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Thursday, September 29, 2011

क्या एक लड़का और लड़की केवल दोस्त हो सकते हैं?


boy and girl

भारत जैसे परंपरावादी समाज के संदर्भ में किसी ना किसी रूप में यह सवाल हमारे सामने आ ही जाता है कि क्या एक लड़का और लड़की केवल दोस्त हो सकते हैं? विशेषकर आज के आधुनिक युग में इस सवाल के बार-बार उठने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि महिला और पुरुष के बीच तथाकथित दोस्ती से जुड़े ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं जो यह प्रदर्शित करते हैं कि हमारे युवा दोस्ती की आड़ में सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि को ही महत्व देते हैं. नियमों में आबद्ध भारतीय समाज किसी भी लड़के और लड़की में मेल-जोल बर्दाश्त नहीं करता जब तक कि उनके बीच के संबंध को सामाजिक और पारिवारिक मान्यता ना मिल चुकी हो. ऐसे हालातों में वह कैसे उनके बीच दोस्ती के रिश्ते पर अपनी स्वीकृति दे सकता है.


हमारी फिल्मों में ऐसा ही दर्शाया जाता है कि खुद को एक-दूसरे का अच्छा दोस्त और शुभचिंतक मानने वाले लोगों में भी एक पड़ाव पर आकर पारस्परिक आकर्षण का विकास होने लगता है. कभी-कभार यह आकर्षण थोड़े समय के लिए तो कभी साथ रहते-रहते प्यार में तब्दील हो जाता है. ऐसी परिस्थितियां केवल फिल्मों में ही नहीं हकीकत में भी देखी जा सकती हैं. स्थिति चिंतनीय तब बन जाती है जब वे तथाकथित दोस्त खुद को एक-दूसरे के प्रति शारीरिक आकर्षण महसूस करने लगते हैं जिसके परिणामस्वरूप वह अपने संबंध की सारी सीमाएं लांघ जाते हैं. और अगर परिस्थितिवश वह अपने संबंधों को सही मुकाम तक नहीं पहुंचा पाते तो वे दोस्ती को ही सुरक्षित विकल्प मान कर चलते हैं. कितनी महिलाएं ऐसी हैं जो अपने ही दोस्तों की हैवानियत का शिकार हो जाती हैं. वे दोस्त जिन पर वे अत्याधिक विश्वास करती हैं, वो ही उनके आत्म-सम्मान को चकनाचूर कर देते हैं.


यही कारण है कि इनके संबंध को सामाजिक मान्यता मिलना तो दूर की बात है जब कोई सुनता भी है कि कोई लड़का और लड़की सिर्फ दोस्त हैं तो उनका मजाक बनाया जाता है. ऐसा नहीं है कि सभी दोस्त ऐसे ही होते हैं या कभी कोई लड़का और लड़की दोस्त हो ही नहीं सकते. लेकिन वर्तमान परिदृश्य ही ऐसा बन पड़ा है कि किसी युवक और युवती की दोस्ती को समझना काफी मुश्किल हो गया है.


हमारे रुढ़िवादी समाज की तो बात ही छोड़िए अगर लोगों के पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में झांक कर देखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आजकल की युवा पीढ़ी जो खुद को मॉडर्न औरब्रॉड माइंडेड समझती है, वह भी अपने प्रेमी या जीवन साथी के विपरीत सेक्स के लोगों के साथ दोस्ती सहन नहीं कर सकती. इस दोस्ती की वजह से पति-पत्नी के रिश्ते एक फिल्मी कहानी की तरह उलझ जाते हैं. अंतर बस इतना रह जाता है कि फिल्मी कहानी पहले से ही निर्धारित होती है और असल जिंदगी की घटनाएं और हालात पूरी तरह अप्रत्याशित होते हैं. पति-पत्नी के बीच दोस्ती को लेकर उठती समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है कि अकसर लोग प्यार और दोस्ती में अंतर नहीं कर पाते. जिसकी वजह से वैवाहिक संबंध टूटने के कगार तक पहुंच जाते हैं. आधुनिकता की बयार के तहत जैसे-जैसे समाज में खुलापन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ही हम एक-दूसरे की भावनाओं को समझने और उन्हें आंकने में अक्षम होते जा रहे हैं. दोस्ती और प्यार दो अलग-अलग बातें हैं. हालांकि दोनों ही व्यक्ति के जीवन में बहुत ज्यादा महत्व रखते हैं लेकिन विवाह के बाद लोगों की प्राथमिकताएं और उनकी संबंधों के प्रति दृष्टिकोण बहुत हद तक परिवर्तित हो जाते हैं. अगर आपका बेस्ट फ्रेंड आपके जीवन में बहुत ज्यादा महत्व रखता है तो संभवत: आपके जीवनसाथी को इस बात से परेशानी होगी.

इसीलिए अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम प्यार और दोस्ती में अंतर करना सीखें. जरूरी नहीं है कि जिसके साथ आप खुद को सहज महसूस करते हैं या जिनके साथ समय बिताना आपको अच्छा लगता है उनसे प्यार भी हो जाए. हो सकता इसके पीछे आप दोनों की परिपक्व आपसी समझ हो, जिसकी वजह से आप एक-दूसरे को अच्छे से समझते हों. अपने जीवन को जटिल या सुलझा हुआ बनाना पूर्णत: आपके ही ऊपर निर्भर है. अगर आप चाहते हैं कि आपका वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहे तो अपनी प्रमुखताओं और संबंधों को सीमित करना और उनके बीच अंतर करना सीखें.

Wednesday, September 21, 2011

लड़की पटाने के तरीके..............

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स्कूलाइगुजरनबाबाकुयुवछात्रोचाहहोतबढ़ियजॉ/करियअनुसातैयारकरनकीकुहोतहैजिनकसबसपहलतीव्ख्‍वाहिहोतअदलड़ककीजिसबाइबिठाकघुमसकें, फिल्मेदेखनसकें, घंटोफोर ‍बतियसकेदोस्तोबीशासकेि आखिहमारखातखुचुकहैऐसदोस्तोलिकुसुझाहैं
* इंट्रोडक्शन : पहले तो जाकर इंट्रोडक्शन की औपचारिकता पूरी करें। केवअपनबारर्मेबताएंपिताजअन्परिजनोआदि उपलब्धि बखाआगबढ़कर न करें
* स्टेप बाई स्टेप ही आपको प्रोसेस पूरी करनी होगी। कभी भी जल्दबाजी न दिखाएं
* कोई भी लड़की आपको पसंद आती है तो उसमें रूचि जरूर लें लेकिन हाथ धोकर पीछे पड़ जाने वाला काम न करें। इससे आपकी छबि अच्छी नहीं बनेगी और लड़की भी आपको फिर 'यूज' करने की ही कोशिश कर सकती है।
* ऐसा कोई काम न करें कि उसे लगे कि आप उसे प्रभावित करने के लिए कर रहे हैं। सहज रहें। जान-पहचान के बाद भी कभी चाय-कॉफी के लिए सीधे प्रपोज न करें। हां यदि क्लास आदि के बाद कभी समय है या बंक मारी है तो ऑफर कर सकते हैं।
* धीरे-धीरे अपने बारे में उसकी राय का पता लगाएं। मतलब वह आपको किस रूप में देखती है। या उसका झुकाव आपकी तरफ है भी या नहीं।
* कभी भी उससे अकेले में मिलने की जल्दबाजी न दिखाएं।
* मौके बेमौके बर्थडे आदि अवसर पर गिफ्‍ट देना न भूलें। शायद ही ऐसी कोई लड़की होगी जिसे चाकलेट या फूलों से लगाव नहीं होगा। कभी-कभी सभी दोस्तों के लिए तो कभी सिर्फ उन्हीं के लिए लेकर जाएं।
* वह लड़की किसी अन्य लड़के से बात करे भी तो सामान्य रूप से लें। उग्र भाव प्रकट न होने दें।
* फिल्मी स्टाइल की हूबहू कॉपी न करें क्योंकि रील लाइफ और रियल लाइफ में जमीन आसमान का अंतर होता है। पिक्चर में हीरो को पूरी स्क्रिप्ट पता होती है। सब कुछ तय लाइन पर चलना होता है जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता।

* एक चीज सुनने में आती है कि यदि लड़की को सेट करना हो तो उसकी सहेली को पूरे दिलो जान से लाइन मारो। थोड़ा सा ये फंडा अपने अनुभव और परिस्थिति के हिसाब से सेट कर लें। हो सकता है आपके साथ काम कर जाए।
* मजनू्ओं की तरह हरकतें न करें गलत इम्प्रेशन पड़ेगा।
* संभव हो तो अपनी बहन से उसकी दोस्ती करा दें। ताकि आपको उनसे और टच में रहने का मौका मिलेगा।
* प्यार की डाली पर खिलने वाले फूलों के साथ कांटे भी होते हैं निश्चित रूप से यह भी आपके ही खाते में आएंगे। जैसे मोहतरमा को चाहने वाले आप अकेले ही नहीं होंगे आपके अन्य साथी वगैरह भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना होगा और साम, दाम, दंड भेद नीति से उन्हें परास्त कर अपनी पताका फहरानी होगी।
* कभी भी बड़ी-बड़ी डींगे नहीं हांके। अपने आपको बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करें। आजकल जमाना सिम्पलिसिटी का है। यदि आप किसी क्षेत्र के माहिर खिलाड़ी हैं भी तो उसे सामान्य ढंग से ही बताएं।
* कभी-कभी किसी मसले समस्या, परेशानी आदि पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करें। यह चीज काफी मायने रखती है। आप दोनों एक-दूसरे के विचारों को तो जानते ही हैं और भावनात्मक रूप से परस्पर करीब भी आते हैं।
दोस्तों से कभी चर्चा करें भी तो विश्वसनीय लोगों से। मतलब जो बात का बतंगड़ न बनाएं। नहीं तो लोग बात का मतलब कुछ और निकालकर बखेड़ा खड़ा करने वालों की कमी नहीं है।
सबसे जरूरी चीज कभी बाय चांस इसमें असफल हो भी जाएं तो नशीली चीजों का सेवन, स्वयं को या लड़की को हानि पहुंचाने जैसा कई कदम न उठाएं। इससे तो 'तू नहीं तो और सही और नहीं तो और सही' का फामूला सर्वथा बेहतर है।
तो इस परीक्षा पर खरा उतरने के लिए जुट जाएं तैयारी में। विश यू गड लक।

मौन भाषा प्यार की.....

Romance tips in hindi
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प्यार को शब्दों की जंजीर में नहीं बांधा जा सकता। यह तो वह पंछी है, जो चंचल मन-सा पल में जमीं और पल में आसमां चूमने लगता है। सच तो यह है कि प्यार एक एहसास है, इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। इसे देखा जा सकता है, आंखों से आंखों में। प्यार की भाषा मौन होती है।

पेड़ के ऊपर की फुनगी पर एक चिड़िया बैठी थी। तभी कहीं दूर से एक दूसरी चिड़िया आई और पेड़ की एक शाख पर बैठ गई। फुनगी पर बैठी चिड़िया झट से फुदककर नीचे वाली चिड़िया के पास आई। दोनों ने पास-पास सरककर, चोंच से चोंच मिलाकर जाने क्या बात की और अगले ही पल दोनों साथ-साथ दूर उड़ चलीं।

दो अपरिचित, अनजान पंछी मौन की जिस भाषा में बात कर हमराही बने, वह थी प्यार की भाषा। प्यार की अबोली बोली के जादू ने दो दिलों के बीच की दूरी को खत्म कर दिया।

यह प्यार क्या है जो दुनिया के तमाम रिश्तों को नाजुक बंधन में बांधे रखता है?

दरअसल प्यार कुदरत का अनमोल तोहफा है। यह ऐसी दौलत है जो हर किसी के पास अथाह होने के बाद भी हर कोई अतृप्त रहता है, प्यार तलाशता रहता है। जीव-जगत के छोटे-बड़े सभी प्राणियों के पास प्यार का अथाह सागर है। फिर भी हर कोई हर किसी से प्यार पाना चाहता है। पोता, दादा से प्यार चाहता है, भाई, बहन से प्यार चाहता है, पड़ोसी पड़ोसी से प्यार चाहता है, छात्र शिक्षक से प्यार चाहता है, जानवर अपने मालिक से प्यार चाहता है यानी हम अपने से संबंधित हर जीव से प्यार की आस रखते हैं।

प्यार देने वाला प्यार के बदले भी प्यार ही चाहता है। प्यार का रिश्ता इस हाथ ले, उस हाथ दे वाला होता है। यदि प्यार एकतरफा हो तो वह रिश्तों को अटूट बंधन में नहीं बांध सकता।

प्यार यादगार होता है। क्षणिक किया हुआ प्यार भी जिंदगी भर की अमानत बन जाता है। और यदि सालों साल किया गया हो तो फिर बात ही क्या! प्यार दिल की गहराइयों से किया जाता है। इसलिए इसे भुला पाना संभव नहीं होता।

Romance tips in hindi
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प्यार लेना और देना दोनों ही बहुत आसान भी है और बहुत मुश्किल भी। किसी को प्यार देने में कुछ खर्च नहीं होता। बस जरूरत होती है इच्छा की, भावनाओं की, लगाव की। यदि आपकी चाहत है तो चाहे जितना बांटो, लुटाओ यह दौलत खत्म न होगी।

प्यार दीवानगी है। जब प्यार का नशा चढ़ता है तो फिर कोई दूसरी बात नहीं सूझती। इस दीवानगी के कारण ही लोग प्यार में दिलोजान तक देने को तैयार रहते हैं।

प्यार कब, कहां, कैसे, किससे हो जाए, कहा नहीं जा सकता। यह भी कहा जाता है कि 'प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है।' जरूरी नहीं कि प्यार सुंदर व्यक्ति या वस्तु से हो। बस, मन में प्यार की घंटी बजनी चाहिए फिर तो 'दिल लगा मेंढकी से, तो वह भी परी लगती है।'

प्यार भले ही तौलकर न किया जाए, फिर भी अंतरतम से प्यार किसी एक को ही सबसे अधिक किया जाता है। उस एक को प्यार देने के चक्कर में दूसरों पर प्यार कम भी हो जाता है। प्यार अनंत होने के बावजूद हम एक ही सबसे प्यारे पर प्यार लुटाना चाहते हैं। कहा गया है, 'प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो ना समाहिं।'

प्यार में इतनी शक्ति होती है कि वह दो दिलों को एकाकार कर देता है। दोनों एक-दूसरे के प्यार में इतने खो जाते हैं कि उन्हें खुद का भी भान नहीं होता। 'जब वो है तब मैं नहीं, जब मैं हूं तब वो नहीं।'

मैं तुमसे प्यार करता हूं .

Romance tips in hindi
ND
प्यार की कब, किसे, कैसे हो जाए- यह कहा नहीं जा सकता है। प्रेम करने वाले रूमानी दुनिया में पहुंच जाते हैं। काल्पनिकता के घोड़ों पर सवार होकर मानो दूसरी दुनिया की सैर करने लगते हैं। उनका इस दुनिया से नाता टूट-सा जाता है। वे स्वयं से बातें करने लगते हैं... अपने अंदर जादू-सा परिवर्तन महसूस करते हैं। यहां प्यार हो जाने के कुछ और लक्षण बताए जा रहे हैं। यदि इनमें से कुछ लक्षण आप में भी हैं... तो समझें आपको भी प्यार हो गया।

* उसकी बेतुकी या बच्चों जैसी हरकतें भी आपको अच्छी लगने लगे।

* आपमें दयालु और उदार के भाव आ जाएं। दूसरों की मदद करना आपको अच्छा लगने लगे।

* रोमांटिक गाने सुनकर आपका मन झूमने के लिए बेताब होने लगे।

* जब बात-बात पर मन खुशी से झूम उठे या मन रोने या रूठने का करने लगे।

* उनका मन में खयाल आते ही दिल में कुछ-कुछ होने लगे।

* आपका दिल हमेशा उससे मिलने के लिए बेचैन रहने लगे।

* उसके आने के पहले बहुत कुछ कहने को मन करे। उसके आने पर कुछ न कह पाएं। लब सिर्फ फड़फड़ाकर रह जाएं। कोई भी नई चीज खरीदने पर आपको लगने लगे पहले उसे दिखाऊं।

* उससे मिलने के लिए जाते वक्त दिल में अजीब-सी गुदगुदी होने लगे। मन प्रफुल्लित होकर शरीर हवा में उड़ने लगे।

* आप अपने बॉडी और फिगर पर अधिक ध्यान देने लगें। इसके लिए जिम आने लगें।

* बार-बार आप खुद को आईने के सामने खड़े पाएं। चेहरे पर हल्की-सी दाग से आपका मन विचलित होने लगे।

* आप अपने बालों का स्टाइल बदल लें। इसके लिए दोस्तों से सलाह लेने लगें।

* आपमें गजब का ड्रेस सेंस आ जाए। हर घंटे ड्रेस बदलने का मन होने लगे या हर रोज नई ड्रेस पहनने या नई ड्रेस खरीदने की इच्छा करने लगे।

* अपनी पसंद-नापसंद को भूल जाएं। उसकी पसंद-नापसंद को ज्यादा एहमियत देने लगें।

* उसकी हर अदा पर हो जाएं आप फिदा।

* आप अपनी लाइफ स्टाइल छोड़कर उसकी लाइफ स्टाइल अपनाने लगें।

* आप उससे दोस्तों के साथ मिलने की बजाय अकेले में मिलना चाहें। उससे अकेले में ही बात करने की इच्छा हो।

* आपका दिल उस पर मर मिटने को होने लगे।

* मैं की बजाय 'हम' शब्द का आप अधिकाधिक इस्तेमाल करने लगें।

* फुर्सत के क्षणों में आप रोमांटिक कल्पनाओं में डूब जाएं। आपको लगने लगे, वह आपकी बाहों में है या आप उसकी गोद में सिर रखकर लेटे हैं।

* उसके जैसा कोई खूबसूरत न लगे। सारी दुनिया की लड़कियां उसके सामने बदसूरत और फीकी लगने लगे।

Thursday, September 1, 2011

क्या हुआ जो दिल टूट गया..???

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ब्रेकअप के बाद नॉर्मल लाइफ में लौटना आसान नहीं होता, लेकिन यह क्यों भूला जाए कि जीवन चलने का नाम होता है और ऐसी बातों से इसकी गाड़ी पर ब्रेक नहीं लगता। प्यार की खुमारी ऐसी ही होती है कि जब तक इंसान उसमें डूबा रहता है, उसे दुनिया का होश नहीं रहता। लेकिन यही रिश्ता अगर टूट जाए, तो इस दर्द से उबर पाना आसान नहीं होता। लेकिन जिंदगी किसी के जाने से रुकती नहीं है और इसे तो आगे ही बढ़ा होता है। ऐसे में जरूरी है कि इस चीज से बाहर आकर मुस्कुराना सीखना चाहिए।

खुद को अच्छे से ट्रीट करें
ब्रेकअप के बाद अक्सर लोग एकदम टूट जाते हैं या फिर खुद को कोसते रहते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो ऐसा न करें। अपने अतीत को भूलने की कोशिश करें। इससे आप इमोशनल तौर पर कमजोर नहीं होंगे। खुद को महत्व देना सीखें। ब्रेकअप के बाद कई लोग जिम या पार्लर जाना बंद कर देते हैं। आप ऐसा कतई न करें।
इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि आपको इसी समाज में जीना है और वह भी सिर उठाकर। तो सारा ध्यान अपने करियर पर फोकस करें। अपनी पसंद की हॉबी क्लास जॉइन करें। अपना सही रूटीन बनाएं और उसी को फॉलो करें। अपने मूड को अच्छी चीजों की ओर मोड़ें और पॉजिटिव सोच रखें। कभी यह न सोचें कि ब्रेकअप के बाद आपकी लाइफ में कुछ भी अच्छा नहीं होगा।

दोस्तों के साथ समय बिताएं
मूड ऑफ करके घर में अकेले रहने से बात नहीं बनेगी। अपने दोस्तों को हमेशा विश्वास में रखें और करीबी दोस्तों से अपनी बातें शेयर करें। उनके साथ बाहर घूमने भी जाएं। इस तरह आप अपनी भावनाएं उनसे कह पाएंगे। अपने दोस्तों के साथ कॉमेडी फिल्म देखना अच्छा आइडिया रहेगा। अगर आप किताबें पढ़ने के शौकीन हैं, तो अपने फेवरेट लेखक की बुक्स पढ़ें या फिर अच्छा म्यूजिक सुनें।

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ध्यान कहीं और लगाएं
अपनी एक्स गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के लेटर्स व फोटो संभालकर न रखें। अपनी भावनाओं को छिपाएं नहीं और ना ही बहुत ज्यादा रोएं। लोग अक्सर अपने लवर को याद करके आंसू बहाने लगते हैं और यही उनकी कमजोरी बन जाते हैं। इससे आप फिजिकल और मेंटल तौर पर कमजोर पड़ सकते हैं।

अपने पुराने प्यार को अपनी जिंदगी से दूर करने के लिए उससे जुड़ी सारी चीजें खुद से दूर कर दें। आप चाहें तो अपना ध्यान स्प्रिचुएलिटी की ओर भी लगा सकते हैं। इससे आपको स्ट्रेंथ मिलेगी। अगर आपका इंटरेस्ट सोशल वर्क में है, तो एनजीओ जॉइन कर लें या कोई और सुकून देने वाला काम करें। ऐसे लोगों से मिलकर आपको अहसास होगा कि तमाम लोग आपसे भी ज्यादा परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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संयम रखें
कुछ लोग ब्रेकअप के दर्द से उभरने के लिए जल्दबाजी में दूसरा अफेयर शुरू कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि इस तरह वे अपना तनाव दूर कर लें। हालांकि कई बार यह फैसला आपको और परेशान कर सकता है। इसलिए जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं और अच्छी तरह सोचने व समझने के बाद ही आगे बढ़ें।

आगे की सोचें
अपने फ्यूचर पर ध्यान दें। अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद अपराधबोध महसूस करने लगते हैं या फिर नकारात्मक विचारों में घिर जाते हैं। अगर आप इनमें से एक हैं, तो इस बात को ध्यान में रखकर चलें कि जो होता है, अच्छे के लिए होता है। इस बात का भी ध्यान रखें कि अपने कलीग्स व दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के बारे में गॉसिप न करें।