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Wednesday, October 26, 2011

टूटे दिल का जुड़ना आसान नहीं...


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हेलो दोस्तो! जब एक मनुष्य वयस्क होता है उसे हर मुकाम पर किसी न किसी रूप में एक प्रकार की क्रूरता का सामना करना पड़ता है। चाहे वह क्रूरता प्रत्यक्ष हो या फिर अप्रत्यक्ष। यूं तो बचपन में भी आप इस अहसास से दो-चार होते हैं पर तब मां-बाप का विशुद्ध प्यार और सुरक्षा की ढाल के कारण उसे आप दिल से ज्यादा नहीं लगाते हैं। लेकिन ज्यूं-ज्यूं आपकी दुनिया व्यापक होती जाती है वैसे-वैसे ही समाज के अनेक बेरहम अहसास का अनुभव भी बढ़ता जाता है।

हर पल एक प्रकार का समझौता या फिर दुख को अनदेखा करने की व्यावहारिकता अपनाकर भी आप थक जाते हैं। तब आपका दिल एक ऐसा ठिकाना ढूंढ़ना चाहता है जहां कोईक्रूरता न हो। जहां आपके लिए बस मासूमियत से भरी ठंडी छांव हो और उस छांव में आपको ऐसा सुकून मिले जिसमें कभी कोई खलल न डाले। आंखें मूंदकर आप अपने उस देवता पर विश्वास करें जिसने इस बेरहम दुनिया में आपको यकीन व भरोसे का पाठ पढ़ाया हो।

आप भरोसे के उस सबक को याद करके निश्चिंत होकर उसे इस दुनिया से अलग मान लेते हैं। आपको लगता है, यह संसार चाहे जितना भी धोखेबाज, अनैतिक, चालबाज, जालिम क्यों न हो गया हो पर अब भी यहां कोई एक है जो जीने का मकसद बन सकता है। ऐसा कोई है जो जिंदगी, समाज और दुनिया के प्रति आस्था जगाता है। 

जिंदगी के हजार गम और जुल्म को भुलाने का वह असली मसीहा है। एक ऐसा शख्स जो जीवन के अनेक थपेड़ों से उभरे जख्मों पर अपने विश्वास के फाहे से मरहम लगाता है। ऐसे मनुष्य को अपने जीवन में पाकर आप संसार व समाज की तमाम कू्ररता भूल जाते हैं। उसके बाद कोई आपके जीवन में चाहे जितनी भी कू्ररता की पटकथा लिखे उस व्यक्ति को याद करते ही एक निर्मल धारा उस पटकथा को मिटा डालती है। आपके जीवन से दुख की लिखावट को ऐसे वह धो डालती है जैसे वहां जख्मों का कोई निशान ही न हो। 

इतनी आस्था, इतना विश्वास, इतने भरोसे के बाद एक दिन आपका सामना उस शैतान या हैवान से होता है जिसे आपने फरिश्ता समझा था तो आपकी क्या हालत होगी इसका अनुमान लगाना उतना आसान नहीं होगा। आपके दिल पर क्या गुजरेगी शायद इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होगा। बिखरी हुई मासूम व नाजुक भावना को कभी भी समेट पाना संभव हो पाएगा या नहीं, यह कहना कठिन होगा। ऐसे ही एक भयावह अनुभव से गुजर रही हैं साधना (बदला हुआ नाम)। 

साधना पवन (बदला हुआ नाम) से पूरे एक वर्ष से प्रेम कर रही थीं। वह पवन पर बहुत ही गंभीरता से भरोसा करती थी। अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या उससे बांटती थी और वह उसका ऐसा दोस्त था जो उसका सबसे बड़ा राजदार था। वह अपनी इस दोस्ती व प्यार को बहुत गहराई से महसूस करके इसे परिपक्व करना चाहती थी। इस प्यार व दोस्ती से वह शारीरिक संबंध को दूर ही रखना चाहती थी। और, जाहिर तौर पर उसका दोस्त पवन भी उसकी समझ और बातों से सहमत था पर एक दिन पवन ने उसके साथ ऐसी हैवानियत दिखाई जिसका उसे सपने में भी गुमां नहीं था। 

अपने विश्वास का मजाक उड़ाने वाले अपने प्रेमी की अब वह कभी शक्ल भी नहीं देखना चाहती है। उसे उस व्यक्ति के नाम से भी नफरत हो चुकी है। उधर पवन साधना से शादी करना चाहता है और इनकार की हालत में जान देने को उतारू है। साधना को लगता है, मरने की धमकी देना उसके साथ एक और ज्यादती है। वह क्या करे?

साधना जी, आपको लगता है जिस शख्स ने आपके लिए रत्ती भर इंसानियत नहीं दिखाई उस इनसान को आप कैसे बर्दाश्त कर पाएंगी। आप एकदम ठीक सोचती हैं। इस वक्त आपके मन में अपने दोस्त के लिए कोई भी कोमल अहसास टटोल कर ढूंढ़ निकालना संभव नहीं है। और, उस अहसास के बिना तो उस व्यक्ति का कोई स्थान आपके जीवन में हो भी नहीं सकता है। इस पूरी घटना को किसी अन्य दृष्टिकोण से विश्लेषण करना भी आपके साथ अन्याय करना है। 

इस वक्त तो इस पूरी घटना का एक ही नजरिया हो सकता है जो आपका है, क्योंकि दिल आपका टूटा है। समय बीतने देना चाहिए। फिर ठंडे दिल से किसी निर्णय पर पहुंचें तो बेहतर होगा। 

अपने दोस्त को कहलवा दें कि खुदकुशी का दबाव बनाकर वह अपनी स्थिति आपकी नजर में और भी बदतर कर रहा है। पहले आप, अपने-आपको सामान्य करें। थोड़ा वक्त गुजर जाए तब आप उस स्थिति का कई दृष्टिकोण से विश्लेषण कर पाएंगी। हो सकता है, तब आपको उस पूरी घटना का कोई और भी मायने नजर आए। 

चाहे जो भी आपका फैसला हो वह इस सदमे से निकलने के बाद ही हो सकता है। इस बीच आपके दोस्त का क्या रवैया रहता है वह भी आपके निर्णय पर अपना प्रभाव डालेगा। पर, अपने आपको ज्यादा घुटन या कष्ट में नहीं रखने के लिए कहीं और घूम कर आएं। नई व्यस्तता बनाएं। जो काम पसंद हो, वह करें। किसी को माफ करने से नया जीवन जीना आसान हो जाता है।

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