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FILE* ज्यादा बढ़-चढ़कर बातें न करें। ऐसे कमिटमेंट जिन्हें पूरा करना आपके बस में न हो। फिल्मी डायलॉगबाजी को तो दिल से बिल्कुल ही निकाल दें। क्योंकि रील लाइफ और आपकी रीयल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर होता है।
* यदि लड़की मना कर भी दे तो इसे विशेष असफलता के रूप में न लें। आप उसके लिए उपयुक्त नहीं हों या वह लड़की प्यार-मोहब्बत जैसी चीजों को ज्यादा तरजीह न दे ऐसा भी हो सकता है। हाँ आपको संगी-साथियों में हास्यास्पद न बनाए, इतना निवेदन उससे अवश्य कर सकते हैं।
* आगे भी उसके प्रति किसी भी प्रकार का नकारात्मक दृष्टिकोण न रखें। 'सब कुछ संभव है' को मानकर हो सकता है आज नहीं तो कल 'हसीना मान जाएगी'। इसकी शिक्षा आप जरूर हिन्दी फिल्मों से ले सकते हैं।
* दोस्तों को भी संबंधित लड़की का उपहास उड़ाने की छूट किसी भी कीमत पर न दें। इससे अच्छा इंप्रेशन नहीं पड़ेगा। दोस्तों के चयन में आपकी विशेष सावधानी यहाँ जरूर काम आएगी।
* हर कदम वास्तविकता को ध्यान में रखकर उठाएँ। जैसे आपका अपने पैरों पर खड़े होना आदि। शादी के वक्त या बाद तक की पारिवारिक स्थिति पर गौर करते चलें। कभी न कभी इस हकीकत से आपको रूबरू होना ही पड़ेगा।
* आपके संबंध सफल जीवन की नींव है जिससे कम से कम दो परिवार सीधे-सीधे प्रभावित होते हैं।
* आपके आसपास घर-परिवार में ऐसे मामलों से प्रेरणा लें। घनिष्ठता होने पर प्रयोजन बताते हुए उनसे मागदर्शन लेने में संकोच न करें। क्योंकि उनके अनुभवों के आधार पर वे आपको बेहतर गाइड कर सकते हैं। विशेष रूप से अंतरजातीय मामलों में चुनौतियाँ बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में प्रभाव आपके बच्चों तक की शादी पर पड़ने की संभावना रहती है। बच्चों के माँ-बाप की जाति अलग-अलग होना जरूर कुछ सवाल खड़े कर सकता है।
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