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Wednesday, March 10, 2010

क्या सीख रहे हैं अपने काम से आप?

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जब आप बच्चे थे, तब आप बड़े होकर क्या बनना चाहते थे? हालाँकि बचपन में आप बहुत सारी चीजों से फेसिनेट होते हैं, बाद में आपका इंट्रेस्‍ट बदल भी जाता है, फिर भी कुछ ऐसा होता जरूर है, जिसे आप 'एक्चुली' करना चाहते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता आप उसे कोई भी नाम दे दें... चाहे तो रुचि भी कह सकते हैं।

लगभग यही बात आमिर ने अपनी फिल्म 'थ्री इडियट्स' में कही है। सबसे पहले तो यह तय करें कि आपको क्या करना बहुत अच्छा लगता है, फिर वह काम करते हुए आप पूरी तरह से ऑनेस्‍ट रहें, डूबकर काम करें... वैसे वो तो स्वतः ही होगा, क्योंकि वो आपकी रुचि का काम जो है। फिर उससे सीखा भी जा सकता है, लेकिन जब आप कोई काम अरुचि और दबाव में करेंगे तो फिर उसका न तो आनंद ले सकेंगे और न ही उससे कुछ सीख सकते हैं, सफलता पाना तो और भी मुश्किल का मैदान है।

तो कुल मिलाकर मामला वही है कि आप वह करो जिसे हकीकत में करना चाहते हो, बाकी चीजों के बारे में चिंता मत करो। वह आखिरकार स्थापित होगा ही। इस बात की भी चिंता मत करो कि आपको कितनी सफलता मिली है, चिंता इस बात की करो कि आपने जो किया या जो कर रहे हैं, उससे आपने सीखा क्या, याद क्या रखा...? पाया क्या... मटि‍रि‍यलि‍स्‍टि‍क पाना, एक्‍चुअल में पाना नहीं है...।

क्या आपने ऐसे लोगों को देखा है जिनके पास डिग्री कोई और होती है और वे जो काम कर रहे होते हैं, वह पूरी तरह से अलग होता है। आजकल ऐसा बहुत देखने में आ रहा है कि डिग्री कुछ और होती है, और काम कुछ और... जैसे गायक पलाश सेन और मॉडल अदिति गोवित्रीकर... मूलतः दोनों डॉक्टर हैं, लेकिन दोनों ही बिलकुल अलग दुनिया में काम कर रहे हैं... लेकिन मूल में एक ही बात है... खुशी... काम करने की खुशी...। आखिर वे ऐसा क्यों कर रहे होते हैं। सीधी-सी बात है वे उस काम को अपनी पूरी ऊर्जा, लगन, शिद्दत और रुचि से कर रहे होते हैं।

आजकल हत्यारी प्रतिस्पर्धा के दौर में किसी परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक पा लेना भी खुश होने के लिए नाकाफी है, क्योंकि यहाँ जोर सीखने पर नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धा में सभी को पछाड़कर आगे आने पर है। इस सबमें पसंद का पढ़ना या सीखना तो पता नहीं कहाँ चला जाता है।

जरा रुककर ये भी सोचें कि आपके जीवन का अल्टीमेट लक्ष्य क्या है...? खुशी... ना! तो खुशी पाने के लिए आप क्या कर रहे हैं? मशीन न बनें... वो करें जिससे आप कुछ सीख पाएँ... जिसमें आप डूब पाएँगे। तो जानें कि अपनी रुचि के किसी भी काम से आप कैसे कुछ सीख सकते हैं।

1.
पढ़ने को लेकर हमेशा भुक्कड़ रहो। यह आपके सोचने की लि‍मि‍ट में इजाफा करेगा।

2.
हार्ड वर्क करो। हार्ड वर्क से ज्यादा और कुछ भी कीमती अभी तक तो साबि‍त नहीं हुआ है।

3.
नया करने की कोशिश करो। ढर्रे पर चलना हमेशा आसान रहा है, मुश्किल काम करो और देखो कि कैसे खुशी आपके दरवाजे आ धमकती है। दृढ़ होना और रूढ़ होना दो अलग-अलग बातें हैं।

4.
क्रि‍एटि‍व बने रहो। बच्चे नेचरली क्रि‍एटि‍व होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमारी क्रि‍एटि‍वि‍टी खो जाती है।

5.
ईमानदारी और खरेपन का ध्यान रखो।

6.
हमेशा कंसि‍स्‍टेंट, लॉजि‍कल और प्रेक्‍टि‍कल वि‍जन रखो।

हम सारे हरदम क्या होना चाहते हैं? खुश होना ही ना! बस...। तो उस काम को ढूँढो जो आपको खुश करे, नहीं तो आप खत्म हो जाओगे। लेकिन उसे पूरी गरिमा और सच्चाई से करो अन्यथा आप जीवन को खो दोगे।

Rajan Shrivastava
Lucknow (Uttar Pradesh)
rajan_29oct@yahoo.com

Monday, March 8, 2010

प्यार का दर्द : मीठा-मीठा, प्यारा-प्यारा

दोस्तो! प्यार करने वालों को प्यार का बहाना चाहिए। प्यार पाने और जताने का मौका व माहौल हो तो दो दीवाने कब पीछे रह सकते हैं। सच, प्यार से कभी किसी का जी नहीं भरता है। ज्ञान की तरह ही यह एक ऐसा खजाना है जिसे जितना भी लुटाया जाए, कम नहीं होता। तो दोस्तो, किसी भी प्रिय को दें प्यार का पैगाम।

एक ऐसा पैगाम जो किसी के जीवन के खालीपन को भर दे। किसी के मायूस चेहरे पर उम्मीद की खुशी ला दे। वर्षों से जिस शब्द को सुनने का इंतजार था वह इंतजार की घड़ी खत्म हो जाए। आज जिस प्रकार सूरज की रोशनी ने कोने-कोने में छुपे अँधेरे को उजाले में बदल दिया है उसी प्रकार आप भी अपने साथी के दिल से दुख, नफरत, गिले-शिकवे को हमेशा के लिए खत्म कर दें। प्यार में वह गर्मी है जो दिल में जमी गलतफहमी और अविश्वास की बर्फ पिघला सकती है। तो आज छलकाएँ प्यार का जाम और खाली न होने दें प्यार का पैमाना।

कहते हैं, प्यार में जो नशा है वह किसी शराब में नहीं। प्यार के नशे में गोते लगाएँ और जीवन की तमाम कड़वाहट को भूल जाएँ। बहुत सारे प्यार करने वाले सालों से इसी संकोच में बैठे हैं कि यदि उन्होंने अपनी भावना का इजहार अपनी या अपने दोस्त के सामने किया तो वह नाराज न हो जाए। इस चक्कर में दोस्ती भी हाथ से न चली जाए पर जब आज दिल कह रहा है तो करें प्यार का इजहार। अगर जवाब नहीं में आए तो भी उसे सँभाल लें।

आजकल तो इजहार-ए-इश्क बहुत ही उदारता के साथ लिया जाने लगा है। आप कह सकते हैं कि मेरी दोस्ती में प्यार जैसी भावना की गहराई है। आज प्यार शब्द का इस्तेमाल करके हमने अपनी दोस्ती पर पक्की मुहर लगा दी है। पर अपने दिल की बात को लंबे समय तक दबाए रखना अक्लमंदी नहीं है। कुछ लोग अपने जीवन में प्यार बाँटते चलो के सिद्धांत पर चलते हैं और उन्हें उसी में खुशी भी मिलती है। यदि हम भी इसी सिद्धांत को जीवन में लागू करके चलें तो हमारे लिए भी खुशियों का अंबार राहों में पड़ा मिले।

अपनी कोई भी कमी, मुश्किल और तमन्ना बेझिझक सहजता से कह डालें। दिल हलका हो जाएगा और मन का गुबार धुल जाएगा। जैसे, होली, दिवाली और ईद पर हम ऐसे मूड में होते हैं कि हम हर मुस्कराते चेहरे और आगे बढ़े हुए हाथ का स्वागत करते हैं। उसी प्रकार हम प्यार में दिल की तमाम रंजिशों को भुलाकर एक नई शुरुआत करें।

प्यार के कैनवास को बड़ा करें ताकि उसमें तमाम तरह के रंगों और उसके शेड से जीवन की बहुआयामी तस्वीर बनाई जा सके। एक ऐसी तस्वीर जिसमें दोनों के विकसित होने का अवसर हो। जिसमें दोनों के सपनों के लिए पर्याप्त जगह हो। त्याग व कोमलता के रंग दोनों पर समान रूप से बिखरे हों। जहाँ लाल रंग से तकलीफ का अहसास नहीं बल्कि आशा की लालिमा का संदेश मिले। ऐसी तस्वीर जिसकी आँखों में जमाने के दर्द पर किसी के साथ होने की खुशी का रंग चढ़ा हो। मंजिल चाहे जितनी भी दूर हो उसे पाने का हौसला दोनों की आँखों में साफ नजर आए। प्यार के रिश्ते की तस्वीर इतनी विशाल हो कि उसमें दोनों की कमजोरियों को भी गुजारे के लिए उचित स्थान मिल जाए।

खुशियों के नए-नए बहाने ढूँढ़ना ही अच्छे प्रेमियों की निशानी होती है। अपने अंदर एक संकल्प करें कि अपने साथी को खुश रखने के तमाम रास्ते आप खोज लेंगे। किस बात से और क्या करने से उसके मूड में खुशियों का प्रवेश होता है, इसका पता लगाने की जिम्मेदारी हर प्यार करने वालों की होनी चाहिए। आज के दिन एक बात गाँठ बाँध लें कि अपने प्यार के प्रति हमेशा आदर की भावना रखें। किसी बात पर असहमति होने पर भी कोशिश करें कि मन शांत हो जाए तब ही उस विषय को छेड़ें।

शब्दों का प्रभाव हमारे रिश्ते पर बहुत पड़ता है। उत्तेजना में कई बार दुर्भावना नहीं होने पर भी हम मन को आहत करने वाले शब्द बोल देते हैं। ऐसे शब्द महीनों के खूबसूरत बिताए पलों को झटके में धो डालते हैं और वहाँ चोट के निशान छोड़ जाते हैं। प्यार भरे शब्द और सच्ची भावना प्यार को बहुत ही ठोस आधार देते हैं। आप यह वायदा लें कि प्यारे शब्द, प्यारी सोच और सच्चे भरोसे का दामन आप कभी नहीं छोड़ेंगे। आपकी यह कोशिश साल के 365 दिन सच्चे प्यार का ही अहसास कराएगी।

काश मै उससे बात कर पाता....

मै एक लड़की से बहुत प्यार करता हु ..! वो मेरी जिन्दगी है शायद मै उसके बिना जी ना सकू पर मै क्या करता मने एक एसमेस किया और उसके भाई ने वो एसमेस पढ़ लिया उसके बाद उसने मुझे फ़ोन करके कहा की तू आज के बाद यहाँ फ़ोन भी मत कर देना उसके बाद भी मेरी जान ने मुझसे बात करने की बहुत कोशिश किया पर मैंने उसके फ़ोन का कोई जवाब नहीं दिया... अब मै सोच रहा हु की अगर वो कभी भी फ़ोन करेगी तो मै उसका जवाब जरुर दूंगा...मुझे माफ कर दो मेरी सुमन जान.......please please जान

मुझे किसी से बहुत प्यार है

में किसी को बहुत चाहता हूँ,वोह भी मुझे बहुत चाह्ती है,में उसके साथ बहुत खुश हूँ और मुझे पूरा विश्वास है की हम दोनो अपने प्यार के बल पर अपने माता-पिता का दिल जीत लेंगे,दरअसल हम दोनो के धर्म अलग हैं,पर में मानती हूँ की जब हम किसी को चाहते हैं,हम उसे एक अचछे व्यक्ति की तरह पसंद करते हैं,ना की वो किस धर्म को मानता हो,मेरा कहना है,भगवान सब के लिए एक हैं, फर्क सिर्फ़ इतना है कि लोग भगवान को अलग अलग नजरिये से देखते हैं, और तो कुछ अंतर नही ना?..आपको क्या लगता है?

आजमाइए बिंदास लव-रंग

लो दोस्तों ! यदि आप पूरे साल शराफत की सफेद चादर ओढ़ते-ओढ़ते बोर हो चुके हैं तो शरारत के लाल रंग में डूबोकर उसे ओढ़ लें । इसका असर यूँ होगा कि आप पलक झपकते ही बिंदास अंदाज में गाने लगेंगे, 'शराफत छोड़ दी मैंने...।' ऐसा करते ही आप में एक चमत्कारी शक्ति जाग जाएगी और आप बेहद बोल्ड और बिंदास बन जाएँगे। यह हिम्मत उन लोगों के लिए संजीवनी का काम करेगी जो पूरे वर्ष मेमने की तरह मेमयाते तो रहे पर प्यार के इजहार के तोतले शब्द भी उनकी जुबान से नहीं निकल पाए।

लव-प्रपोजल की बात सोचते ही उनके दिल की धड़कन डूबने लगती थी। जिनके हाथ उनकी नब्ज ही पकड़ में नहीं आती, प्रेमिका क्या खाक उनके हाथ आने वाली थी। सो, शराफत छोड़ दी का ठुमका लगाते ही आपकी धड़कन एक चालू घड़ी की माफिक बराबर चलने लगेगी। आप अपने साहस का परचम लहराते हुए अपनी दोस्त के घर पहुँच जाएँगे। पेश है वहाँ का नजारा-आपकी दोस्त अपने पूरे परिवार वालों के बीच बैठी है। और आप सीधा वहाँ पहुँचकर रेड चुन्नी उसे उढ़ाते हुए बुलंद आवाज में पूछते हैं- क्या तुम मेरा अमर प्रेम स्वीकार करती हो?

आपके इस बुलंद बिहेवियर से आपी वो ऐसे भौंचक्का हो जाएँगी कि उनकी हिलने-डुलने और बोलने की शक्ति ही चली जाएगी। फिर आपकी दोस्त फौरन उठकर रेड चुन्नी यानी दुपट्टा हाथ में लहराकर गाने लगेगी-'ओढ़ ली चुनरिया तेरे नाम की... ।' वह गाते हुए आपका हाथ थामे घर से बाहर निकल जाएगी और पीछे-पीछे भागे आएँगे आपकी नई नवेली प्रेमिका के दो भाई। दोनों आपके चरणों में आ गिरेंगे। दो आवाज, पर एक स्वर में, एक प्रश्न आएगा मेमना कैसे बना शेर? हमें बता दो फॉर्मूला और ले जाओ मेरी यह बहन बतौर गुरु दक्षिणा।

इस लाल रंग के राज वाला फॉर्मूला आप उन्हें जरूर बता दें। फिर तो प्रेमियों की संख्या मल्टिप्लाई के हिसाब से बढ़ती जाएगी। आप दो, आपके उन दो के दो। इस बेदर्द व बेरहम दुनिया से निपटने के लिए ऐसी फौज की बड़ी आवश्यकता है। उन प्रेमिकाओं के लिए भी यहाँ एक फॉर्मूला बताया जा रहा है जिनके प्रेमी वर्षों से लाल रंग का गुलाब, लाल रंग की सैंडिल (अन्यथा न लें), लाल रंग की चुन्नर तो भेंट करते रहते हैं पर एक खास जगह, खास लाल रंग लगाने को राजी नहीं होते। विशेष स्थान यानी माथे के बीचोंबीच। उफ ! कितना समझाना पड़ता है। जी, मांग भरो सजना कार्यक्रम से मुँह छुपाने वाले प्रेमियों के लिए है यह नुस्खा।

तो वह क्या कहावत है, गुड़ खाओ और गुलगुला से परहेज। ऐसे आशिकों को गुलगुला खिलाने का सही दिन व मौका आ गया है। अब आप प्रेमिकाएँ नारी धर्म निभाने के लिए तैयार हो जाएँ। अरे, इसमें अचरज वाली कौन सी बात है। नारी का धर्म है टेस्टी यम्मी भोजन बनाना एवं परोसना। यह पढ़कर तमाम नारीवादी मुझे जितनी जोर की पिचकारियाँ मारना चाहें, मारें, पर आज भी कौन सा चलन बदल गया है जो मैं यह न बोलूँ। हाँ, तो धूर्त प्रेमियों की सताई हुई बेचारी प्रेमिकाएँ, सियाने प्रेमियों को वश में करने का सही मुहूर्त है रंगपंचमी।

अपनी नाजुक कलाई को थोड़ी सी तकलीफ दें और गुलगुले के घोल में अच्छी तरह भाँग मिलाएँ। खिलाने के बाद क्या होगा यह सोचकर शर्म से आपका रंग लाल नहीं हो रहा है तो कोई बात नहीं लाल रंग से भरी बाल्टी उँडेल लें। फिर एक हाथ में रखें गुलगुला और दूसरे हाथ में रखें वह विशेष लाल रंग। अब आप अपने प्रेमी को गुलगुला खिलाती हुई गाएँ, 'मोहे रंग दे... मोहे रंग दे... ।' यकीन मानिए तीसरी पंक्ति तक पहुँचते-पहुँचते ही, आपका बालम बीचोंबीच यानी मांग पर लाल रंग भर देगा।

यह मांग भरो कार्यक्रम होगा पूरे जमाने के सामने। इसे कहते हैं बिन बारात, बिन मंगनी, बिन ब्याह, मांग भरो फॉर्मूला । अरे बाबा, यह कोई गुलगुला घोटाला नहीं है। हाँ, बस एक सावधानी बरतें । अपने साजन को पकड़कर मोबाइल से एक वीडियो फिल्म बना लें। सजना साथ निभाना गीत गाते हुए फोटो उतार लें। क्यों? मेरी भोली, नादान प्रेमिकाएँ, रंग और नशा तो एक दिन उतर जाता है। तब कैसे याद आएगा उन्हें यह कार्यक्रम। फिर आप ये तस्वीरें अपने और उनके माता-पिता के पास भेज दें। इसके बाद होगी चट मंगनी, पट ब्याह।

जिन बेचारियों को घर की दहलीज के बाहर कदम रखने की अनुमति नहीं है और न ही उनके परवानों को आस-पास फड़फड़ाने की इजाजत है, उनके लिए भी है पेश है एक ऐसा फॉर्मूला जो सात दीवारें पार कर पिया का रंग उन तक पहुँचाएगा। जी हाँ, शोकिया ने बड़ा जोरदार मोबाइल पिचकारी बनाया है। हर साइज, हर रंग में, हर दुकान पर उपलब्ध है । जिनके संगम से जमाने वाले को बैर है, उनके लिए बस यह शोकिया का मोबाइल पिचकारी ही एक मात्र सहारा रह गया है । तो, फटाफट दोनों जाकर खरीद लाएँ मोबाइल पिचकारी। हाँ तो, अब प्रेमियों यह गाना,-'बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा...' गाते हुए काला बटन दबाएँ। यह बटन दबाते ही आपकी प्रेमिका सात परदे में भी क्यों न छुपी हो, उसकी मोबाइल पिचकारी उसे रंगों से सराबोर कर डालेगी।

इस प्रकार पिया के रंग से महरूम रखने की घर वालों की चाल पूरी तरह नाकाम हो जाएगी। यह करिश्माई पिचकारी घूम-घूम कर प्रेमिकाओं पर रंग फेंकेगी और आप नाचते हुए अनार कली की तरह गाने लगेंगी-'परदा नहीं जब कोई खुदा से बंदों से परदा करना क्या ?' यह सुनते हुए घर वालों की नजरें और सिर दोनों झुक जाएँगे और आप पिया मिलन को बेरोक-टोक निकल जाएँगी। ये फॉर्मूले केवल होली-रंगमंचमी के दिन ही काम करते हैं।

चलो, अब मान भी जाओ

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जब आपका बॉयफ्रेंड आपसे किसी छोटी-सी बात पर गुस्सा हो जाए और लाख मनाने पर भी न माने तो आपको क्या करना चाहिए। यदि बात हाथ से निकल गई हो तो यह समझने में ही भलाई है कि अच्छा हुआ जो ऐसे व्यक्ति से पीछा छूट गया और यदि नहीं तो फिर कुछ ऐसे तरीके अपनाएँ होंगे जिससे वह जल्द से जल्द आपके पास आ जाए।

1. पूरी तरह से उससे दूर रहने का प्रयास करें। कुछ भी बात न करें। कोई सॉरी नहीं, कोई गुडबाई नहीं तथा कोई सफाई नहीं। फोन आए तो अपना फोन स्विच ऑफ कर दें। कुछ नए मित्रों के साथ अपने आपको व्यस्त रखने का प्रयास करें।

2. यदि आपके पास उसका ईमेल आता है तो उसे बिना कुछ लिखे ही सेंड कर दें। यदि वॉइस मेल पर कुछ मैसेज आए तो उसे बिना सुने ही डिलीट कर दें।

3. उस तक किसी भी तरह यह खबर पहुँचाएँ कि उसका पक्का दोस्त आपसे दोस्ती करने के लिए तैयार है और आपको भी वह अच्छा लगता है। कभी उसके सामने ही उसके दोस्त के साथ होटल में जाएँ और बहुत अच्छी तरह से अभिनय करें।

4. सिम्पलिसिटी को अपनाएँ। बिलकुल सादगी से रहना शुरू कर दें। मानो आजकल के वर्तमान फैशन से आपका कोई वास्ता ही नहीं है। या पहले से सादगी पसंद हैं तो अब मॉडर्न हो जाएँ।

उपरोक्त टिप्स आपने अपनाने शुरू कर दिए हैं जब कोई न कोई उनका ही दोस्त यह खबर उस तक पहुँचाएगा ही। आप तो बस इंतजार कीजिए अपने मिशन की सफलता के जश्न मनाने का।

दिल अपना और प्रीत पराई प्यार के नाम पर डिपेंडेंसी ठीक नहीं

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हाय फ्रैंड्स ! रोमांस करने वाले बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पहले दिन से अंतिम दिन तक खुशी के झूले पर सवार हों और उन्हें कोई कष्ट नहीं हुआ हो। ज्यादातर लोग तो इसकी पीड़ा से ही कराहते रहते हैं। फिर भी यदि आप यह पैगाम दें कि कोई प्यार न करे, दुनियादारी के हिसाब से चले तो प्यार करने वाले शायद ही इस बात को मानें

प्यार करने वालों की सबसे विचित्र बात यह लगती है कि वे कई बार ऐसे रिश्ते में पड़ जाते हैं जो समाज के सांचे में किसी तरह से फिट नहीं बैठते उसके बावजूद उनकी उम्मीद यही होती है कि अन्य सोशल रिलेशनशिप की तरह ही उनका यह रिलेशन भी स्वीकार हो जाए, परमानेंट हो जाए। सोसाइटी द्वारा अस्वीकार किए जाने की बात तो छोड़ें, कई बार वे खुद ऐसे रिश्ते से कब मुकर जाएँगे खुद उन्हें मालूम नहीं होता पर जब एक दिन ऐसा हो जाता है तो वे इस कदर आसमान-जमीन एक करने लगते हैं मानों उन्हें इसका रत्ती भर भी अनुमान या आभास नहीं था ।

ऐसे ही एक अनएक्सपेक्टेड अलगाव से विचलित हो गए हैं, प्रकाश। पहले तो वह एक शादीशुदा महिला से प्रेम कर बैठे और फिर जब उस महिला को प्रकाश के प्यार के अति गंभीर रूप का अहसास हुआ तो वह डर कर पीछे हट गई। उसने इस रिश्ते से तौबा कर लिया लेकिन प्रकाश हैं कि उन्हें भूल नहीं पा रहे हैं।

दिन-रात उससे मिलने के लिए बेकरार रहते हैं। उनकी मानसिक व शारीरिक सेहत खराब हो रही है। सबसे मिलना-जुलना छोड़ उन्होंने तनहाई को ही अपना साथी बना लिया है। प्रकाश जी, आपकी फ्रैंड न तो अपने हसबैंड से अलग रह रही थीं और न ही उनका डिवोर्स का इरादा था फिर आपने कैसे सोच लिया कि वह आपके साथ रहने लगेंगी या मिलती रहेंगी । उनका अपने हसबैंड के साथ मनमुटाव हो गया था, वह जीवन में उदास और अकेली हो गई थीं, उन्हें एक हमदर्द दोस्त की जरूरत थी जिससे कि वह अपनी उदासीनता और नीरसता तोड़ सकें।

आपमें उन्हें वह दोस्त नजर आया। देखते-देखते वह इतने करीब आ गई कि आप दोनों में कोई भेद नहीं रह गया। इसलिए अब आपको उनकी जुदाई सही नहीं जा रही है । आप इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि वह आपको छोड़ सकती हैं पर हकीकत यही है कि वह आपको कभी नहीं मिलेंगी । आपको इस बात का भी कष्ट है कि आपकी भावना के साथ खेला गया। आपका इस्तेमाल किया गया और जब वह संभल गई और अपने पति के साथ ताल-मेल बैठा लिया तो आपको दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया।

आप जितना जी चाहें उसे या खुद को कोस लें पर अब इस रिश्ते में कुछ नहीं हो सकता है। दरअसल, आप अकेले थे और आपको उसका साथ मिला तो आप उसकी तुलना में अधिक भावुकता से जुड़ते गए। यूँ तो उसे भी एक समय आपकी बहुत ज्यादा जरूरत थी पर इसलिए नहीं कि वह अपना घर-बार तोड़कर या छोड़कर आपके पास आना चाहती बल्कि इसलिए कि वह अपना घर बचाना चाहती थी। वह चाहती थी कि वह खुश रहे ताकि वह अपने पति की छोटी-मोटी अप्रिय बातों को नजरअंदाज कर उसे खुश रख सके। दोस्ती की ताकत से उसकी सहनशक्ति बढ़ जाए।

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हर समय कुढ़ने-घुटने के बजाय वह खुशी-खुशी अपने पति का खयाल रख सके। यदि गहराई से देखा जाए तो वह खुद से ज्यादा अपने शादी के रिश्ते की परवाह करती रही। उसने तमाम प्रकार का निजीपन बाँटने के बाद भी कभी आपके साथ जीवन बिताने का कोई वायदा नहीं किया। इसके बावजूद आप उसे स्वार्थी समझ रहे हैं।

प्रकाश जी, आपको चाहे जितना भी बुरा लगे पर आपको यह बात स्वीकार करनी ही पड़ेगी कि आपकी भूमिका केवल एक नर्स की रही है। नर्स एक मरीज की जितनी भी सेवा कर ले, उसके कष्ट को कम करने के लिए जितना भी जतन कर ले, उसके सिरहाने बैठकर अपनी कितनी भी नींदें उड़ा ले, मोह बढ़ा ले पर अच्छा होने पर मरीज अपने घर ही लौटता है। यही दुनिया का दस्तूर है। इसे समझते हुए आगे बढ़ें तो जीना आसान हो जाएगा। जब भी इस प्रकार के रिश्ते होते हैं उसमें तभी तक तीसरे की जरूरत होती है जब तक उस रिश्ते में उसकी गुंजाइश होती है। जब किसी भी वजह से वह जरूरत दरकार नहीं होती है तो रिश्ता खुद ब खुद कमजोर पड़ता जाता है और एक दिन टूट जाता है।

प्रकाश जी, अव्वल तो आपको ऐसे रिश्ते में पड़ना नहीं चाहिए था। हर व्यक्ति को पहले अपने बारे में सोचना चाहिए। आप मैंटली और फिजीकली हेल्दी रहेंगे तो दूसरों की भी मदद कर सकते हैं। आपकी दोस्त ने अपने बारे में सोचा। खुद को संभालकर उसने अपने परिवार को बचाया। उसे गिल्ट इसलिए नहीं है क्योंकि एक तो वह यह सोचती है कि इस रिश्ते से आपको भी उतनी ही खुशी मिली, दूसरे ऐसे रिश्ते का यही अंजाम होना था यह कमोबेश आप भी मानकर ही चल रहे होंगे।

प्रकाश जी, जीने का सबसे अच्छा और आसान तरीका यह है कि आप अपने सभी कदम को हर हाल में न्यायसंगत ठहरा दें। अगर वह सबकुछ छोड़कर आपके पास आ जाती तो उनका तर्क होता, सच्चे प्यार के साथ कैसे बेवफाई करे और नहीं छोड़ा तो उसका तर्क है कि पहला फर्ज उसके पति की मान मर्यादा है।

इसी प्रकार आप भी सोचें कि यह एक नेक मदद थी और साथ ही आपको एक अनुभव का अवसर मिला। आगे किसी भी पेचीदा रिश्ते या कहें कि उलझे हुए रिलेशन में पड़ने के बजाय आप अपने लिए उचित रिश्ते की तलाश करेंगे। यकीनन यह एक्सपिरिएंस आपको अपने लाइफ-पार्टनर के साथ एक बेहतर हसबैंड के रूप में पेश आने ककाम आएगा।