लव-प्रपोजल की बात सोचते ही उनके दिल की धड़कन डूबने लगती थी। जिनके हाथ उनकी नब्ज ही पकड़ में नहीं आती, प्रेमिका क्या खाक उनके हाथ आने वाली थी। सो, शराफत छोड़ दी का ठुमका लगाते ही आपकी धड़कन एक चालू घड़ी की माफिक बराबर चलने लगेगी। आप अपने साहस का परचम लहराते हुए अपनी दोस्त के घर पहुँच जाएँगे। पेश है वहाँ का नजारा-आपकी दोस्त अपने पूरे परिवार वालों के बीच बैठी है। और आप सीधा वहाँ पहुँचकर रेड चुन्नी उसे उढ़ाते हुए बुलंद आवाज में पूछते हैं- क्या तुम मेरा अमर प्रेम स्वीकार करती हो?
आपके इस बुलंद बिहेवियर से आपी वो ऐसे भौंचक्का हो जाएँगी कि उनकी हिलने-डुलने और बोलने की शक्ति ही चली जाएगी। फिर आपकी दोस्त फौरन उठकर रेड चुन्नी यानी दुपट्टा हाथ में लहराकर गाने लगेगी-'ओढ़ ली चुनरिया तेरे नाम की... ।' वह गाते हुए आपका हाथ थामे घर से बाहर निकल जाएगी और पीछे-पीछे भागे आएँगे आपकी नई नवेली प्रेमिका के दो भाई। दोनों आपके चरणों में आ गिरेंगे। दो आवाज, पर एक स्वर में, एक प्रश्न आएगा मेमना कैसे बना शेर? हमें बता दो फॉर्मूला और ले जाओ मेरी यह बहन बतौर गुरु दक्षिणा।
इस लाल रंग के राज वाला फॉर्मूला आप उन्हें जरूर बता दें। फिर तो प्रेमियों की संख्या मल्टिप्लाई के हिसाब से बढ़ती जाएगी। आप दो, आपके उन दो के दो। इस बेदर्द व बेरहम दुनिया से निपटने के लिए ऐसी फौज की बड़ी आवश्यकता है। उन प्रेमिकाओं के लिए भी यहाँ एक फॉर्मूला बताया जा रहा है जिनके प्रेमी वर्षों से लाल रंग का गुलाब, लाल रंग की सैंडिल (अन्यथा न लें), लाल रंग की चुन्नर तो भेंट करते रहते हैं पर एक खास जगह, खास लाल रंग लगाने को राजी नहीं होते। विशेष स्थान यानी माथे के बीचोंबीच। उफ ! कितना समझाना पड़ता है। जी, मांग भरो सजना कार्यक्रम से मुँह छुपाने वाले प्रेमियों के लिए है यह नुस्खा।
तो वह क्या कहावत है, गुड़ खाओ और गुलगुला से परहेज। ऐसे आशिकों को गुलगुला खिलाने का सही दिन व मौका आ गया है। अब आप प्रेमिकाएँ नारी धर्म निभाने के लिए तैयार हो जाएँ। अरे, इसमें अचरज वाली कौन सी बात है। नारी का धर्म है टेस्टी यम्मी भोजन बनाना एवं परोसना। यह पढ़कर तमाम नारीवादी मुझे जितनी जोर की पिचकारियाँ मारना चाहें, मारें, पर आज भी कौन सा चलन बदल गया है जो मैं यह न बोलूँ। हाँ, तो धूर्त प्रेमियों की सताई हुई बेचारी प्रेमिकाएँ, सियाने प्रेमियों को वश में करने का सही मुहूर्त है रंगपंचमी।
अपनी नाजुक कलाई को थोड़ी सी तकलीफ दें और गुलगुले के घोल में अच्छी तरह भाँग मिलाएँ। खिलाने के बाद क्या होगा यह सोचकर शर्म से आपका रंग लाल नहीं हो रहा है तो कोई बात नहीं लाल रंग से भरी बाल्टी उँडेल लें। फिर एक हाथ में रखें गुलगुला और दूसरे हाथ में रखें वह विशेष लाल रंग। अब आप अपने प्रेमी को गुलगुला खिलाती हुई गाएँ, 'मोहे रंग दे... मोहे रंग दे... ।' यकीन मानिए तीसरी पंक्ति तक पहुँचते-पहुँचते ही, आपका बालम बीचोंबीच यानी मांग पर लाल रंग भर देगा।
यह मांग भरो कार्यक्रम होगा पूरे जमाने के सामने। इसे कहते हैं बिन बारात, बिन मंगनी, बिन ब्याह, मांग भरो फॉर्मूला । अरे बाबा, यह कोई गुलगुला घोटाला नहीं है। हाँ, बस एक सावधानी बरतें । अपने साजन को पकड़कर मोबाइल से एक वीडियो फिल्म बना लें। सजना साथ निभाना गीत गाते हुए फोटो उतार लें। क्यों? मेरी भोली, नादान प्रेमिकाएँ, रंग और नशा तो एक दिन उतर जाता है। तब कैसे याद आएगा उन्हें यह कार्यक्रम। फिर आप ये तस्वीरें अपने और उनके माता-पिता के पास भेज दें। इसके बाद होगी चट मंगनी, पट ब्याह।
जिन बेचारियों को घर की दहलीज के बाहर कदम रखने की अनुमति नहीं है और न ही उनके परवानों को आस-पास फड़फड़ाने की इजाजत है, उनके लिए भी है पेश है एक ऐसा फॉर्मूला जो सात दीवारें पार कर पिया का रंग उन तक पहुँचाएगा। जी हाँ, शोकिया ने बड़ा जोरदार मोबाइल पिचकारी बनाया है। हर साइज, हर रंग में, हर दुकान पर उपलब्ध है । जिनके संगम से जमाने वाले को बैर है, उनके लिए बस यह शोकिया का मोबाइल पिचकारी ही एक मात्र सहारा रह गया है । तो, फटाफट दोनों जाकर खरीद लाएँ मोबाइल पिचकारी। हाँ तो, अब प्रेमियों यह गाना,-'बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा...' गाते हुए काला बटन दबाएँ। यह बटन दबाते ही आपकी प्रेमिका सात परदे में भी क्यों न छुपी हो, उसकी मोबाइल पिचकारी उसे रंगों से सराबोर कर डालेगी।
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