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यह जानकर आश्चर्य होता है कि भला यह कैसे संभव है कि बगैर किसी से मिले, उसे जाने-बूझे प्यार हो जाए! केवल इसलिए कि उस व्यक्ति ने तीर-तुक्के में आपको कोई संदेश भेज दिया हो। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि युवावस्था में किसी से जुड़ने और उसे अपने मन की बात कहने की इच्छा इतनी तीव्र होती है कि वह बहुत ही मामूली से परिचय को भी गहरी दोस्ती मान बैठता है। किसी को बिना देखे ही उसे अपना दिल दे बैठता है। किस्से-कहानियों में ऐसी बातें बेहद रूमानी लगती हैं पर वास्तविक जीवन में ऐसे अनुभव की कहीं कोई खुशगवार जगह नहीं बनती है। ऐसे परिचय दिल्लगी या दिलजोई के लिए तो ठीक हैं पर इसे आधार बनाकर किसी से इतनी मोहब्बत कर बैठना कि वह जीवन-मरण का प्रश्न बन जाए, सरासर मूर्खता है। और, ऐसी बेवकूफी जीवन को अभिशाप में बदल सकती है।
ऐसी ही नादानी से अपनी जिंदगी तबाह कर रहे हैं अतुल (बदला हुआ नाम)। अतुल प्रतियोगिता की परीक्षा के लिए तैयारियां कर रहे हैं। इसी बीच एक बार उनके फोन पर किसी लड़की का अपनापन भरा हाल-चाल पूछने वाला संदेश आया। अतुल ने भी उसका जवाब दे दिया। फिर संदेशों का सिलसिला चल पड़ा। अतुल संदेश के हर शब्द को अपने दिल व जान से लगा बैठे। उनकी बातचीत भी उस अनदेखी लड़की से होने लगी। उस लड़की के संदेश व फोन पर बातचीत अतुल की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए। यूं कहें कि उसके जीने का सहारा। लेकिन एक दिन अचानक उस लड़की ने संदेश भेजा कि वह यह सब बंद करना चाहती है। अब वह न संदेश भेजेगी और न फोन करेगी।
अतुल ने हजार मिन्नतें कीं पर वह नहीं पिघली। अब अतुल तिल-तिल कर मर रहा है। वह अपना ध्यान पढ़ाई पर बिल्कुल भी नहीं लगा पा रहा है। उसे लगता है अब जीवन बेकार है। न उसे खाने की सुध, न करियर की परवाह। वह उस अनदेखी लड़की को, जिसे वह अपनी प्रेमिका मानता है, कहां खोजे। वह फोन जो अब खामोश है, उसमें कैसे आवाज डाले। उसे लगता है अब उसका कोई भविष्य ही नहीं रहा इसलिए इस जीवन को समाप्त कर देना चाहिए। पहली नजर में कोई भी आपकी इस पूरी कहानी को जानकर हंस पड़ेगा पर इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आप वास्तव में अवसाद की स्थिति में लग रहे हैं।
कोई चाहे जितना भी इस पूरे प्रकरण पर हैरान हो पर यह भी उतना ही बड़ा सच है कि आप बेहद तकलीफ व पीड़ा में हैं। आपकी पूरी खुशी का दारोमदार एक अनदेखे मनुष्य के संवाद पर आकर टिक गया है। यदि आप इस बात को समझ लें कि ऐसा क्यों हुआ तो आप इस पीड़ा और भ्रमजाल से निकल जाएंगे। एक बात तो साफ है कि आप बेहद तनहा हैं, जब कोई बेइंतहा अकेला होता है तो तिनके का एक सहारा भी उसे पूरी नाव जान पड़ती है।
आप भी उस अनदेखे इंसान में अपने जीवन की साथी को न केवल तलाशने लगे बल्कि उसे अपना जीवनसाथी ही मान बैठे। केवल फोन पर बने संवाद से ही इतना बड़ा निर्णय कोई तभी ले सकता है जब उसमें वास्तव में आमने-सामने संवाद बनाने, अपनी बात रखने का आत्मविश्वास न हो। इसलिए आपको लगा कि बिना अप्रिय या असहज स्थिति में पड़े अपने आप ही आम पेड़ से टपक पड़ा है तो इसे ही लपक लो।
किसी का सामना करना, उससे संवाद बनाना, फिर उसके सामने प्रेम प्रस्ताव रखने की जहमत उठाने से बेहतर है इस अनदेखी लड़की के समक्ष ही बेखौफ, जांबाज प्रेमी बन जाओ। पर अतुल जी, जीवन में चाहे सेहत हो या करिअर, भावनात्मक सुकून, धन, उपलब्धि या फिर ग्लैमर और यश, इन्हें सचमुच पाने के लिए उसका सामना करना ही पड़ता है। उसके लिए जोखिम व कष्ट उठाना ही पड़ता है।
आपकी दोस्ती जैसी थी उसके सफल होने की संभावना मात्र एक प्रतिशत थी जबकि आप किसी से मिलकर दोस्ती करते और उसे आगे बढ़ाते तो वहां संभावना नब्बे प्रतिशत तक मुमकिन थी। यह सारा मातम छोड़कर अपने आपको बहुर्मुखी बनाएं। यानी थोड़ा खुलें और दोस्तों के बीच मेल-जोल बढ़ाएं। पुरुष दोस्तों के बीच भी संवाद बनाना, हंसी-मजाक करना आपके लिए फायदेमंद होगा। दोस्ती करने का गुर आप भी सीख जाएंगे तो महिला दोस्त भी आपको मिल जाएगी और शायद उन्हीं में प्रेमिका भी, पर एक खास दृष्टि से दोस्ती करना ठीक नहीं है। करिअर और सेहत पर ध्यान दें। सब अच्छा होगा।
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