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Saturday, August 31, 2013

Rajan slide show

बेवफाई से जुड़ी 10 खास बातें...


'हम बेवफा हरगिज न थे, पर हम वफा कर न सके...' जब किसी पर बेवफाई का आरोप लगता है तो मन कुछ इसी तरह की भावनाएं उमड़ती हैं। हालांकि यह भी उतना ही सही है कि 'प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है'। फिर भी प्रश्न उठता है कि आखिर लोगों के अफेयर्स होते ही क्यों हैं?

वास्तव में हम एक ऐसी संस्कृति से जुड़े हैं जहां खाने के दांत और तथा दिखाने के दांत अलग अलग होते हैं। इसलिए जब बेवफाई की बात आती है तो तथ्‍य को कल्पना से अलग करना सरल नहीं होता है। इतना ही नहीं, इस बात की भी पूरी संभावना होती है कि अफेयर्स को लेकर आम धारणाएं गलत ही होती हैं। नीचे कुछ ऐसी ही बातें हम आपको बता रहे हैं जो कि वास्तविकता से दूर और कल्पनाओं पर आधारित ज्यादा होती हैं।


* ज्यादातर उन लोगों के अफेयर्स होते हैं जो क‍ि अपने विवाह से खुश नहीं होते हैं। कई सर्वेक्षणों के दौरान जब दुष्चरित्र लोगों से पूछा गया कि क्या वे अपने विवाह को खत्म करना चाहते हैं तो ज्यादातर का जवाब था नहीं। अफेयर्स रखने वाले लोग जिनमें 56 फीसदी पुरुष और 34 फीसदी महिलाएं होती हैं, का कहना होता है कि वे अपने विवाह से खुश या बहुत खुश हैं। जहां तक आमतौर पर विवाह की बात आती है तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपने विवाह से ज्यादा असंतुष्ट होती हैं।

* एक बार अफेयर के सार्वजनिक हो जाने पर दम्पत्ति भले ही साथ-साथ रहते हों, लेकिन वे कभी भी फिर से सुखी नहीं रह सकते हैं। सच यह है कि लोग अपने अफेयर्स के बारे में अपने मित्रों और पड़ोसियों से बात नहीं करते हैं। इसी कारण है कि आप सफल अफेयर्स की कहानियां नहीं सुनते हैं। वास्तव में ज्यादातर दम्पति अपने विवाह को फिर से सफल बनाने का तरीका खोज लेते हैं। कुछ तो यह कहते हैं कि बेवफाई की घटना के बाद उनका वैवाहिक जीवन और भी मजबूत हो गया है।


 * ज्यादातर लोग अपने पति या पत्नी से तब अलग होते हैं जब वे किसी अधिक युवा या आकर्षक साथी को पाते हैं। आर्नोल्ड स्वार्जनेगर का अपनी हाउसकीपर के साथ अफेयर को ध्यान में रखें। कुछेक मामलों में कॉरपोरेट सीईओ अधिक युवा सेक्स मेट्‍स की तलाश में रहते हैं, लेकिन आमतौर पर प्रेमी न तो अधिक युवा और सम्पन्न या फिर पति या पत्नी की तुलना में अधिक आकर्षक होते हैं। 

* अफेयर्स का अंत हमेशा ही विवाह की समाप्ति होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि 50 फीसद से अधिक विवाह अफेयर्स को झेल जाते हैं। हालांकि भविष्य में किसी अन्य कारण से संबंध टूट सकते हैं, लेकिन बहुत सारे दम्पत्तियों को यह जानकर आश्चर्य होता है कि एक अफेयर के बाद भी वे साथ-साथ रह सकते हैं।

 * हम सोचते हैं कि ज्यादातर अपने साथी को धोखा देने वाले लोग हमेशा की अफेयर की फिराक में रहते हैं। वास्तविकता यह है कि ज्यादातर अवसरों पर ऐसे लोगों के भी अफेयर्स शुरू हो जाते हैं जो कि इसकी तलाश में नहीं रहे हैं। यह ऐसे विशेष मामलों में सही है, जिनमें एक साथी को एक आदमी को धोखा देना पड़ा। ज्यादातर अफेयर्स दोस्ती के तौर पर शुरू होते हैं, इसके बाद करीबी बढ़ती है और धीरे-धीरे पूरा अफेयर हो जाता है। 

* एक बार धोखा देने वाला हमेशा धोखा देता है। हालांकि यह बात सच हो सकती है कि कुछ लोग अफेयर्स दोहराते हैं लेकिन ज्यादातर अफेयर्स ऐसे होते हैं जो कि एक बार ही होते हैं और पुरानी बात हो जाते हैं। एक अफेयर के बाद होता यह है कि या तो विवाह और स्थायी हो जाता है या फिर दोनों को बड़े आश्चर्य में डाल देता है। अफेयर खत्म करने के बाद धोखा देने वाले व्यक्ति को घाव भरने के लिए पूरी तरह ईमानदार होना चाहिए।

* अफेयर्स इसलिए होते हैं क्योंकि विवाह में कहीं न कहीं गड़बड़ी होती है। सच बात तो यह है कि प्रत्येक विवाह को लेकर कोई न कोई बात गलत होती है। वास्तव में अफेयर्स यह दर्शाते हैं कि दम्पत्ति को यह पता नहीं होता है कि विवाह में समस्याओं को समाप्त करने के लिए उन्हें मिल-जुलकर काम करना चाहिए। मात्र इसलिए कि आपके वैवाहिक जीवन में समस्याएं हैं, इस आधार पर वेवफाई को उचित नहीं ठहरा सकते हैं।

* अफेयर्स केवल सेक्स के लिए होते हैं। वास्तव में ज्यादातर अफेयर्स इसलिए होते हैं क्योंकि एक साथी दूसरे के साथ भावनात्मक संबंध खोजता है और कभी-कभी तो ऐसा होता है कि यह स्थिति अफेयर के खत्म होने तक बनी रहती है। हालांकि यह बात भी संभव है कि भावनात्मक करीबी के चलते कभी-कभी शारीरिक निकटता भी होती है, लेकिन जब दोनों का सम्पर्क होता है तब उनका मूल मकसद सेक्स नहीं होता है।

* अगर सेक्स नहीं तो अफेयर नहीं। वास्तव में बहुत से अफेयर्स बिना किसी सेक्स के ही होते हैं। अगर आप आधी रात तक जागकर अपने सर्वाधिक करीबी विचारों को अपनी पुरानी क्लासमेट को गोपनीय संदेश के तौर पर भेज रहे हैं तो क्या यह बेवफाई है? संभव है जो व्यक्ति संदेश भेज रहा हो, उसने इसे बेवफाई न समझा हो लेकिन उसका साथी इसे बेवफाई समझ सकता है। पर जब आप अपने भावनात्मक जीवन का एक भाग किसी ऐसे व्यक्ति के हवाले कर देते हैं जो आपका संभावित अफेयर मेट हो सकता है तो यह बेवफाई का ही एक प्रकार है।

* धोखा देने का अर्थ हमेशा ही सेक्स करना नहीं होता है और यह अन्य वैवाहिक मुद्‍दों से जुड़ा होता है। यह ठीक ऐसी काल्पनिक बात है कि सारे अफेयर्स केवल सेक्स के लिए होते हैं। ठीक इसी तरह यह भी एक काल्पनिक बात है कि सारे अफेयर्स भावनात्मक जरूरतें पूरी न होने के कारण होते हैं। ज्यादातर लोगों की तुलना में कुछे लोग ही मानते हैं कि अफेयर्स का अर्थ बाहर निकलना और सेक्स कर लेना है।

अन्त में बेवफाई से संबंधित तथ्‍यों और काल्पनिक बातों को समझकर आप और आपका साथी यह अंतर कर सकते हैं कि अफेयसो कैसे होते हैं और इन्हें कैसे रोका जा सकता है। जिन लोगों का अफेयर रह चुका है, उनके लिए सच्चाई जानना एक ऐसा मजूबत उपाय होता है जिसके जरिए वे इस अनुभव से उबर सकते हैं।

  

आवश्यकता है रक्तदान क्रांति की


रक्त की एक बूँद जीवनदायिनी
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दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञानियों के मुताबिक आती सर्दियों में स्वाइन फ्लू वायरस का पलटवार और जोरदार ढंग से होगा। देश में इस समय डेंगू का प्रकोप जोरों पर है जिसे स्वाइन फ्लू के 'प्रचार' ने पीछे ढकेल रखा है। इन दोनों बीमारियों में मरीज के रक्त में 'प्लेटलेट' का स्तर खतरनाक ढंग से नीचे गिर जाता है।

हर साल देश की कुल 2433 ब्लड बैंकों में 70 लाख यूनिट रक्त इकट्ठा होता है। जबकि जरूरत है 90 लाख यूनिट की। इसका भी केवल 20 प्रतिशत ही रक्त बफर स्टॉक में रखा जाता है। शेष का इस्तेमाल कर लिया जाता है। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) की गाइडलाइंस के मुताबिक दान में मिले हुए रक्त का 25 प्रतिशत बफर स्टॉक में जमा किया जाना चाहिए, जिसे सिर्फ आपातस्थिति में ही इस्तेमाल किया जा सके। एक यूनिट रक्त 450 मिलीलीटर होता है। आसन्न संकट के मद्देनजर देश को एक रक्तदान क्रांति की सख्त जरूरत है।

मरीज की जान बचाने के लिए रक्त चढ़ाना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। शरीर के बाहर रक्त किसी भी परिस्थिति में 'पैदा' नहीं किया जा सकता। जाहिर है, इसे केवल रक्तदान से हासिल किया जा सकता है। रक्तदान दो तरह का होता हैः एक, जिसमें मरीज को चढ़ाए गए रक्त की भरपाई उसके स्वस्थ परिजन से लेकर की जाती है तथा दूसरे, 'स्वैच्छिक' रक्तदान से।

फिलहाल माँग का केवल 53 प्रतिशत रक्त ही स्वैच्छिक रक्तदान से हासिल होता है। शेष की पूर्ति 'रिप्लेसमेंट' से होती है। 1998 में सर्वोच्च न्यायायल के निर्देश पर देश में पेशेवर रक्तदान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। न्यायालय की मंशा यह थी कि मरीज के परिजनों से लिए गए रक्त की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी लेकिन इससे बचने के भी रास्ते निकल आए हैं।

जिन मरीजों के परिजन रक्तदान करने की स्थिति में नहीं होते वे ऐसे पेशेवरों का सहारा लेते हैं जो रिश्तेदार तो नहीं हैं लेकिन ब्लडबैंक में 'रिश्तेदार' बनकर ही पहुँचते हैं। यही वजह है कि अब पेशेवर रक्तदाताओं का एक ऐसा वर्ग खड़ा हो गया जो पैसा लेकर ब्लड बैंक पहुँचने लगा है। बावजूद इसके रक्त की कमी हमेशा बनी रहती है।

इंडियन सोसायटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनो-हिमेटोलॉजी (आईएसबीटीआई) के मुताबिक स्थिति इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि हमारे देश में अब भी पूर्ण रक्त चढ़ाने का चलन है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्त को एक जीवनरक्षक औषधि के तौर पर देखा जाना चाहिए।

अधिकांश मामलों में पूर्ण रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रक्त के अवयव (प्लेटलेट, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी) चढ़ाने से ही मरीज ठीक हो जाता है। दुनिया भर में 90 प्रतिशत मामलों में रक्त के अवयवों का प्रयोग होता है जबकि हमारे देश में केवल 15 प्रतिशत मामलों में ही इनका प्रयोग होता है। 85 प्रतिशत मरीजों को पूर्ण रक्त चढ़ा दिया जाता है।

इस विसंगति की दूसरी वजह यह भी है कि हमारे देश में ब्लड कंपोनेन्ट सेपरेटर मशीनें बहुत ही कम ब्लड बैंकों में लगी हैं। इसके अलावा कंपोनेन्ट्स को अलग करने में लागत बढ़ जाती है। रक्त की कमी के कारण देश में हर साल 15 लाख मरीज जान से हाथ धो बैठते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन बच्चों की है जिन्हें थेलेसीमिया के कारण जल्दी-जल्दी रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। हादसों के शिकार घायलों, मलेरिया के मरीजों, कुपोषणग्रस्त बच्चों के अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को कई कारणों से रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है।

संक्रमित रक्त का जोखिम
दरअसल हमारे देश में स्वैच्छिक रक्तदान अब भी जीवनशैली का हिस्सा नहीं हो सका है। आज भी ऐसे नवधनाढ्यों की कमी नहीं है जो अस्पतालों के इमरजेंसी रूम्स या ऑपरेशन थिएटरों में पड़े अपने रिश्तेदारों को रक्तदान करने के बजाए मुँहमाँगी कीमत पर खून खरीद लेने की पेशकश करते हैं। ऐसे में पेशेवर रक्तदाता 'रिश्तेदार' बनकर सामने आते हैं।

47 प्रतिशत रक्त की जरूरत इन्हीं लोगों से पूरी होती है। ऐसे 'स्वैच्छिक' रक्तदाता के खून की गुणवत्ता तो निश्चित ही गिरी हुई होती है, साथ ही संक्रमित है या नहीं इसकी भी जाँच नहीं हो पाती। आज देश में हजार में से तीन लोगों को दूषित रक्त चढ़ाने के कारण एचआईवी का संक्रमण होता है।

हर रक्तदाता को नियमानुसार पहले तीन महीनों के लिए निगरानी (विंडो पीरियड) में रखा जाना चाहिए। रक्तदाता के खून में एचआईवी का संक्रमण है या नहीं, यह जाँचने के लिए ऐसा करना आवश्यक है। आज जिसने रक्तदान किया हो और परीक्षण में एचआईवी वायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आई हो, उसका तीन महीने बाद पुनः परीक्षण होना चाहिए। इसमें संक्रमण नहीं आने पर ही रक्त किसी मरीज को चढ़ाने के योग्य समझा जाता है। हमारे यहाँ ऐसा नहीं हो पाता। यही वजह है कि पूर्ण रूप से स्वस्थ स्वयंसेवकों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

क्या है स्थिति रक्तदान की
देश में फिलहाल केवल 500 ब्लड बैंक ही ऐसी हैं जिन्हें बड़ी ब्लड बैंक कहा जा सकता है। यहाँ हर साल 10 हजार यूनिट्स से अधिक रक्त जमा होता है। करीब 600 ऐसी ब्लड बैंकें हैं जो हर साल 600 यूनिट्स ही इकट्ठा कर पाती हैं। शेष 2433 ब्लड बैंक्स ऐसी हैं जो 3 से 5 हजार यूनिट्स हर साल इकट्ठा कर लेती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक देश में एबी प्लस प्लाज्मा, ओ-पॉजिटिव, ओ-नेगेटिव का स्टॉक रहना बहुत जरूरी है। किसी भी आपातस्थिति में (जैसे मुंबईClick here to see more news from this city पर आतंकवादी हमला) जब घायलों को रक्त चढ़ाने के लिए परिजनों की राह नहीं देखी जा सकती हो, उन परिस्थितियों में उपरोक्त रक्त समूह का प्रयोग किया जाता है।

देश में लगभग 25 लाख लोग स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। सबसे अधिक ब्लड बैंक महाराष्ट्र (270) में हैं। इसके बाद तमिलनाडु (240) और आंध्रप्रदेश (222) का स्थान आता है। दान में मिला हुआ आधा लीटर रक्त तीन मरीजों की जान बचा सकता है। सबसे दुखद स्थिति उत्तर पूर्व के सात राज्यों की है। सातों राज्यों में कुल मिलाकर 29 अधिकृत ब्लड बैंक्स हैं।


Blood Donation
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कैसा होना चाहिए रक्त
इंडियन फार्माकोपिया के मुताबिक मानव रक्त एक औषधि है। इसके लिए कुछ शर्तें और नियम लागू किए गए हैं। मरीज को चढ़ाने के लिए प्राप्त रक्त को एचआईवी एंटीबॉडीज संक्रमण से मुक्त होना चाहिए। इसे हिपेटाईटिस बी और सी नामक वायरसों के अलावा सिफलिस, मलेरिया आदि से भी मुक्त होना चाहिए।

कौन कर सकता रक्तदान
कोई भी ऐसा व्यक्ति रक्तदान कर सकता है, जो

1. 18-60 वर्ष की उम्र का हो,

2. तीन साल से जिसे मलेरिया का संक्रमण न हुआ हो,

3. एक साल से पीलिया न हुआ हो,

4. उच्च रक्तचाप और डायबिटीज का रोगी न हो।

स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ करें नया
देश में स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए अब तक जो कुछ भी किया गया है वह अपर्याप्त साबित हुआ है। दरअसल जितनी बड़ी मात्रा में हमें शुद्ध रक्त चाहिए उसके लिए एक महा-आंदोलन की जरूरत है।

आखिर कौनसा रंग है सेक्सी..?

विभिन्न अध्ययनों से यह बात साबित हो रही है कि लाल रंग असाधारण रूप से ताकतवर होता है और विशेष रूप से तब जब स्त्री-पुरुष एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए इस रंग का इस्तेमाल करते हैं।



अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि ज्यादातर महिलाएं तब लाल या गुलाबी रंग के कपड़े पहनती हैं, जबकि वे अपनी सबसे अधिक प्रजनन करने में सक्षम होती हैं। कुछेक अन्य अध्ययनों से यह बात भी साबित हुई है कि डेटिंग वेबसाइट्‍स पर महिलाएं तब और अधिक सफल होती हैं, जबकि उन्होंने अपनी प्रोफाइल तस्वीरों में लाल रंग के कपड़े पहने होते हैं
अगर आप यह जानने को उत्सुक हैं कि एक महिला प्यार करने की तलाश में है या नहीं, तब आपका उत्तर इस तथ्य में छिपा होता है कि उस महिला ने पहन क्या रखा है। तमाम तरह के शोध से यह बात सामने आई है ‍क‍ि एक महिला अपने शरीर की अंदरूनी क्रियाओं के बारे में अपनी ड्रेस के जरिए संदेश देती है। अगर उसने लाल रंग की ड्रेस पहन रखी हो तो इसका अर्थ होता है, 'मैं सेक्स चाहती हूं।' वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जब महिलाएं अंडोत्सर्ग कर रही होती हैं तब वे लाल या गुलाबी वस्त्र अधिख पहनती हैं।

हालांकि इस बात का सही सही जवाब नहीं पाया जा सका है कि एक साथी को लाल रंग ही सबसे ज्यादा आकर्षित क्यों करता है। इसको लेकर बहुत सारे अनुमान लगाए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि लाल रंग का अर्थ सेक्स करने के बाद की शर्म की अनुभूति से है तो कुछ का तर्क है कि पुरुष के मस्तिष्क में सबसे ज्यादा आवेग यही रंग पैदा करता है।
 यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर में मनोविज्ञान के प्रोफेसर एंड्रयू इलियट का कहना है कि रंग और व्यवहार के बीच संबंध जानने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि कलर फिजिक्स और कलर फिजियोलॉजी के बारे में अधिक जानकारी मौजूद है लेकिन रंग के मनोविज्ञान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। 

प्रोफेसर इलियट का कहना है कि 'हमें जानकारी नहीं होती है लेकिन यह जानना आश्चर्यजनक है कि रंग जैसी कोई चीज आपके व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोल‍‍म्ब‍िया, कनाडा के शोधकर्ताओं ने 124 महिलाओं का सर्वेक्षण किया और उनसे कपड़ों के रंगों के बारे में पूछा और उनकी यह पसंद उनके पिछले पीरियड से कितने दिनों से रही है। इन लोगों ने पाया कि जो महिलाएं लाल या गुलाबी रंग के कपड़े पहनती थीं, उनके गर्भवती होने की सबसे ज्यादा संभावना थी।

हाल के एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि जो महिलाएं अपने ऑनलाइन डेटिंग प्रोफाइल में लाल रंग के कपड़ों में नजर आती हैं, उन्हें अन्य रंग के कपड़े पहनने वाली महिलाओं की तुलना में ‍अधिक संदेश मिलते हैं और अधिक डेट्स मिलती हैं।

जिन महिलाओं ने लाल या गुलाबी रंग के कपड़े पहने थे वे अन्य रंगों के कपड़े पहनने वाली महिलाओं की तुलना में उनकी प्रजनन शक्ति तीन गुना ‍अधिक थी। इसी तरह लाल कपड़े पहने महिला को पुरुषों ने अधिक आकर्षक पाया और वे उन पर अधिक पैसा खर्च करने को भी तैयार थे।

बुढ़ापे से बचने के लिए 7 उपाय...




शालीनता के साथ बूढ़े होने और दिखने का अपना तरीका होता है। और महिलाओं के मामलों में ऐसा देखा जाता है कि वे कुछ ही वर्षों के दौरान बहुत अधिक बूढ़ी दिखने लग जाती हैं। लेकिन, ऐसा भी होता है कि कुछ महिलाएं अन्य की तुलना में कम बूढ़ी या बेहतर दिखती हैं, जबकि कई महिलाएं अपनी उम्र से ज्यादा की भी दिखने लगती हैं। हालांकि आप क्या कोई भी बूढ़े होने और दिखने से बच नहीं सकता है ल‍ेकिन कुछ महिलाएं ऐसी होती हैं जो कि बुजुर्ग भी ग्रेसफुली होती हैं। इस स्थिति को पाने के लिए आपको सात कदम उठाने की जरूरत है।   




1. इस दिशा में सबसे पहली जरूरत है कि आप इलैस्टिक वेस्बैंड्‍स को अपनाएं। हालांकि बैगी पॉलिएस्टर पैंट्‍स पर एक इलैस्टिक वेस्बैड कहती है कि मैं बूढ़ी हो गई हूं, लेकिन आपको 'नेवर वियर इलैस्टिक वेस्ट्‍स' नियम को छोड़ना ही होगा। आपको कैजुअल और फॉर्मल वियर को अपनाना होगा जो कि आपको स्टाइलिश लुक देते हैं। जब आप बैठती हैं तो यह आपके नितम्बों को अधिक फैला हुआ दिखने से रोकता है। इसके साथ ही अगर लम्बा स्वेटर और राइडिंग बूट्‍स पहनें तो आप और भी अच्छी दिखेंगी। 




2. पंद्रह वर्ष पुराना मेकअप : कपड़ों की तरह से मेकअप स्टाइल भी बदलती है। आपके मेकअप से आपकी उम्र का राज उजागर हो सकता है। ठीक वैसे ही पेड़ के तने पर बढ़ते वलयों की संख्या से उसकी उम्र का पता लग जाता है। लेकिन आपको अधिक सामयिक लुक अपनाने की बजाय पुराने और आजमाए सौंदर्य उत्पादों पर ध्यान दें। इसलिए बेहतर होगा कि आप वैसा ही मेकअप करें जैसा कि पंद्रह वर्ष पहले करती थीं। इसका एक अर्थ यह भी होगा कि आप अपनी उम्र में से 15 वर्षॅं की कटौती करती नजर आएंगी, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आप जितने भी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें वे अच्छे होने चाहिए।  




3. एक पर्सनल शॉपर को रखें : एक अच्छा पर्सनल शॉपर आपकी बॉडी के टाइप के बारे में अच्छी तरह जानता है। आपके क्लोजेट में क्या क्या है, इसका भी ध्यान रखें और पूरे वार्डरोब को बदलने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। एक अच्छा शॉपर याद रखता है कि आप क्या खरीदती हैं और उन चीजों में के मू्ल्यों में कमी की दरयाफ्त करता है जो आपने खरीदे, आजमाए लेकिन अब नहीं मिल पा रहे हैं। कभी-कभी एक छोटी से छोटी चीज भी बहुत बड़ा अंतर पैदा करने में समर्थ होती है।  





4. व्यायाम बंद करें, स्वस्थ वजन रखें : यह सभी जानते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ हमारी पाचन क्रिया भी धीमी होती जाती है और इस कारण से बजन बढ़ने लगता है। कभी-कभी आप वे व्यायाम भी नहीं कर पाती हैं जो कि पहले कभी करती रही हों। घुटनों में दर्द होता है, पैर दुखने लगते हैं और ऐसी हालत में तैराकी सबसे अच्छा व्यायाम होता है। इसी तरह पैदल चलना भी अच्छा व्यायाम होता है और सुबह के समय घूमने के साथ ताजी हवा खाएं। इस समय पर आपका सबसे बड़ा मंत्र होना चाहिए कि व्यायाम पर रोक लगा लें, लेकिन वजन भी बहुत अधिक ना बढ़ने दें। इसके लिए हल्के-फुल्‍के व्यायाम ही करें। 




5. युवा होने के झरने की खोज करें : बूढ़ा होना ऐसी बीमारी नहीं है जिसका कोई ‍इलाज हो। हमें अपना सबसे अच्छा दिखना और अनुभव करना है और इसका अर्थ यह नहीं है कि हम घड़ी की सुइयों को पीछे की ओर कर दें। हम सभी अपने अपने जीन्स की उपज हैं और हमने शुरुआती दशकों में अपना जितना ध्यान रखा होगा, उसी के अनुरूप हमारा शरीर बन जाता है। 




6. अपने आप को बूढ़ा न समझें : हम ऐसी बहुत सारी महिलाओं से मिलते हैं जो कि यह सोचकर अवसाद से घिर जाती हैं कि वे अपनी युवावस्था में नहीं हैं। यह बात इस पर ज्यादा निर्भर करती है कि हम अपने को कैसा अनुभव करते हैं, अपने आप को कैसा देखते हैं।

अधिक उम्र की सबसे सुखी महिलाएं वे हैं जो कि पूरा जीवन जीती है, सक्रिय जीवन जीती हैं। अपने काम से खुद को व्यस्त रखें। याद रखिए आप उतने ही अधिक बूढ़े होते हैं जितने कि आप अपने आप को समझते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मेनोपॉज की उम्र पार करने के बाद महिलाएं कम अवसाद की शिकार होती हैं और वे अपने जीवन, काम के बारे में बेहतर विचार रखती हैं।




7. नमक के साथ रिश्ता तोड़ें : नमक के कई नाम हैं और ये कई रूपों में हमारे जीवन में घुसपैठ करता है। जब इस ज्यादा मात्रा में लिया जाता है तो यह रक्त चाप के तौर पर सामने आता है। हमारे घुटने सूजने लगते हैं और आंखों के नीचे गड्‍ढे बनाता है। लेकिन हमें नमक की भी जरूरत होती है। जोकि अधिक उम्र की नहीं हैं उन्हें अपनी नमक की खुराक पर ध्यान देना चाहिए। आप जितना कम नमक खाएंगी, उतना ही अच्छा महसूस करेंगी और अच्छी दिखाई देंगी।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बढ़ती उम्र मांग करती है कि हम अपने खाने को लेकर अधिक सतर्क हो जाएं। हमारा शरीर हमारा मंदिर होता है और इसे उसी तरह से समझा जाना चाहिए। 

ऐसे बढ़ेंगे सफलता की ओर कदम...

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जीवन में आगे बढ़ने हेतु व्यक्ति निरंतर प्रयासरत रहता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को निरंतर मेहनत करनी ही होती है। किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए व्यक्ति को अपनी मंजिल का भी पता होना चाहिए। इसके बगैर किया गया प्रयास व्यक्ति को असफलता की ओर ही ले जाता है।

जीवन में सफल होने के कुछ टिप्स:-

एकाग्रता बढ़ाएं : सफल होने के लिए एकाग्रता का होना जरूरी है। एकाग्रता यानी ‍‍किसी भी एक ही विषय-विशेष पर पूर्ण ध्यान दिया जाना। किसी ‍व्यक्ति को तब तक सफलता नहीं मिल सकती, जब‍ तक कि वह एकाग्र न हो। बिना रुचि के एकाग्र होना काफी मुश्किल है।

समय का महत्व समझें : सफलता प्राप्ति में समय का काफी महत्व है। जिसने समय के महत्व को जान लिया उसने सब कुछ पा लिया। अत: किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समय-प्रबंधन (Time management) जरूर करें। किसी विद्वान ने ठीक ही कहा है कि 'मैंने समय को खोया, समय ने मुझे'। इसी से पता चलता है कि समय कितना कीमती है। यह भी कहा गया है कि समय ही सोना (Gold) है अत: समय को बरबाद न करें।

अपनी शक्ति-सामर्थ्य का पता करें : अपनी शक्ति-सामर्थ्य का हमें पता होना चाहिए। हमेशा लक्ष्‍य ऐसा चुनें, जो अपनी शक्ति- सामर्थ्य में हो। कभी भी ऐसा लक्ष्‍य चुनने की गलती नहीं करें, जो स्वयं की शक्ति-सामर्थ्य से बाहर हो। उदाहरण के लिए किसी की रुचि कला विषय लेकर दर्शन शास्त्र में सफलता प्राप्त करने की हो तो उसे जबरदस्ती इंजीनियरिंग या डॉक्टरी के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए। नहीं तो असफलता ही हाथ लगेगी।

कर्म करते रहें : व्यक्ति को सफलता प्राप्ति हेतु कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि इसी में क्रिया और उसका परिणाम दोनों शामिल हैं। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि 'कर्म मानव स्वतंत्रता की शाश्वत घोषणा है। हमारे विचार, शब्द और कर्म वे धागे हैं जिनसे हम अपने चारों ओर एक जाल बुन लेते हैं। हमें अपना कार्य सही व श्रेष्ठ दिशा में ही करना चाहिए।' सही का सही और गलत दिशा का परिणाम भी गलत ही होता है।

आशावादी बने रहें : व्यक्ति को हमेशा आशावादी ही बने रहना चाहिए। नकारात्मक विचार कभी भी मन में न लाएं। नकारात्मक विचारों से आत्मविश्वास कम होता है अत: हमेशा आशावादी दृष्टिकोण ही अपनाएं। इस बारे में काफी पुरानी एक कहावत भी है कि 'मन जीते जीत है और मन के हारे हार'। अत: सकारात्मक चिंतन श्रेष्ठ रहेगा।


जी-जान से भिड़ जाएं : एक बार मंजिल तय हो जाने के बाद आप जी-जान से सफलता प्राप्ति हेतु भिड़ जाएं। इसमें कोताही बरतना आपके लिए उचित नहीं कहा जाएगा। अपने इरादों पर दृढ़ रहें व डिगें नहीं। कई बार इसमें असफलता के अवसर भी आ सकते हैं किंतु आप अपने दृढ़ संकल्प से उस पर पार पा लेंगे। आप ऐसा ही विश्वास बनाए रखें।

ईश्वर से प्रार्थना भी करें : ईश्वर से प्रार्थना का भी अपना महत्व है। ईश प्रार्थना से हृदय व मन-मस्तिष्क के तार भी झंकृत होते हैं। अनुसंधानों में भी पाया गया है कि नियमित मंदिर जाने तथा भगवान की प्रार्थना करने वाले हमेशा आशावादी बने रहते हैं, क्योंकि उनके मन में यह भाव रहता है कि 'ईश्वर मेरे साथ है।' यह भाव सकारात्मकता की ओर ले जाता है।

इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।

सकारात्मक सोच जरूरी है आगे बढ़ने के लिए

महात्मा गांधी का प्रसिद्ध कथन है कि इंसान वैसा ही बनता जाता है जैसी वह सोच रखता है। यह कथन छोटे या बड़े हर व्यक्ति पर लागू होता है। आप जिंदगी में सफल तभी हो सकते हैं जब आप सफलता हासिल करने के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक रखेंगे। अगर अपनी खामियां ढूंढ-ढूंढकर खुद को कमतर ही आंकते रहेंगे तो कभी सफलता की ओर कदम नहीं बढ़ा सकेंगे।


आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल तभी हो सकते हैं जब आप अपनी काबिलियत का सौ प्रतिशत इस्तेमाल करें। अगर आप थोड़ी सी परेशानियों से घिरने पर खुद की क्षमताओं पर ही संदेह करने लगेंगे तो सफल होना मुश्किल है। हो सकता है कि एक बार प्रयास करने पर सफलता न मिले लेकिन अगर आप नकारात्मकता से दूर रहते हुए पूरे मन से प्रयास करेंगे तो सफलता मिलनी तय है।'



सकारात्मक सोच का संबंध सिर्फ आपके करियर से ही नहीं है, यह आपके परिवारिक और सामाजिक जीवन से भी जुड़ी है। नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपने आसपास एक ऐसा नकारात्मक माहौल बना लेते हैं। जो उनके साथ-साथ उनके आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है।


कभी गौर करें कि जब आप जीवन के प्रति सकारात्मक बातें करते हैं तो बहुत से लोग आपकी ओर आकर्षि‍त होते हैं वहीं अगर आप हर समय जीवन के नकारात्मक पहलुओं को ही कुरेदते रहते हैं तो हर कोई आपके साथ से बचना ही चाहता है।




जीवन से जुड़ी अपेक्षाएं पूरी न होने पर निराशा स्वाभाविक है लेकिन अगर आप उस निराशा के अंधेरे में ही डूबे रहेंगे तो आशा की दूसरी किरणों को पहचान भी नहीं पाएंगे।
याद कीजिए फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान Watch the New Look of Aamir !! का वह जुमला-‘ऑल इज वैल’। आमिर इस फिल्म में कहते भी हैं कि यह जुमला कहने का यह मतलब नहीं कि सारी परेशानियां खत्म हो गईं। बल्कि इसे बोलने का मकसद तो हमारे सामने पेश आने वाली परेशानियों से लड़ने की ताकत हासिल करना है।




जीवन में उतार-चढ़ाव आना लाजमी है। लेकिन आपके असल व्यक्तित्व की पहचान आपके उस रवैये से है जो आप परेशानियों में घिरा होने पर अपनाते हैं। कुछ लोग जीवन के सकारात्मक पहलुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपनी जिंदगी में उत्साह बरकरार रखते हैं और कुछ लोग नकारात्मकता से इस कदर घिर जाते हैं कि कोई गलत कदम उठाने से भी नहीं चूकते। 

पहला कदम तो बढ़ाएं



जिंदगी के सफर में हमें अपने आप को बनाए रखने के लिए काफी मेहनत करना पड़ती है। अच्छा इंसान बनने से लेकर नौकरी पाना और नाम कमाने के लिए निश्चित रूप से मेहनत का दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। परंतु क्या सभी लोग सफलता प्राप्त कर लेते हैं या जो मनचाही सफलता होती है उसे प्राप्त कर लेते हैं या उसके करीब भी पहुंच पाते हैं।

हम अगर परिस्थितियों को समझें तब तक समय गुजर चुका होता है और कई वर्षों बाद हमें लगता है कि अगर आज वहीं परिस्थितियां हमारे सामने होती तब हम और भी अच्छा कर सकते थे। दरअसल मेहनत, समर्पण और समय दोनों की माँग करती है और बहुत ज्यादा मेहनत करना पड़ेगी। इस बात को सोच कर व्यक्ति पहला कदम ही नहीं उठाता और पीछे हट जाता है।

पीछे हटने की आदत कई लोगों में रहती है और कई लोग किसी भी तरह की स्पर्धा से ही डरते हैं। वे प्रतिभा संपन्न होने के बावजूद केवल इस बात को लेकर पीछे हट जाते हैं कि उनके जैसे और भी लोग हैं और शायद वे स्पर्धा में अच्छा न कर पाएं और असफलता मिलने पर लोग क्या कहेंगे? इस डर के कारण वे अक्सर पीछे रह जाते हैं और अपने लिए एक ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं, जहां के वे ही राजा हों और बाकी सभी उनकी सुनने वाले हों।


ऐसे व्यक्ति समान प्रतिभा या प्रतिभाशाली लोगों से मिलने से भी कतराते हैं और स्वयं को एक ऐसे घेरे में बांध लेते हैं जहां पर उनसे कोई स्पर्धा न कर सके। कई बार हमें लगता है कि मंजिल काफी दूर है और इसे पाने के लिए काफी लंबा सफर तय करना होगा। ऐसे में सफर को कई टुकड़ों में बांट लेना काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। आप जानते हैं कि मंजिल दूर है पर इसका मतलब यह तो नहीं की मंजिल की ओर कदम ही न बढ़ाया जाए।

मंजिल दूर है, इस कारण प्रयत्न न करना पीछे हटने वाली बात है। छोटे व सधे हुए कदमों से अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ाएंगे तब सफलता निश्चित है। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे पहले हमें अपनी मंजिल का पता होना चाहिए। हमें पता होना चाहिए हमारी मंजिल कहां है और फिर बात आती है वहाँ तक पहुंचने की। आज के युवा साथी अपने करियर की मंजिल को लेकर काफी सजग रहते हैं और उन्हें पता रहता है कि वे क्या करना चाहते हैं।

आज करियर के कई विकल्प भी मौजूद हैं और युवा साथी अपनी मंजिल की तलाश में निकल भी पड़ते हैं पर कई साथी ऐसे भी होते हैं जो मंजिल की ओर उत्साह भरे कदम बढ़ाते जरूर हैं पर बीच में ही सफर समाप्त कर देते हैं और एक नई मंजिल की ओर कदम बढ़ाने लगते हैं। इस कारण उन्हें लगातार असफलता प्राप्त होती रहती है। वे ये नहीं सोच पाते की उनके लिए श्रेष्ठ मंजिल कौन सी है।

इस कारण जब भी अपनी मंजिल की ओर सधे कदम बढ़ाना हो तब मार्गदर्शन लेने में कोई भी बुराई नहीं बल्कि इससे यह पता चल जाता है कि आखिर उनके लिए क्या श्रेष्ठ है।

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प्रपोज डे : इजहार-ए-मोहब्बत का अंदाज


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हैप्पी प्रपोज डे...! आपको तो पता ही है कि हम वेलेंटाइन वीक सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस वीक का दूसरा दिन है प्रपोज डे। अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं या फिर रोज डे पर किसी कारणवश आप उनसे अपनी बात नहीं कह पाए हैं तब यह खास दिन सिर्फ आपके लिए है। इस दिन कुछ अलग अंदाज में आप अपने दिल की बात अपने प्रिय तक पहुंचा सकते हैं। 

जैसे समय के साथ प्रेम की परिभाषा बदली है, ठीक उसी तरह बदलते दौर के साथ-साथ प्यार का इजहार करने के तरीके भी बदले हैं। अब गया वो जमाना जब प्रेमी एक-दूसरे को पत्र लिखकर अपने प्यार का इजहार करते थे। 

फेसबुक और गूगल की दुनिया में कुछ भी असंभव या दुर्गम तरीका नहीं बचा। इसी कारण आज के प्रेमी अधिक तैयार, अधिक आत्मविश्वासी और अधिक प्रयोगशील हो गए हैं। इन्हीं प्रेमियों के लिए पेश हैं प्रपोज करने के लिए कुछ खास और हटकर तरीके : 

आकाश में प्लेन के धुएं से 
यदि आप वाकई कुछ खास और कुछ हट कर करना चाहते हैं तो इससे बेहतर विकल्प मिलना मुश्किल है। इसके लिए आपको दो चीजों की खास आवश्यकता रहेगी। पहली, अपने लोकल फ्लाइंग क्लब में खुद के या किसी और के माध्यम से पहचान, जिससे आपका काम आसान हो जाए। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी और चुनौतीपूर्ण जरूरत है अच्छा-खासा बजट। यदि आप जिसे चाहते/चाहती हैं, उसके लिए असल में कुछ यादगार करना चाहते हैं और जवाब को हां बनाने की संभावना बढ़ाना चाहते हैं तो इस विकल्प पर निश्चित रूप से गौर कीजिएगा।

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अखबार में विज्ञापन देकर 
आपके प्रेमी को यदि रोजाना अखबार पढ़ने की आदत है और वह नियमित रूप से सारे पृष्ठों पर निगाह मारते हैं तो आप इस विकल्प के बारे में सोच सकते हैं। आप अपने प्रेमी के पसंदीदा अखबार में विज्ञापन छपवाकर अपने दिल की बात कह सकते हैं। इस तरीके के कुछ पहलू हैं जो अच्छे-बुरे दोनों हो सकते हैं, यह निर्भर आपके नजरिए पर करता है कि आप उन्हें कैसा मानते हैं। पहला यह कि इससे आधी दुनिया को पता चल जाएगा कि आपके दिल की बात क्या है। 

यदि आपको विश्वास है कि जवाब हां ही होगा, तो ही यह तरीका आपके लिए उचित है। दूसरा, यह तरीका कुछ लोगों को थोड़ा कम पर्सनल लग सकता है, हालांकि इसे और पर्सनल बनाने के लिए आप अपने प्रेमी के घर उस समय पहुंच सकते हैं जिस समय आपको पता है कि वे अखबार पढ़ते हैं। इस तरह वे आपका विज्ञापन देखेंगे और देखते से ही आपको खुद के सामने पाएंगे।

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फिल्म शुरु होने से पहले 
कैसा होगा यदि आप कोई रोमांटिक फिल्म देखने जाएं और पर्दे पर कुछ आए उससे पहले आपकी आंखों के सामने हों आपके प्रेमी अपने दिल की बात कहते हुए और आपको अपना जीवनसाथी बनाने की बात कहते हुए! बेहतर से बेहतर फिल्म से बढ़िया लगता है न। आप इस तरीके को अपने हिसाब से बदलकर कस्टमाईज कर सकते हैं। यदि आपका बजट बड़ा है और आप अपने दिल की बात ज़्यादा लोगों के सामने नहीं कहना चाहते हैं तो आप पूरा हॉल भी बुक कर सकते हैं। 

आप यदि सभी देखने वालों के सामने कहना चाहते हैं तो आप सिर्फ बीच की दो टिकटें लें और टिकट जांचने वाले व्यक्ति से निवेदन कर सकते हैं कि वह उस घड़ी टॉर्च की लाइट आप दोनों की तरफ कर दे। इससे फायदा यह होगा कि सब आपको देख पाएंगे और आपका उत्साहवर्धन निश्चित रूप से करेंगे। यह तरीका अधिक व्यक्तिगत, गहराई से सोचा हुआ और रूमानी होने का अच्छा मिण है और यदि पहले जवाब हां होने की संभावना 50-50 रही हो तो इसके बाद 75-25 तो हो ही जाएगी।

रेडियो पर अपनी आवाज में 
क्या आप अपने दिल की बात चिल्ला-चिल्लाकर पूरी दुनिया के सामने कहना चाहते हैं और जानते हैं कि आपके प्रेमी/प्रेमिका को यह तरीका पसंद आएगा! तो यह तरीका आपके जैसे लोगों के लिए ही बना है। इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। आप जानते ही होंगे कि आपके प्रेमी का पसंदीदा रेडियो स्टेशन कौनसा है और उस स्टेशन पर कौनसा ऐसा शो है जो वे गलती से भी सुनना नहीं छोड़ते हैं। 

बस अब उनके प्रिय रेडियो जॉकी की जगह उस दिन लेंगे आप और सारे सुनने वालों के सामने पेश होगी आपके दिल की बात। कोशिश करें कि आपका वह संदेश पहले से ही रिकॉर्ड कर लिया जाए ताकि आप उस समय अपने उन खास के साथ हों जब वह संदेश रेडियो पर प्रसारित किया जाए। प्यार का इजहार करने का यह एक ऐसा तरीका है जिसमें पर्सनल टच भले ही थोड़ा कम प्रतीत हो, लेकिन यह आपके प्रेमी की पसंद-नापसंद का ख्याल अच्छे से रखता है।

हॉट एयर बेलून में 
आप यदि एडवेंचर के शौकीन हैं तो यह विकल्प शत-प्रतिशत आपको भाएगा। धरती से सैंकड़ों फुट ऊपर, बीच आकाश में प्यार का इजहार करने का अलग ही मजा है। न कोई देखने-सुनने वाले, न कोई इजहार की प्रक्रिया में बाधा डालने वाला। यह एकांत और रूमानियत का एक बढ़िया विकल्प है। यह तरीका बेहद विशेष और अनोखा होने के साथ-साथ निश्चित रूप से अविस्मरणीय साबित होगा। 

आप अपने प्रेमी से यह भी कह सकते हैं कि आप उनकी जिंदगी का सफर उतना ही खास बना देंगे जितनी की वह सैर है। हालांकि इस विकल्प के कुछ दोष भी हैं। यदि आपको या आपके प्रेमी/प्रेमिका को ऊंचाइयों का भय है तो यह तरीका निश्चित रूप से आपके लिए नहीं बना है। दूसरा, हॉट एयर बलून हर शहर में उपलब्ध नहीं होते और इन्हें खासतौर से जुटाना थोड़ा महंगा सौदा पड़ सकता है। 

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और यदि आप इतना सब नहीं करना चाहते हैं और इस दिन को सामान्य रूप से सेलिब्रेट करना चाहते हैं तब इस दिन अपने प्यार के साथ अच्छा सा वक्त गुजारें और जब आप दोनों अपने-अपने घर को जाने लगे तब उनसे कह डाले अपने दिल की बात। 

यदि आप उनसे अपनी बात कह चुके हैं तब भी आपको ‍निराश होने की जरुरत नहीं है। आपके लिए भी यह दिन उतना ही खास है जितना की न्यू लवर्स के लिए, इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए आप पूरा एक दिन अपने हमदम के साथ बिता सकते हैं, उन्हें फिर एक बार प्रपोज करें और अपने प्यार के पहले दिन को फिर से जीएं। पूरे दिन आप उन्हें अलग-अलग अंदाज में प्रपोज कर सकते हैं। तो फिर देर किस बात की, आज कर दीजिए उन्हें प्रपोज।