वे हर समय एक प्रकार के द्वंद्व में फँसे रहते हैं। विशेषकर यदि यह रहस्यमय भावना प्रेम से संबंधित हो तो एक साथी की जान और भी सांसत में आ जाती है क्योंकि इस नाजुक रिश्ते में कोई बेहद अपना होते हुए भी बेगाना होता है।

इसी अपनेपन और बेगानेपन की उधेड़बुन नहीं सुलझा पा रहे हैं माधव गुप्ता (बदला हुआ नाम)। माधव, प्रिया (बदला हुआ नाम) को अपना निकटतम दोस्त मानते हैं। वे अपनी सारी समस्याएं उनसे बांटते हैं पर उन्हें लगता है कि प्रिया अपनी निजी समस्याएँ उनसे नहीं बांटती है जबकि प्रिया का दावा है कि वह उसकी सबसे अच्छी दोस्त है। माधव इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि प्रिया के मन के भीतर क्या चल रहा है।

ठीक ऐसी ही समस्या से जोगिंदर (बदला हुआ नाम) भी गुजर रहे हैं। पूरे दो वर्षों से मन ही मन पिंकी से प्रेम कर रहे जोगिंदर को पिंकी ने केवल इतना कहा है कि वह उसे पसंद करती है। जोगिंदर की उलझन है कि वह प्यार करती है या नहीं, यह कैसे पता लगाया जाए।

ND
माधव एवं जोगिंदर जी, समय के अलावा ऐसी कोई तरकीब या उपाय नहीं है जिससे आप झट अपनी दोस्त के दिल में झाँक लें। केवल समय आने पर ही इस राज से पर्दा उठ पाता है। हर रिश्ते में एक समय आता है जब व्यक्ति अपनी भावना सही आकार में साफ-साफ देख पाता है और उसे व्यक्त कर पाता है।

हर व्यक्ति के व्यक्तित्व की बनावट भिन्न होती है। उसके पालन-पोषण, पृष्ठभूमि के कारण हर शख्स अपनी भावना उसी के अनुसार सहेजता, समझता और संवारता है। बचपन से मिलने वाले अनुभव के आधार पर ही कोई व्यक्ति वयस्क अवस्था में भावनाओं की गंभीरता मापता है और उसे परिपक्व होने देता है।

बुनियादी तौर पर आपके व्यक्तित्व की बुनावट ही है जो आपको किसी से जल्द या देर से जोड़ती है। या यूं कहें कि किसी रिश्ते के निर्णायक नतीजे तक पहुँचने में जो समय लगता है वह आपका व्यक्तित्व ही तय करता है। हर व्यक्ति की तात्कालिक परिस्थितियां भी उसे किसी फैसले तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि आप भावनात्मक रूप से अधिक अकेले हैं और आपका दोस्त आपके मन में बैठे छवि के अनुरूप है तो आप अपनी भावना को आकार देने और व्यक्त करने में कम समय लेंगे।

किसी पर दबाव डालकर उसे कोई निर्णय लेने के लिए उकसाना उचित नहीं है। यह उस व्यक्ति के साथ अन्याय है। यह सही है कि एक युवक या युवती के लिए ऐसी दुविधा में रहना बहुत पीड़ादायक है क्योंकि उसका बेहतरीन समय उस रिश्ते के परिपक्व होने पर निर्भर हो जाता है। नकारात्मक फैसले का डर, उसे नए सिरे से एक मनपसंद साथी तलाशने की कल्पना को जन्म देता है, जिसके विचार से ही वह कांप जाता है।

इन सबके बावजूद सही समय का इंतजार करना ही एक मात्र रास्ता है। किसी भी नौजवान के लिए ऐसी भावना को अपनी कमजोरी के बजाय मजबूती के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। किसी अच्छी या अच्छे दोस्त के सहयोग एवं अपनेपन से खुश होकर अपने भविष्य एवं कॅरिअर को बेहतर बनाने में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

यदि आप अपने जीवन को लेकर गंभीर होते हैं तो आपके व्यक्तित्व में भी एक प्रकार की गंभीरता एवं स्थायित्व सा आता है। यह ठहराव एवं करियर में उपलब्धि सामने वाले को सकारात्मक निर्णय की ओर ले जाती है। वह अपने आपको भावनात्मक एवं सामाजिक रूप से ऐसे व्यक्ति के पास अधिक सुरक्षित पाता है। दूसरे पर दबाव डालने व चिंता करने के बजाय खुद के भीतर गुण इकट्ठा करना चाहिए ताकि दूसरा प्रभावित एवं आश्वस्त हो सके

For You

There are three ways to get something done, Do it yourself. Hire someone to do it for you. Forbid your kids to do it.

Wednesday, March 10, 2010

क्या सीख रहे हैं अपने काम से आप?

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जब आप बच्चे थे, तब आप बड़े होकर क्या बनना चाहते थे? हालाँकि बचपन में आप बहुत सारी चीजों से फेसिनेट होते हैं, बाद में आपका इंट्रेस्‍ट बदल भी जाता है, फिर भी कुछ ऐसा होता जरूर है, जिसे आप 'एक्चुली' करना चाहते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता आप उसे कोई भी नाम दे दें... चाहे तो रुचि भी कह सकते हैं।

लगभग यही बात आमिर ने अपनी फिल्म 'थ्री इडियट्स' में कही है। सबसे पहले तो यह तय करें कि आपको क्या करना बहुत अच्छा लगता है, फिर वह काम करते हुए आप पूरी तरह से ऑनेस्‍ट रहें, डूबकर काम करें... वैसे वो तो स्वतः ही होगा, क्योंकि वो आपकी रुचि का काम जो है। फिर उससे सीखा भी जा सकता है, लेकिन जब आप कोई काम अरुचि और दबाव में करेंगे तो फिर उसका न तो आनंद ले सकेंगे और न ही उससे कुछ सीख सकते हैं, सफलता पाना तो और भी मुश्किल का मैदान है।

तो कुल मिलाकर मामला वही है कि आप वह करो जिसे हकीकत में करना चाहते हो, बाकी चीजों के बारे में चिंता मत करो। वह आखिरकार स्थापित होगा ही। इस बात की भी चिंता मत करो कि आपको कितनी सफलता मिली है, चिंता इस बात की करो कि आपने जो किया या जो कर रहे हैं, उससे आपने सीखा क्या, याद क्या रखा...? पाया क्या... मटि‍रि‍यलि‍स्‍टि‍क पाना, एक्‍चुअल में पाना नहीं है...।

क्या आपने ऐसे लोगों को देखा है जिनके पास डिग्री कोई और होती है और वे जो काम कर रहे होते हैं, वह पूरी तरह से अलग होता है। आजकल ऐसा बहुत देखने में आ रहा है कि डिग्री कुछ और होती है, और काम कुछ और... जैसे गायक पलाश सेन और मॉडल अदिति गोवित्रीकर... मूलतः दोनों डॉक्टर हैं, लेकिन दोनों ही बिलकुल अलग दुनिया में काम कर रहे हैं... लेकिन मूल में एक ही बात है... खुशी... काम करने की खुशी...। आखिर वे ऐसा क्यों कर रहे होते हैं। सीधी-सी बात है वे उस काम को अपनी पूरी ऊर्जा, लगन, शिद्दत और रुचि से कर रहे होते हैं।

आजकल हत्यारी प्रतिस्पर्धा के दौर में किसी परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक पा लेना भी खुश होने के लिए नाकाफी है, क्योंकि यहाँ जोर सीखने पर नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धा में सभी को पछाड़कर आगे आने पर है। इस सबमें पसंद का पढ़ना या सीखना तो पता नहीं कहाँ चला जाता है।

जरा रुककर ये भी सोचें कि आपके जीवन का अल्टीमेट लक्ष्य क्या है...? खुशी... ना! तो खुशी पाने के लिए आप क्या कर रहे हैं? मशीन न बनें... वो करें जिससे आप कुछ सीख पाएँ... जिसमें आप डूब पाएँगे। तो जानें कि अपनी रुचि के किसी भी काम से आप कैसे कुछ सीख सकते हैं।

1.
पढ़ने को लेकर हमेशा भुक्कड़ रहो। यह आपके सोचने की लि‍मि‍ट में इजाफा करेगा।

2.
हार्ड वर्क करो। हार्ड वर्क से ज्यादा और कुछ भी कीमती अभी तक तो साबि‍त नहीं हुआ है।

3.
नया करने की कोशिश करो। ढर्रे पर चलना हमेशा आसान रहा है, मुश्किल काम करो और देखो कि कैसे खुशी आपके दरवाजे आ धमकती है। दृढ़ होना और रूढ़ होना दो अलग-अलग बातें हैं।

4.
क्रि‍एटि‍व बने रहो। बच्चे नेचरली क्रि‍एटि‍व होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमारी क्रि‍एटि‍वि‍टी खो जाती है।

5.
ईमानदारी और खरेपन का ध्यान रखो।

6.
हमेशा कंसि‍स्‍टेंट, लॉजि‍कल और प्रेक्‍टि‍कल वि‍जन रखो।

हम सारे हरदम क्या होना चाहते हैं? खुश होना ही ना! बस...। तो उस काम को ढूँढो जो आपको खुश करे, नहीं तो आप खत्म हो जाओगे। लेकिन उसे पूरी गरिमा और सच्चाई से करो अन्यथा आप जीवन को खो दोगे।

Rajan Shrivastava
Lucknow (Uttar Pradesh)
rajan_29oct@yahoo.com

Monday, March 8, 2010

प्यार का दर्द : मीठा-मीठा, प्यारा-प्यारा

दोस्तो! प्यार करने वालों को प्यार का बहाना चाहिए। प्यार पाने और जताने का मौका व माहौल हो तो दो दीवाने कब पीछे रह सकते हैं। सच, प्यार से कभी किसी का जी नहीं भरता है। ज्ञान की तरह ही यह एक ऐसा खजाना है जिसे जितना भी लुटाया जाए, कम नहीं होता। तो दोस्तो, किसी भी प्रिय को दें प्यार का पैगाम।

एक ऐसा पैगाम जो किसी के जीवन के खालीपन को भर दे। किसी के मायूस चेहरे पर उम्मीद की खुशी ला दे। वर्षों से जिस शब्द को सुनने का इंतजार था वह इंतजार की घड़ी खत्म हो जाए। आज जिस प्रकार सूरज की रोशनी ने कोने-कोने में छुपे अँधेरे को उजाले में बदल दिया है उसी प्रकार आप भी अपने साथी के दिल से दुख, नफरत, गिले-शिकवे को हमेशा के लिए खत्म कर दें। प्यार में वह गर्मी है जो दिल में जमी गलतफहमी और अविश्वास की बर्फ पिघला सकती है। तो आज छलकाएँ प्यार का जाम और खाली न होने दें प्यार का पैमाना।

कहते हैं, प्यार में जो नशा है वह किसी शराब में नहीं। प्यार के नशे में गोते लगाएँ और जीवन की तमाम कड़वाहट को भूल जाएँ। बहुत सारे प्यार करने वाले सालों से इसी संकोच में बैठे हैं कि यदि उन्होंने अपनी भावना का इजहार अपनी या अपने दोस्त के सामने किया तो वह नाराज न हो जाए। इस चक्कर में दोस्ती भी हाथ से न चली जाए पर जब आज दिल कह रहा है तो करें प्यार का इजहार। अगर जवाब नहीं में आए तो भी उसे सँभाल लें।

आजकल तो इजहार-ए-इश्क बहुत ही उदारता के साथ लिया जाने लगा है। आप कह सकते हैं कि मेरी दोस्ती में प्यार जैसी भावना की गहराई है। आज प्यार शब्द का इस्तेमाल करके हमने अपनी दोस्ती पर पक्की मुहर लगा दी है। पर अपने दिल की बात को लंबे समय तक दबाए रखना अक्लमंदी नहीं है। कुछ लोग अपने जीवन में प्यार बाँटते चलो के सिद्धांत पर चलते हैं और उन्हें उसी में खुशी भी मिलती है। यदि हम भी इसी सिद्धांत को जीवन में लागू करके चलें तो हमारे लिए भी खुशियों का अंबार राहों में पड़ा मिले।

अपनी कोई भी कमी, मुश्किल और तमन्ना बेझिझक सहजता से कह डालें। दिल हलका हो जाएगा और मन का गुबार धुल जाएगा। जैसे, होली, दिवाली और ईद पर हम ऐसे मूड में होते हैं कि हम हर मुस्कराते चेहरे और आगे बढ़े हुए हाथ का स्वागत करते हैं। उसी प्रकार हम प्यार में दिल की तमाम रंजिशों को भुलाकर एक नई शुरुआत करें।

प्यार के कैनवास को बड़ा करें ताकि उसमें तमाम तरह के रंगों और उसके शेड से जीवन की बहुआयामी तस्वीर बनाई जा सके। एक ऐसी तस्वीर जिसमें दोनों के विकसित होने का अवसर हो। जिसमें दोनों के सपनों के लिए पर्याप्त जगह हो। त्याग व कोमलता के रंग दोनों पर समान रूप से बिखरे हों। जहाँ लाल रंग से तकलीफ का अहसास नहीं बल्कि आशा की लालिमा का संदेश मिले। ऐसी तस्वीर जिसकी आँखों में जमाने के दर्द पर किसी के साथ होने की खुशी का रंग चढ़ा हो। मंजिल चाहे जितनी भी दूर हो उसे पाने का हौसला दोनों की आँखों में साफ नजर आए। प्यार के रिश्ते की तस्वीर इतनी विशाल हो कि उसमें दोनों की कमजोरियों को भी गुजारे के लिए उचित स्थान मिल जाए।

खुशियों के नए-नए बहाने ढूँढ़ना ही अच्छे प्रेमियों की निशानी होती है। अपने अंदर एक संकल्प करें कि अपने साथी को खुश रखने के तमाम रास्ते आप खोज लेंगे। किस बात से और क्या करने से उसके मूड में खुशियों का प्रवेश होता है, इसका पता लगाने की जिम्मेदारी हर प्यार करने वालों की होनी चाहिए। आज के दिन एक बात गाँठ बाँध लें कि अपने प्यार के प्रति हमेशा आदर की भावना रखें। किसी बात पर असहमति होने पर भी कोशिश करें कि मन शांत हो जाए तब ही उस विषय को छेड़ें।

शब्दों का प्रभाव हमारे रिश्ते पर बहुत पड़ता है। उत्तेजना में कई बार दुर्भावना नहीं होने पर भी हम मन को आहत करने वाले शब्द बोल देते हैं। ऐसे शब्द महीनों के खूबसूरत बिताए पलों को झटके में धो डालते हैं और वहाँ चोट के निशान छोड़ जाते हैं। प्यार भरे शब्द और सच्ची भावना प्यार को बहुत ही ठोस आधार देते हैं। आप यह वायदा लें कि प्यारे शब्द, प्यारी सोच और सच्चे भरोसे का दामन आप कभी नहीं छोड़ेंगे। आपकी यह कोशिश साल के 365 दिन सच्चे प्यार का ही अहसास कराएगी।

काश मै उससे बात कर पाता....

मै एक लड़की से बहुत प्यार करता हु ..! वो मेरी जिन्दगी है शायद मै उसके बिना जी ना सकू पर मै क्या करता मने एक एसमेस किया और उसके भाई ने वो एसमेस पढ़ लिया उसके बाद उसने मुझे फ़ोन करके कहा की तू आज के बाद यहाँ फ़ोन भी मत कर देना उसके बाद भी मेरी जान ने मुझसे बात करने की बहुत कोशिश किया पर मैंने उसके फ़ोन का कोई जवाब नहीं दिया... अब मै सोच रहा हु की अगर वो कभी भी फ़ोन करेगी तो मै उसका जवाब जरुर दूंगा...मुझे माफ कर दो मेरी सुमन जान.......please please जान

मुझे किसी से बहुत प्यार है

में किसी को बहुत चाहता हूँ,वोह भी मुझे बहुत चाह्ती है,में उसके साथ बहुत खुश हूँ और मुझे पूरा विश्वास है की हम दोनो अपने प्यार के बल पर अपने माता-पिता का दिल जीत लेंगे,दरअसल हम दोनो के धर्म अलग हैं,पर में मानती हूँ की जब हम किसी को चाहते हैं,हम उसे एक अचछे व्यक्ति की तरह पसंद करते हैं,ना की वो किस धर्म को मानता हो,मेरा कहना है,भगवान सब के लिए एक हैं, फर्क सिर्फ़ इतना है कि लोग भगवान को अलग अलग नजरिये से देखते हैं, और तो कुछ अंतर नही ना?..आपको क्या लगता है?

आजमाइए बिंदास लव-रंग

लो दोस्तों ! यदि आप पूरे साल शराफत की सफेद चादर ओढ़ते-ओढ़ते बोर हो चुके हैं तो शरारत के लाल रंग में डूबोकर उसे ओढ़ लें । इसका असर यूँ होगा कि आप पलक झपकते ही बिंदास अंदाज में गाने लगेंगे, 'शराफत छोड़ दी मैंने...।' ऐसा करते ही आप में एक चमत्कारी शक्ति जाग जाएगी और आप बेहद बोल्ड और बिंदास बन जाएँगे। यह हिम्मत उन लोगों के लिए संजीवनी का काम करेगी जो पूरे वर्ष मेमने की तरह मेमयाते तो रहे पर प्यार के इजहार के तोतले शब्द भी उनकी जुबान से नहीं निकल पाए।

लव-प्रपोजल की बात सोचते ही उनके दिल की धड़कन डूबने लगती थी। जिनके हाथ उनकी नब्ज ही पकड़ में नहीं आती, प्रेमिका क्या खाक उनके हाथ आने वाली थी। सो, शराफत छोड़ दी का ठुमका लगाते ही आपकी धड़कन एक चालू घड़ी की माफिक बराबर चलने लगेगी। आप अपने साहस का परचम लहराते हुए अपनी दोस्त के घर पहुँच जाएँगे। पेश है वहाँ का नजारा-आपकी दोस्त अपने पूरे परिवार वालों के बीच बैठी है। और आप सीधा वहाँ पहुँचकर रेड चुन्नी उसे उढ़ाते हुए बुलंद आवाज में पूछते हैं- क्या तुम मेरा अमर प्रेम स्वीकार करती हो?

आपके इस बुलंद बिहेवियर से आपी वो ऐसे भौंचक्का हो जाएँगी कि उनकी हिलने-डुलने और बोलने की शक्ति ही चली जाएगी। फिर आपकी दोस्त फौरन उठकर रेड चुन्नी यानी दुपट्टा हाथ में लहराकर गाने लगेगी-'ओढ़ ली चुनरिया तेरे नाम की... ।' वह गाते हुए आपका हाथ थामे घर से बाहर निकल जाएगी और पीछे-पीछे भागे आएँगे आपकी नई नवेली प्रेमिका के दो भाई। दोनों आपके चरणों में आ गिरेंगे। दो आवाज, पर एक स्वर में, एक प्रश्न आएगा मेमना कैसे बना शेर? हमें बता दो फॉर्मूला और ले जाओ मेरी यह बहन बतौर गुरु दक्षिणा।

इस लाल रंग के राज वाला फॉर्मूला आप उन्हें जरूर बता दें। फिर तो प्रेमियों की संख्या मल्टिप्लाई के हिसाब से बढ़ती जाएगी। आप दो, आपके उन दो के दो। इस बेदर्द व बेरहम दुनिया से निपटने के लिए ऐसी फौज की बड़ी आवश्यकता है। उन प्रेमिकाओं के लिए भी यहाँ एक फॉर्मूला बताया जा रहा है जिनके प्रेमी वर्षों से लाल रंग का गुलाब, लाल रंग की सैंडिल (अन्यथा न लें), लाल रंग की चुन्नर तो भेंट करते रहते हैं पर एक खास जगह, खास लाल रंग लगाने को राजी नहीं होते। विशेष स्थान यानी माथे के बीचोंबीच। उफ ! कितना समझाना पड़ता है। जी, मांग भरो सजना कार्यक्रम से मुँह छुपाने वाले प्रेमियों के लिए है यह नुस्खा।

तो वह क्या कहावत है, गुड़ खाओ और गुलगुला से परहेज। ऐसे आशिकों को गुलगुला खिलाने का सही दिन व मौका आ गया है। अब आप प्रेमिकाएँ नारी धर्म निभाने के लिए तैयार हो जाएँ। अरे, इसमें अचरज वाली कौन सी बात है। नारी का धर्म है टेस्टी यम्मी भोजन बनाना एवं परोसना। यह पढ़कर तमाम नारीवादी मुझे जितनी जोर की पिचकारियाँ मारना चाहें, मारें, पर आज भी कौन सा चलन बदल गया है जो मैं यह न बोलूँ। हाँ, तो धूर्त प्रेमियों की सताई हुई बेचारी प्रेमिकाएँ, सियाने प्रेमियों को वश में करने का सही मुहूर्त है रंगपंचमी।

अपनी नाजुक कलाई को थोड़ी सी तकलीफ दें और गुलगुले के घोल में अच्छी तरह भाँग मिलाएँ। खिलाने के बाद क्या होगा यह सोचकर शर्म से आपका रंग लाल नहीं हो रहा है तो कोई बात नहीं लाल रंग से भरी बाल्टी उँडेल लें। फिर एक हाथ में रखें गुलगुला और दूसरे हाथ में रखें वह विशेष लाल रंग। अब आप अपने प्रेमी को गुलगुला खिलाती हुई गाएँ, 'मोहे रंग दे... मोहे रंग दे... ।' यकीन मानिए तीसरी पंक्ति तक पहुँचते-पहुँचते ही, आपका बालम बीचोंबीच यानी मांग पर लाल रंग भर देगा।

यह मांग भरो कार्यक्रम होगा पूरे जमाने के सामने। इसे कहते हैं बिन बारात, बिन मंगनी, बिन ब्याह, मांग भरो फॉर्मूला । अरे बाबा, यह कोई गुलगुला घोटाला नहीं है। हाँ, बस एक सावधानी बरतें । अपने साजन को पकड़कर मोबाइल से एक वीडियो फिल्म बना लें। सजना साथ निभाना गीत गाते हुए फोटो उतार लें। क्यों? मेरी भोली, नादान प्रेमिकाएँ, रंग और नशा तो एक दिन उतर जाता है। तब कैसे याद आएगा उन्हें यह कार्यक्रम। फिर आप ये तस्वीरें अपने और उनके माता-पिता के पास भेज दें। इसके बाद होगी चट मंगनी, पट ब्याह।

जिन बेचारियों को घर की दहलीज के बाहर कदम रखने की अनुमति नहीं है और न ही उनके परवानों को आस-पास फड़फड़ाने की इजाजत है, उनके लिए भी है पेश है एक ऐसा फॉर्मूला जो सात दीवारें पार कर पिया का रंग उन तक पहुँचाएगा। जी हाँ, शोकिया ने बड़ा जोरदार मोबाइल पिचकारी बनाया है। हर साइज, हर रंग में, हर दुकान पर उपलब्ध है । जिनके संगम से जमाने वाले को बैर है, उनके लिए बस यह शोकिया का मोबाइल पिचकारी ही एक मात्र सहारा रह गया है । तो, फटाफट दोनों जाकर खरीद लाएँ मोबाइल पिचकारी। हाँ तो, अब प्रेमियों यह गाना,-'बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा...' गाते हुए काला बटन दबाएँ। यह बटन दबाते ही आपकी प्रेमिका सात परदे में भी क्यों न छुपी हो, उसकी मोबाइल पिचकारी उसे रंगों से सराबोर कर डालेगी।

इस प्रकार पिया के रंग से महरूम रखने की घर वालों की चाल पूरी तरह नाकाम हो जाएगी। यह करिश्माई पिचकारी घूम-घूम कर प्रेमिकाओं पर रंग फेंकेगी और आप नाचते हुए अनार कली की तरह गाने लगेंगी-'परदा नहीं जब कोई खुदा से बंदों से परदा करना क्या ?' यह सुनते हुए घर वालों की नजरें और सिर दोनों झुक जाएँगे और आप पिया मिलन को बेरोक-टोक निकल जाएँगी। ये फॉर्मूले केवल होली-रंगमंचमी के दिन ही काम करते हैं।

चलो, अब मान भी जाओ

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जब आपका बॉयफ्रेंड आपसे किसी छोटी-सी बात पर गुस्सा हो जाए और लाख मनाने पर भी न माने तो आपको क्या करना चाहिए। यदि बात हाथ से निकल गई हो तो यह समझने में ही भलाई है कि अच्छा हुआ जो ऐसे व्यक्ति से पीछा छूट गया और यदि नहीं तो फिर कुछ ऐसे तरीके अपनाएँ होंगे जिससे वह जल्द से जल्द आपके पास आ जाए।

1. पूरी तरह से उससे दूर रहने का प्रयास करें। कुछ भी बात न करें। कोई सॉरी नहीं, कोई गुडबाई नहीं तथा कोई सफाई नहीं। फोन आए तो अपना फोन स्विच ऑफ कर दें। कुछ नए मित्रों के साथ अपने आपको व्यस्त रखने का प्रयास करें।

2. यदि आपके पास उसका ईमेल आता है तो उसे बिना कुछ लिखे ही सेंड कर दें। यदि वॉइस मेल पर कुछ मैसेज आए तो उसे बिना सुने ही डिलीट कर दें।

3. उस तक किसी भी तरह यह खबर पहुँचाएँ कि उसका पक्का दोस्त आपसे दोस्ती करने के लिए तैयार है और आपको भी वह अच्छा लगता है। कभी उसके सामने ही उसके दोस्त के साथ होटल में जाएँ और बहुत अच्छी तरह से अभिनय करें।

4. सिम्पलिसिटी को अपनाएँ। बिलकुल सादगी से रहना शुरू कर दें। मानो आजकल के वर्तमान फैशन से आपका कोई वास्ता ही नहीं है। या पहले से सादगी पसंद हैं तो अब मॉडर्न हो जाएँ।

उपरोक्त टिप्स आपने अपनाने शुरू कर दिए हैं जब कोई न कोई उनका ही दोस्त यह खबर उस तक पहुँचाएगा ही। आप तो बस इंतजार कीजिए अपने मिशन की सफलता के जश्न मनाने का।

दिल अपना और प्रीत पराई प्यार के नाम पर डिपेंडेंसी ठीक नहीं

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हाय फ्रैंड्स ! रोमांस करने वाले बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पहले दिन से अंतिम दिन तक खुशी के झूले पर सवार हों और उन्हें कोई कष्ट नहीं हुआ हो। ज्यादातर लोग तो इसकी पीड़ा से ही कराहते रहते हैं। फिर भी यदि आप यह पैगाम दें कि कोई प्यार न करे, दुनियादारी के हिसाब से चले तो प्यार करने वाले शायद ही इस बात को मानें

प्यार करने वालों की सबसे विचित्र बात यह लगती है कि वे कई बार ऐसे रिश्ते में पड़ जाते हैं जो समाज के सांचे में किसी तरह से फिट नहीं बैठते उसके बावजूद उनकी उम्मीद यही होती है कि अन्य सोशल रिलेशनशिप की तरह ही उनका यह रिलेशन भी स्वीकार हो जाए, परमानेंट हो जाए। सोसाइटी द्वारा अस्वीकार किए जाने की बात तो छोड़ें, कई बार वे खुद ऐसे रिश्ते से कब मुकर जाएँगे खुद उन्हें मालूम नहीं होता पर जब एक दिन ऐसा हो जाता है तो वे इस कदर आसमान-जमीन एक करने लगते हैं मानों उन्हें इसका रत्ती भर भी अनुमान या आभास नहीं था ।

ऐसे ही एक अनएक्सपेक्टेड अलगाव से विचलित हो गए हैं, प्रकाश। पहले तो वह एक शादीशुदा महिला से प्रेम कर बैठे और फिर जब उस महिला को प्रकाश के प्यार के अति गंभीर रूप का अहसास हुआ तो वह डर कर पीछे हट गई। उसने इस रिश्ते से तौबा कर लिया लेकिन प्रकाश हैं कि उन्हें भूल नहीं पा रहे हैं।

दिन-रात उससे मिलने के लिए बेकरार रहते हैं। उनकी मानसिक व शारीरिक सेहत खराब हो रही है। सबसे मिलना-जुलना छोड़ उन्होंने तनहाई को ही अपना साथी बना लिया है। प्रकाश जी, आपकी फ्रैंड न तो अपने हसबैंड से अलग रह रही थीं और न ही उनका डिवोर्स का इरादा था फिर आपने कैसे सोच लिया कि वह आपके साथ रहने लगेंगी या मिलती रहेंगी । उनका अपने हसबैंड के साथ मनमुटाव हो गया था, वह जीवन में उदास और अकेली हो गई थीं, उन्हें एक हमदर्द दोस्त की जरूरत थी जिससे कि वह अपनी उदासीनता और नीरसता तोड़ सकें।

आपमें उन्हें वह दोस्त नजर आया। देखते-देखते वह इतने करीब आ गई कि आप दोनों में कोई भेद नहीं रह गया। इसलिए अब आपको उनकी जुदाई सही नहीं जा रही है । आप इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि वह आपको छोड़ सकती हैं पर हकीकत यही है कि वह आपको कभी नहीं मिलेंगी । आपको इस बात का भी कष्ट है कि आपकी भावना के साथ खेला गया। आपका इस्तेमाल किया गया और जब वह संभल गई और अपने पति के साथ ताल-मेल बैठा लिया तो आपको दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया।

आप जितना जी चाहें उसे या खुद को कोस लें पर अब इस रिश्ते में कुछ नहीं हो सकता है। दरअसल, आप अकेले थे और आपको उसका साथ मिला तो आप उसकी तुलना में अधिक भावुकता से जुड़ते गए। यूँ तो उसे भी एक समय आपकी बहुत ज्यादा जरूरत थी पर इसलिए नहीं कि वह अपना घर-बार तोड़कर या छोड़कर आपके पास आना चाहती बल्कि इसलिए कि वह अपना घर बचाना चाहती थी। वह चाहती थी कि वह खुश रहे ताकि वह अपने पति की छोटी-मोटी अप्रिय बातों को नजरअंदाज कर उसे खुश रख सके। दोस्ती की ताकत से उसकी सहनशक्ति बढ़ जाए।

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हर समय कुढ़ने-घुटने के बजाय वह खुशी-खुशी अपने पति का खयाल रख सके। यदि गहराई से देखा जाए तो वह खुद से ज्यादा अपने शादी के रिश्ते की परवाह करती रही। उसने तमाम प्रकार का निजीपन बाँटने के बाद भी कभी आपके साथ जीवन बिताने का कोई वायदा नहीं किया। इसके बावजूद आप उसे स्वार्थी समझ रहे हैं।

प्रकाश जी, आपको चाहे जितना भी बुरा लगे पर आपको यह बात स्वीकार करनी ही पड़ेगी कि आपकी भूमिका केवल एक नर्स की रही है। नर्स एक मरीज की जितनी भी सेवा कर ले, उसके कष्ट को कम करने के लिए जितना भी जतन कर ले, उसके सिरहाने बैठकर अपनी कितनी भी नींदें उड़ा ले, मोह बढ़ा ले पर अच्छा होने पर मरीज अपने घर ही लौटता है। यही दुनिया का दस्तूर है। इसे समझते हुए आगे बढ़ें तो जीना आसान हो जाएगा। जब भी इस प्रकार के रिश्ते होते हैं उसमें तभी तक तीसरे की जरूरत होती है जब तक उस रिश्ते में उसकी गुंजाइश होती है। जब किसी भी वजह से वह जरूरत दरकार नहीं होती है तो रिश्ता खुद ब खुद कमजोर पड़ता जाता है और एक दिन टूट जाता है।

प्रकाश जी, अव्वल तो आपको ऐसे रिश्ते में पड़ना नहीं चाहिए था। हर व्यक्ति को पहले अपने बारे में सोचना चाहिए। आप मैंटली और फिजीकली हेल्दी रहेंगे तो दूसरों की भी मदद कर सकते हैं। आपकी दोस्त ने अपने बारे में सोचा। खुद को संभालकर उसने अपने परिवार को बचाया। उसे गिल्ट इसलिए नहीं है क्योंकि एक तो वह यह सोचती है कि इस रिश्ते से आपको भी उतनी ही खुशी मिली, दूसरे ऐसे रिश्ते का यही अंजाम होना था यह कमोबेश आप भी मानकर ही चल रहे होंगे।

प्रकाश जी, जीने का सबसे अच्छा और आसान तरीका यह है कि आप अपने सभी कदम को हर हाल में न्यायसंगत ठहरा दें। अगर वह सबकुछ छोड़कर आपके पास आ जाती तो उनका तर्क होता, सच्चे प्यार के साथ कैसे बेवफाई करे और नहीं छोड़ा तो उसका तर्क है कि पहला फर्ज उसके पति की मान मर्यादा है।

इसी प्रकार आप भी सोचें कि यह एक नेक मदद थी और साथ ही आपको एक अनुभव का अवसर मिला। आगे किसी भी पेचीदा रिश्ते या कहें कि उलझे हुए रिलेशन में पड़ने के बजाय आप अपने लिए उचित रिश्ते की तलाश करेंगे। यकीनन यह एक्सपिरिएंस आपको अपने लाइफ-पार्टनर के साथ एक बेहतर हसबैंड के रूप में पेश आने ककाम आएगा।