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Sunday, December 11, 2011

जो मिल गया बस वही अपना है

हैलो दोस्तो! कई बार आप किसी के पास रहकर भी कितनी दूर होते हैं। और कई बार आप बहुत दूर रहकर भी बेहद करीब। दरअसल, यह नजदीकी व दूरी का सफर तय करता है आपका दिमाग। आपका दिमाग जिसे पसंद करता है, प्यार करता है और चाहता है, वह सात समंदर पार रहकर भी आपके मन में बसा रहता है। 

आपके दिल की हर धड़कन में उसके नाम की गूंज आती है और आपकी सांस में उसके वजूद की खुशबू। पर जो व्यक्ति आपके दिल-दिमाग पर हुकूमत नहीं करता, वह चाहे आपके जितना भी निकट क्यों न रहता हो, आपको वह कोसों दूर लगता होगा। कई प्रेमी जोड़े सालो-साल मिलने की आस में खुशी-खुशी अपनी जुदाई पलक झपकते काट लेते हैं और किसी को एक पल का साथ गुजारना भी वर्षों का वक्त बिताने जैसा लगता है। 

जब दो लोग एक-दूसरे की मजबूरी समझते हैं, साझा करते हैं तो उनमें तमाम कठिनाइयों से मुकाबला करने की अनोखी शक्ति आ जाती है और वही शक्ति हर परिस्थिति से जूझने का हौसला देती है। 

जिस रिश्ते में एक-दूसरे को खुशी देने की इच्छा होती है वहां दो घड़ी का साथ भी उन्हें महीनों की दूरी सहन करने की ऊर्जा से भर देता है पर जहां प्रेम की वास्तविक धारा न बहती हो वहां संग-संग रहकर भी कोई अनूठी ताकत नहीं मिलती है । ऐसे संग रहने वाले जोड़े तब ईर्ष्या से भर उठते हैं जब वे अलग रहने वाले प्रेमियों को खुशी-खुशी अपना-अपना जीवन बिताते देखते हैं । 

ऐसे ही हालात से दो-चार हो रहे हैं आसिफ (बदला हुआ नाम)। आसिफ, शबाना (बदला हुआ नाम) से प्यार करते थे पर दोनों के घरवाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं थे। शबाना अपने परिवार से रिश्ता तोड़कर भी अपना प्यार बचाना चाहती थी पर आसिफ के प्यार में उतनी ताकत नहीं थी। वह अपने परिवार के खिलाफ नहीं जाना चाहता था। 

उसने शबाना से माफी मांग ली और अपने मां-बाप की मर्जी की शादी कर ली। उधर शबाना ने अपने दुख से उबरने के लिए एक नौकरी शुरू कर दी जहां छह महीने के बाद उसे फिर से अन्य व्यक्ति से प्यार हो गया है। उसका प्रेमी दो वर्षों के लिए गल्फ देश गया है जहां से लौटने के बाद वे दोनों शादी करने वाले हैं । 

शबाना खुश है, मजे में अपनी नौकरी कर रही है। उसके चेहरे पर अपने महबूब के दूर रहने की शिकन भी नहीं दिखती। उस पर तुर्रा यह कि वह पहले से भी ज्यादा स्वस्थ, दिलकश व आत्मविश्वासी लगने लगी है। आसिफ को इस बात से जलन होती है।

उसे लगता है, मां-बाप की पसंद की दुल्हन में वह बात नहीं है जो उसकी दोस्त शबाना में थी। उसे उसकी तमाम अच्छी आदतें याद आती हैं और ये खयालात उसे चैन से जीने नहीं देते कि अब शबाना का प्यार किसी और के लिए है। 

Love Mantra
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आसिफ जी, आप अपनी पत्नी में यदि शबाना को खोजेंगे तो वह कभी आपको अच्छी नहीं लगेगी। हर मनुष्य अपने आपमें अनूठा व मुकम्मल है। उसे उसी के स्वरूप में कबूल करना चाहिए। शबाना को ठुकराने का फैसला भी आपका अपना ही है। 

आपको लगता है शबाना भाग्यशाली है इसलिए उसे सही साथी मिल गया जिसके साथ दूर रहकर भी वह इतनी प्रसन्न है। पर यह केवल खुशकिस्मती की बात नहीं है बल्कि शबाना खुद भी सच्ची, सही व दयालु है इसलिए उसे प्यार की सच्ची अनुभूति महसूस होती है जिसके कारण वह प्रसन्न व आनंदित है। आपकी सारी तकलीफ इस बात की है कि आपने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई। 

अब इन सारे बिंदुओं पर सोचने-विचारने का समय निकल गया है। अब जो साथ है उसकी परवाह कीजिए वरना ऐसा न हो कि वह भी मायूस होकर अपना ध्यान हटा ले। आपका रिश्ता नया है। यदि आप अपनी पत्नी की सुध लेना शुरू करेंगे तो हो सकता है, उसके वे गुण सामने आने लगें जिनकी आपको तलाश है। रही बात शबाना की तो इस रहस्य को जानकर भी आपको कौन सा सुकून मिल जाएगा कि आखिर वह अपने प्यार से दूर रहकर भी कैसे खुश है। 

शबाना ने तो आपकी फिक्र करने व कुढ़ने के बजाय अपनी नगरी फिर से आबाद कर ली क्योंकि वह आपके फैसले का आदर करना जानती है। वह हकीकत को सलाम करती है। पर आप आज भी अपने फैसले को गलत मानकर खुद को माफ नहीं कर रहे हैं। यह सोचकर खुद पर नाज करें कि आपने अपने मां-बाप का दिल रखा। 

उस समय जो ठीक व उचित लगा वह आपने किया, फिर मलाल कैसा। अब उनका इतना और सम्मान कर दें कि जो उनकी पसंद को आपने अपनाया है उसे भी उसका अधिकार दें। खुशियां आपके भी कदम चूमेंगी। यह सोचकर गमगीन न हों कि आपके भाग्य में दुख ही लिखा है। जब शबाना शादी करके वहां से चली जाएगी तो आपका अपनी गृहस्थी में रमना और भी आसान हो जाएगा।

शादी के बाद : प्यार में होती है खुशियां हजार




Love In Hindi
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वैवाहिक जीवन में बहुत सारी सामाजिकता और बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं। इसमें हर पल रस का सृजन करते रहना पड़ता है। यदि इस जीवन से रस विलुप्त हुआ तो जीवन बहुत कठिन होता चला जाएगा और जीवन के हर दौर में प्रेम ही रस का सृजन करता है तो जाहिर है वैवाहिक जीवन की कठिन सामाजिकता के निर्वहन में प्रेम ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा। 

यहां प्रेम एक ऐसे सेतु का कार्य करता है, जिसके कारण पति-पत्नी ताउम्र स्वेच्छा से एक-दूसरे का साथ निभाते ही हैं साथ ही कर्तव्यों का निर्वहन भी खुशी-खुशी तन्मयता से करते हैं। प्यार के बिना सुखी परिवार की कामना व्यर्थ है। 

दौलत चाहे कितनी कमा लें, किंतु दांपत्य जीवन में यदि प्यार का अभाव है तो खुशियों का कमल कभी खिल ही नहीं सकता है, क्योंकि दौलत से केवल सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, मगर सुख नहीं। वाह-वाही बटोरी जा सकती है पर खुशियां नहीं, जहां सुख का आधार संतोष है, वहीं खुशियों की आधारशिला प्रेम है। 
Love In Hindi
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प्रेम की महत्ता आज ही नहीं अतीत में भी अपने विभिन्न तथा विराट रूप में हमेशा विद्यमान रही है, स्वस्थ और सुखी परिवार की व्याख्या की जाए तो उसकी ढेरों शाखाओं में दांपत्य जीवन के प्यार का स्थान ही प्रथम होगा। 

यह सर्वमान्य सत्य है कि दांपत्य प्रेम सदा-सर्वदा से स्वयं के अतिरिक्त परिवार और समाज में स्वच्छ और तनावरहित वातावरण निर्मित कर उसे सुदृढ़ता प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है दांपत्य जीवन के प्यार में होती है खुशियां हजार। बस इन खुशियों के लिए करना पड़ेगा अपनी आदतों, व्यवहार और सोच में थोड़ा-सा बदलाव

जरूरत न हो फिर भी एक-दूसरे का काम यदि शेयर कर सकते हैं तो करें।

इस भावना को हमेशा जीवंत रखें कि खुशी हो या गम बराबर में हिस्सेदारी निभाएंगे हम।

ब्यूटी पार्लर से प्राप्त कृत्रिम सौंदर्य दांपत्य प्रेम के लिए आवश्यक है अथवा नहीं, यह व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है, लेकिन मितव्ययता प्रेम को प्रगाढ़ बनाने में हमेशा कारगर सिद्ध होती है। 

विश्वासघात का एक ओला काफी है प्रेम की लहलहाती फसल चौपट करने के लिए, विश्वासघात दांपत्य प्रेम का सबसे बड़ा शत्रु है, इससे बचें।

विचार अलग-अलग हो सकते हैं, इन्हें मतभेद की तरह लें, विवाद न बनने दें। 
प्यार में होती है खुशियां हजार
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एक-दूसरे की अहमियत स्वीकारने में कंजूसी न बरतें, इससे अहम कम होता है और प्यार का पौधा लहलहाता है। 

ऐसा कोई भी काम न करें, जिससे साथी की भावनाएं आहत हों।

पसंदीदा औऱ उपयोगी वस्तुएं तोहफे में दें, प्यार बढ़ेगा। 

अपनी जिद पर नियंत्रण रखें। इससे रिश्तों को तनाव से बचा पाएंगे। 

रंग-रूप को लेकर छींटाकशी न करें और न ही स्वयं से या किसी और से तुलना करें, न ही तानों की तलवार चलाएं।

जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारें। दिखावे और आडंबरों से दूर रहें। 

सुविधा और सामर्थ्य के अनुरूप ही वीकेंड पर घूमने जाने या संगी-साथियों से मिलने का प्लान बनाएं। 

भावनात्कम जुड़ाव जिंदगीभर दांपत्य प्रेम को जीवंत रखता है, अत: एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए कभी भी अशोभनीय प्रयोग या व्यवहार का प्रदर्शन न करें।